हिमाचल सरकार कम करेगी IAS अधिकारी, CM सुक्खू बोले- गाड़ियां भी 56 से 30 की जाएंगी; 200 करोड़ की बचत होगी
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने घोषणा की कि हिमाचल प्रदेश में आईएएस, आईएफएस और आईपीएस अधिकारियों की संख्या कम की जाएगी, जिससे 200 करोड़ रुपये की बचत होगी।

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।
HighLights
आईएएस अधिकारियों की संख्या 153 से घटाकर 130 होगी।
सरकार को लगभग 200 करोड़ रुपये की बचत होगी।
फील्ड अधिकारियों की गाड़ियां 56 से घटाकर 30 की जाएंगी।
जागरण संवाददाता, शिमला। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अधिकारियों की संख्या जरूरत के मुताबिक ही रखी जाएगी। सरकार अधिकारियों की फौज नहीं, बल्कि योजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी प्रशासनिक ढांचा चाहती है। मीडिया से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएएस के 153 पदों को घटाकर 130 किया जाएगा, जबकि उनकी व्यक्तिगत राय है कि प्रदेश में आइएएस अधिकारियों की संख्या 100 से 110 के बीच होनी चाहिए।
इससे सरकार को करीब 200 करोड़ रुपये की बचत होगी, जिसे जनता के हित में खर्च किया जा सकेगा। आइएफएस के पद भी 118 से घटाकर 83 किए जा रहे हैं। आइपीएस के पदों में भी कमी की जाएगी।
गाड़ियों की संख्या 56 से 30 की जाएगी
सुक्खू ने कहा कि प्रशासनिक खर्च कम करने के साथ फील्ड स्ट्रेंथ में भी कटौती की जाएगी। फील्ड अधिकारियों के लिए उपलब्ध 56 गाड़ियों की संख्या घटाकर 30 की जाएगी। सरकार सभी सरकारी वाहनों को इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में भी काम कर रही है। इस संबंध में सचिव को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
प्रतिनियुक्ति पर जाने वालों को नहीं रोक रही सरकार
उन्होंने कहा कि जो अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं, सरकार उन्हें नहीं रोक रही है और उनकी फाइलों को भी शीघ्र मंजूरी दी जा रही है। अधिकारियों को भी स्थिति की समझ है और वे केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आगे आ रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) में भी अधिकारियों की संख्या कम की जाएगी।
जयराम करोड़ों की देनदारियां छोड़ गए
विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि उनकी सरकार कर्मचारियों के हितों का पूरा ध्यान रख रही है और चरणबद्ध तरीके से उन्हें लाभ प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर को पहले अपने कार्यकाल पर नजर डालनी चाहिए, जब वे प्रदेश पर करोड़ों रुपये की देनदारियां छोड़ गए थे।
