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हिमाचल में कहां बनेगा नया जिला, कहां बदलेगी तहसील की सीमा? प्रशासनिक नक्शा बदलने की कवायद शुरू

Published: Fri, 06 Nov 2026 10:10 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक नक्शा बदलने की कवायद शुरू हो गई है, जिसके लिए पुनर्गठन आयोग की पहली बैठक हुई।

हिमाचल में कहां बनेगा नया जिला, कहां बदलेगी तहसील की सीमा?

हिमाचल में कहां बनेगा नया जिला, कहां बदलेगी तहसील की सीमा?

HighLights

  1. पुनर्गठन आयोग ने हिमाचल में प्रशासनिक बदलाव पर चर्चा की।

  2. नए जिलों, उपमंडलों, तहसीलों के गठन पर विचार होगा।

  3. सरकारी सेवाओं को आम लोगों तक पहुंचाना मुख्य उद्देश्य।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक नक्शा बदलने की कवायद शुरू हो गई है। आने वाले समय में प्रदेश में कहां नया जिला बनेगा, किस क्षेत्र को नया उपमंडल या तहसील मिलेगी और कहां मौजूदा प्रशासनिक सीमाओं में बदलाव होगा, इन सभी सवालों पर अब पुनर्गठन आयोग मंथन करेगा।

आयोग केवल नई प्रशासनिक इकाइयां बनाने की मांगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि मौजूदा जिलों, उपमंडलों, तहसीलों, उपतहसीलों और विकास खंडों की जरूरत और उपयोगिता भी परखेगा। शुक्रवार को आयोग की पहली बैठक में पुनर्गठन के लिए प्रारंभिक मानक और रूपरेखा तय करने पर चर्चा हुई।

हिमाचल हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति धर्म चंद चौधरी (सेवानिवृत्त) जो आयोग के अध्यक्ष हैं की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि प्रशासनिक पुनर्गठन का उद्देश्य केवल कार्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि आम लोगों के लिए सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान बनाना होना चाहिए।

इसके लिए जनसंख्या, क्षेत्रफल, भौगोलिक परिस्थितियों, प्रशासनिक दक्षता और लोगों की सुविधा को प्रमुख आधार बनाया जाएगा। पहाड़ी प्रदेश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां लोगों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। आयोग ऐसे क्षेत्रों की जरूरतों का विशेष आकलन करेगा।

किसे अलग पहचान, किसकी बदलेगी सीमा

आयोग नए प्रशासनिक क्षेत्र बनाने के साथ मौजूदा इकाइयों के विलय और विभाजन से जुड़े प्रस्तावों की भी जांच करेगा। मसलन, किसी क्षेत्र की आबादी और भौगोलिक स्थिति अलग तहसील या उपमंडल की जरूरत पैदा करती है या नहीं, मौजूदा प्रशासनिक इकाई का क्षेत्र बहुत बड़ा है या वहां सुविधाओं का विस्तार जरूरी है, इन पहलुओं पर विचार होगा। इससे नई इकाई बनाने की मांग करने वाले क्षेत्रों के साथ मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहने वाले क्षेत्रों की उम्मीदें भी आयोग से जुड़ेंगी।

उपायुक्तों से मांगे जाएंगे आंकड़े

पुनर्गठन के लिए आयोग संबंधित विभागों और सभी जिलों के उपायुक्तों से जरूरी जानकारी और सुझाव जुटाएगा। इसमें जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति, प्रशासनिक कार्यालयों की दूरी और उपलब्ध सुविधाओं से जुड़े आंकड़े शामिल होंगे।

जनप्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों से भी विचार-विमर्श किया जाएगा, ताकि किसी क्षेत्र के पुनर्गठन का फैसला केवल कागजी आंकड़ों के आधार पर न हो, बल्कि स्थानीय जरूरतों को भी समझा जा सके।

नए कार्यालयों का खर्च भी बनेगा कसौटी

नई तहसील, उपमंडल या जिला बनाने के लिए भवन, अधिकारी-कर्मचारी और आधारभूत ढांचे की जरूरत होगी। ऐसे में आयोग वित्तीय प्रभावों का भी आकलन करेगा। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने पर जोर रहेगा, ताकि पुनर्गठन से सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। आयोग अब मौजूदा प्रशासनिक ढांचे की विस्तृत समीक्षा कर विभागों और जिला प्रशासन से जानकारी जुटाएगा।

बैठक में आयोग के सदस्य अधिवक्ता विशाल पंवार, सेवानिवृत्त आइएफएस अधिकारी राजेश शर्मा, सदस्य सचिव एवं निदेशक भू-अभिलेख तोरुल एस. रविश, सचिव सामान्य प्रशासन डा. यूनुस और विशेष सचिव हरबंस सिंह बरसकों उपस्थित रहे।

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