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'कैरी बैग उपलब्ध करवाना मार्ट की जिम्मेदारी', उपभोक्ता आयोग शिमला ने सुनाया फैसला; पैसे वसूलने पर लगाया जुर्माना

By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 26 Mar 2026 04:53 PM (IST)Updated: Thu, 26 Mar 2026 05:15 PM (IST)

शिमला उपभोक्ता आयोग ने एक निजी मार्ट पर कैरी बैग के लिए 15 रुपये वसूलने पर 5000 रुपये का जुर्माना ...और पढ़ें

शिमला में कैरी बैग के पैसे वसूलने पर उपभोक्ता आयोग ने मार्ट को जुर्माना लगाया है। प्रतीकात्मक फोटो

शिमला में कैरी बैग के पैसे वसूलने पर उपभोक्ता आयोग ने मार्ट को जुर्माना लगाया है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. शिमला उपभोक्ता आयोग ने मार्ट पर जुर्माना लगाया।

  2. कैरी बैग के 15 रुपये वसूलने पर कार्रवाई हुई।

  3. मार्ट को 5000 रुपये मुआवजा देने का आदेश।

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला शहर में एक निजी मार्ट को कैरी बैग के 15 रुपये वसूलने पर जिला उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग ने संज्ञान लिया। उपभोक्ता आयोग ने जुर्माना लगाते हुए आदेश दिया कि कैरी बैग उपलब्ध करवाना मार्ट की जिम्मेदारी है। उपभोक्ता की शिकायत पर मार्ट को 15 दिन में पांच हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि मुआवजे की राशि 15 दिनों के अंदर मार्ट अदा करे।

आयोग ने मार्ट प्रबंधन को न केवल वसूली गई राशि लौटाने, बल्कि मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवजा देने के भी निर्देश दिए हैं। यह मामला शंकर शर्मा और नरेंद्र मेहता द्वारा दायर शिकायत से जुड़ा है।

597 रुपये का सामान खरीदा, कैरी बैग के अतिरिक्त पैसे वसूल लिए

शिकायतकर्ताओं के मुताबिक उन्होंने 31 अक्टूबर 2025 को छोटा शिमला स्थित एक निजी मार्ट से घरेलू उपयोग का सामान खरीदा। कुल बिल 612 रुपये बना, जबकि खरीदे गए उत्पादों की कीमत 597 रुपये थी। शेष 15 रुपये कैरी बैग के नाम पर अतिरिक्त रूप से वसूले गए। जब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई, तो मार्ट प्रबंधन ने स्पष्ट रूप से कहा कि मुफ्त कैरी बैग उपलब्ध नहीं करवाया जाता है।

विरोध करने पर किया दुर्व्यवहार

शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि उन्हें अपने साथ कैरी बैग लाने की अनुमति भी नहीं दी गई, जिससे वे मजबूर होकर मार्ट से ही बैग खरीदने को विवश हुए। साथ ही, जब उन्होंने इस अतिरिक्त शुल्क का विरोध किया तो मार्ट के कर्मचारियों द्वारा उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया।

उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया

उन्होंने इसे उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन और अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए आयोग का दरवाजा खटखटाया। सुनवाई के दौरान मॉल प्रबंधन की ओर से कोई पक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया और मामला एकतरफा (एक्स-पार्टी) आगे बढ़ा। आयोग ने उपलब्ध साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर पाया कि ग्राहकों को अपने कैरी बैग लाने से रोकना और फिर उनसे बैग खरीदने के लिए बाध्य करना पूरी तरह गलत है।

सामान के साथ कैरीबैग उपलब्ध करवाना मार्ट का जिम्मा

आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि विक्रेता की जिम्मेदारी होती है कि वह सामान को डिलीवेरेबल स्टेट में ग्राहक को सौंपे। इसके लिए पैकेजिंग या कैरी बैग उपलब्ध करवाना उसकी जिम्मेदारी है और इसके लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जा सकता। आयोग ने यह भी कहा कि ग्राहकों को बिना पूर्व सूचना या स्पष्ट जानकारी दिए अतिरिक्त शुल्क लेना उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है।

आयोग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद समाधान आयोग के पूर्व निर्णयों का भी हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि कैरी बैग के लिए अलग से शुल्क लेना तब तक उचित नहीं है जब तक उसकी कीमत और विवरण पहले से स्पष्ट रूप से प्रदर्शित न किए गए हों और ग्राहक को उसे लेने के लिए बाध्य न किया जाए।