शिमला में प्रीप्रेड टैक्सी चलाने की तैयारी, हिमाचल सरकार तय करेगी किराया; पुलिस बनाएगी प्रीपेड बूथ
शिमला में पर्यटकों को लूट से बचाने के लिए हिमाचल सरकार प्रीपेड टैक्सी सेवा शुरू करेगी। शहर के विभिन्न स्थानों पर पुलिस की निगरानी में प्रीपेड बूथ स्था ...और पढ़ें

शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम को ज्ञापन सौंपते टैक्सी ऑपरेटर्स। सौ. डीपीआर
HighLights
शिमला में पर्यटकों के लिए प्रीपेड टैक्सी सेवा शुरू होगी।
पुलिस की निगरानी में विभिन्न स्थानों पर प्रीपेड बूथ बनेंगे।
टैक्सी ऑपरेटरों ने अवैध सेवाओं पर प्रतिबंध की मांग की।
राज्य ब्यूरो, शिमला। शिमला शहर की सड़कों पर अब प्रीपेड टैक्सियां दौड़ेंगी। इसके लिए शहर के विभिन्न स्थानों पर प्रीपेड टैक्सी बूथ बनाए जाएंगे। इन बूथ पर पुलिस जवान तैनात रहेंगे। पर्यटकों का विश्वास जीतने व उन्हें लूट से बचाने के लिए सरकार ने यह निर्णय लिया है।
प्रीपेड टैक्सियों का किराया जल्द निर्धारित किया जाएगा। टैक्सियों का किराया प्रति किलोमीटर की दर से तय होगा। इसके लिए आरटीओ को निर्देश दिए हैं। वे इसका प्रस्ताव तैयार करेंगे और सरकार को भेजेंगे। आरटीओ सभी टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधियों से भी बात करेंगे व उनके सुझाव लेंगे।
यूनियन के पदाधिकारियों के साथ अधिकारियों की बैठक
शनिवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में इसको लेकर बैठक हुई। बैठक में शहर की कई टैक्सी यूनियनों के पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। बैठक में शिमला शहर में टैक्सी स्टैंड पर प्रीपेड बूथ स्थापित करने पर चर्चा हुई। इससे टैक्सी आपरेटर किसी भी सवारी व पर्यटक से अधिक पैसे नहीं वसूल सकेंगे।
शिमला में पांच से छह स्थानों पर ये प्रीपेड बूथ स्थापित होंगे। पर्यटन स्थल कुफरी, नालदेहरा सहित अन्य स्थानों पर भी बूथ बनाए जाएंगे। बैठक में निदेशक परिवहन नीरज कुमार, नरेश ठाकुर, आरटीओ विश्व देव मोहन भी मौजूद थे।
2004 में भी बनी थी योजना
शहर में कई टैक्सी यूनियनें पंजीकृत हैं। लगभग 10 से 12 हजार टैक्सियां यहां पर चलती हैं। वर्ष 2004 में भी प्रीपेड आधार पर टैक्सी चलाने की योजना तैयार की गई थी। 2019 में फिर इसके दाम निर्धारित किए गए, लेकिन योजना सिरे नहीं चढ़ी। इसका मकसद लोगों को मनमाफिक किराये से निजात दिलाना था।
प्रीपेड टैक्सी एप का डेमो भी दिया
शिमला में 25 यूनियनों को प्रीपेड टैक्सी एप का डेमो भी दिया था, जिसमें बताया था कि यह योजना कैसे धरातल पर उतरेगी। एप में जहां टैक्सी शेयरिंग का विकल्प होगा वहीं इसके लिए लोग आनलाइन बुकिंग की भी सुविधा होगी। अब पुलिस के सहयोग से इसे शुरू किया जा रहा है।
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टैक्सी ऑपरेटरों को इस कारण हो रहा नुकसान
बैठक में राजधानी टैक्सी मैक्सी आपरेटर वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों ने अतिरिक्त मुख्य सचिव के समक्ष अपनी मांगें भी रखीं। टैक्सी चालकों ने बताया कि वे पर्यटकों को बेहतर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अवैध टैक्सी संचालन, फर्जी गाइड और निजी वाहनों के टैक्सी के रूप में इस्तेमाल के कारण उन्हें नुकसान झेलना पड़ रहा है।
टैक्सी ऑपरेटर्स ने मांग पत्र भी सौंपा
उन्होंने मांग कि निजी लोकल रूट की बसों में टूरिस्ट का कार्य करने वाली बसों पर सख्त कार्रवाई की जाए। एसोसिएशन ने प्रदेश के टैक्सी आपरेटरों की समस्याओं पर मांग पत्र अतिरिक्त मुख्य सचिव को सौंपा। एसोसिएशन ने बताया कि प्रदेश में लगभग 80 हजार टैक्सी आपरेटर कार्यरत हैं, जिनमें से बड़ी संख्या में बैंक ऋण लिया है। वर्तमान में लगभग 60 प्रतिशत आपरेटर ईएमआइ चुकाने में असमर्थ हो चुके हैं।
सरकार से टैक्सी परमिट की वैधता अवधि 12 से 15 वर्ष तक करने की मांग भी उठाई गई। ओला-उबर, ब्ला-ब्ला, रैपिडो जैसी निजी कंपनियों द्वारा निजी गाड़ियों व बाइक से किए जा रहे अवैध टैक्सी संचालन को तुरंत बंद करने और कंपनियों को ब्लैक लिस्ट करने की मांग उठाई गई।