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हिमाचल में 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर निर्माण पर NGT सख्त, वन विभाग से मांगा शपथपत्र

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Updated: Thu, 13 Aug 2026 05:12 PM (IST)

एनजीटी ने हिमाचल प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्र में 200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर बने चबूतरे पर वन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है।

200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर निर्माण पर एनजीटी ने संज्ञान लिया है। (फोटो एआई से बनाया है)

200 साल पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर निर्माण पर एनजीटी ने संज्ञान लिया है। (फोटो एआई से बनाया है)

HighLights

  1. एनजीटी ने हिमाचल वन विभाग से मांगा स्पष्टीकरण।

  2. 200 साल पुराने बरगद पेड़ के चबूतरे का मामला।

  3. छह सप्ताह में शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के संरक्षित वन क्षेत्र में करीब 200 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ के चारों ओर बनाए सुरक्षात्मक चबूतरे के मामले में एनजीटी ने प्रदेश वन विभाग से स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला परमजीत मनकोटिया बनाम हिमाचल सरकार एवं अन्य के रूप में एनजीटी के समक्ष विचाराधीन है। 11 अगस्त को हुई सुनवाई में एनजीटी की प्रधानपीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद ने संबंधित अधिकारियों की ओर से दाखिल जवाब पर विचार किया।

आवेदक ने संरक्षित वन क्षेत्र में स्थित प्राचीन बरगद के पेड़ के चारों ओर कथित रूप से आवश्यक अनुमति के बिना सुरक्षात्मक चबूतरा बनाए जाने पर आपत्ति जताई है।

अधिकारियों ने रखा पक्ष

एनजीटी के समक्ष अधिकारियों ने बताया कि बरगद के चारों ओर केवल छोटा सुरक्षात्मक बैठने का चबूतरा बनाया था। इसका उद्देश्य करीब 200 वर्ष पुराने पेड़ की सुरक्षा करना, उसकी जड़ों के आसपास मिट्टी के कटाव को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। निर्माण कार्य अब रोक दिया है। 

एनजीटी ने पूछ किस से अनुमति ली 

एनजीटी ने संबंधित अधिकारियों से स्पष्ट करने को कहा है कि पेड़ के चारों ओर चबूतरे का निर्माण किस प्रक्रिया के तहत किया और इसके लिए किस सक्षम प्राधिकारी से अनुमति ली थी। 

शपथपत्र दाखिल करें

एनजीटी ने वन विभाग के प्रधान सचिव सहित संबंधित प्रतिवादियों को छह सप्ताह के भीतर शपथपत्र दाखिल कर निर्माण की अनुमति और पूरी स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

कांगड़ा निवासी है याचिकाकर्ता

याचिकाकर्ता कांगड़ा जिले की तहसील जवाली के गांव सिद्धपुरघाड़ का निवासी है। याचिकाकर्ता करीब 200 वर्ष पुराने बरगद के पेड़ के आसपास किए जा रहे अस्थायी एवं असंधारणीय निर्माण को लेकर चिंतित हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि पेड़ के चारों ओर किए जा रहे निर्माण से इसकी जड़ प्रणाली वाले क्षेत्र को नुकसान पहुंच रहा है।