शिमला में गहराया पेयजल संकट, बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोग; भाजपा ने सरकार और निगम को घेरा
शिमला में गहराते पेयजल संकट को लेकर भाजपा ने कांग्रेस सरकार और नगर निगम पर जोरदार हमला बोला है। पार्टी ...और पढ़ें

शिमला में गहराया पेयजल संकट, बूंद-बूंद के लिए तरस रहे लोग (फाइल फोटो)
HighLights
शिमला में पीने के पानी की भारी किल्लत।
972 करोड़ की 24x7 पेयजल योजना अधूरी।
भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर साधा निशाना।
जागरण संवाददाता, शिमला। भाजपा प्रदेश मीडिया संयोजक कर्ण नंदा ने राजधानी शिमला में गहराते पेयजल संकट को लेकर कांग्रेस सरकार और नगर निगम शिमला पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि शिमला शहर से पीने का पानी गायब है और जनता पानी के लिए तरस रही है।
कई क्षेत्रों में लोगों को पानी के लिए कई-कई दिन इंतजार करना पड़ रहा है। जिस राजधानी में सरकार 24 घंटे पानी देने के सपने दिखाती रही, वहां आज लोगों के सामने अपने रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए पर्याप्त पानी जुटाना चुनौती बन गया है।
कर्ण नंदा ने कहा कि लगभग 972 करोड़ रुपये की 24×7 पेयजल योजना को शिमला की पानी की समस्या का स्थायी समाधान बताकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन आज उसी योजना के काम में अनियमितताओं की आशंका के चलते मुख्यमंत्री कार्यालय को जांच के आदेश देने पड़े हैं।
सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की निगरानी समय रहते क्यों नहीं की गई और जनता को पानी उपलब्ध करवाने के बजाय योजना जांच के घेरे में कैसे पहुंच गई।
इसके तहत 5,500 कनेक्शन दिए जाने थे, लेकिन नई लाइन से अभी तक एक भी कनेक्शन नहीं दिया गया। 19 टैंक बनने थे, लेकिन एक भी टैंक तैयार नहीं हुआ। 136 किलोमीटर लंबी लाइन में केवल 51 किलोमीटर लाइन बिछ पाई है और 27 किलोमीटर फीडर में से मात्र 5 किलोमीटर का कार्य हुआ है।
नॉन-रेवेन्यू वाटर पर शून्य प्रतिशत काम और क्लोरीनेशन को लेकर भी काम नहीं होने की बात सामने आई है। ये तथ्य योजना की गति और क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
कर्ण नंदा ने कहा कि एक तरफ शिमला की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है और दूसरी तरफ करोड़ों रुपये की पेयजल योजना अधूरी पड़ी है। कांग्रेस सरकार और नगर निगम केवल बहाने बनाकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते। राजधानी में लोगों को चौथे दिन तक पानी मिलने की स्थिति यदि पैदा हो रही है तो सरकार के 24घंटे पानी के दावे अपने आप सवालों के घेरे में आ जाते हैं।
