हिमाचल में शिक्षक पढ़ाएंगे प्राकृतिक आपदा का पाठ, सरकारी स्कूल और आईटीआई में होगा स्पेशल विषय
Himachal Government School: हिमाचल सरकार आईटीआई और पॉलिटेक्निक कॉलेजों में आपदा प्रबंधन और तकनीक के उपयोग का नया विषय शुरू करेगी। तकनीकी शिक्षा विभाग ...और पढ़ें

राज्य ब्यूरो, शिमला। Himachal Government School: हिमाचल सरकार औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) व पॉलिटेक्निक कालेजों में शिक्षकों को नए विषय (आपदा में तकनीक का उपयोग) को पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। तकनीकी शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम को तैयार कर रहा है। इसके बाद शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण का करिकुलम भी तैयार किया जाएगा।
यह पाठ्यक्रम किसी विषय के पाठ के रूप में शामिल नहीं होगा, बल्कि एक अलग विषय के तौर पर इसे पढ़ाया जाएगा। इसकी बाकायदा परीक्षा होगी व अंक भी डिग्री व डिप्लोमा में जुड़ेंगे। शिक्षकों को इस पाठ्यक्रम को पढ़ाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि सरकारी व निजी आईटीआई व पॉलिटेक्निक कालेजों में यह विषय शुरू किया जाएगा।
ट्रेड चाहे कोई भी हो सभी में यह एक विषय उसमें अनिवार्य रूप से शामिल किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इसे पढ़ाना अनिवार्य किया गया है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) का पाठ्यक्रम को पूरा पढ़ाना होता है। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार पाठ्यक्रम को शामिल कर सकती है। इसमें कोई मनाही नहीं है।
विभाग अब आइटीआई व तकनीकी संस्थानों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षित करेगा जिसमें उन्हें बताया जाएगा कि यह पाठ्यक्रम कैसे पढ़ाए जाने हैं। हिमाचल में 152 सरकारी व 133 निजी आईटीआई हिमाचल में सरकारी क्षेत्र में 152 आईटीआई व निजी क्षेत्र में 133 आईटीआई चल रही है। इसी तरह 17 पॉलटेकनिक कालेज सरकारी व 7 निजी क्षेत्र में चल रहे हैं।
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तकनीकी कालेज व आईटीआई में करीब 35 हजार विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इन सभी के लिए यह पाठ्यक्रम अनिवार्य होगा। तकनीकी शिक्षा मंत्री ने बताया कि विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा कि आपदा के समय तकनीक का किस तरह उपयोग किया जाएगा।
आपदा से बचाव व प्रबंधन की बारीकियां भी उन्हें सिखाई जाएगी। सबसे जरूरी तकनीक का इस्तेमाल करना है ताकि कम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा लोगों को बचाया जा सकें। जान माल की सुरक्षा की जा सकें। इसके बारे में उन्हें बताया जाएगा। इस विषय को शुरू करने का दूसरा मकसद ये भी है कि हर पंचायत में तकनीकी रूप से दक्ष मानव बल (मैन पावर) उपलब्ध रहेगा।