विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जरूरतमंद लड़कियों की उम्मीद बनी नालागढ़ की डिंपल, आत्मनिर्भर बनने में कर रहीं मदद; 500 को दिलाया रोजगार

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 13 Oct 2026 11:54 AM (IST)

नालागढ़ की डिंपल परमार ने 'रोजगार मिशन हिमाचल' के तहत जरूरतमंद युवाओं, खासकर युवतियों को आत्मनिर्भर बनाने का बीड़ा उठाया है।

नालागढ़ की डिंपल और लगाया गया रोजगार मेला।

नालागढ़ की डिंपल और लगाया गया रोजगार मेला।

HighLights

  1. डिंपल परमार ने 'रोजगार मिशन हिमाचल' की शुरुआत की।

  2. 36 मेलों से 500 युवाओं, 80 युवतियों को मिला रोजगार।

  3. युवतियों को मुफ्त परामर्श, मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देती हैं।

सुनील शर्मा, सोलन। हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक शहर बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ में नौकरी की तलाश में आने वाले युवाओं, खासकर युवतियों के लिए चुनौती केवल रोजगार प्राप्त करना ही नहीं, बल्कि घर से दूर अनजान शहर में सुरक्षित भविष्य की शुरुआत करना भी है। नालागढ़ की ढांग निचली पंचायत की 28 वर्षीय डिंपल परमार ऐसी युवतियों के लिए उम्मीद बनी हैं, जो आत्मनिर्भर होना चाहती हैं, लेकिन परिवार से दूर जाकर अनजान माहौल में नौकरी शुरू करने से हिचकिचाती हैं।

सामान्य परिवार से संबंध रखने वाली डिंपल ने अपने अनुभवों को दूसरों के लिए अवसर बनाने का प्रयास किया है। करीब तीन वर्ष पहले नौकरी की तलाश में बद्दी पहुंचीं डिंपल ने युवाओं की प्लेसमेंट से जुड़ी संस्था में काम किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं के लिए नौकरी हासिल करने की प्रक्रिया में शुल्क देना बड़ी परेशानी है।

रोजगार मिशन हिमाचल

दूसरे जिलों से आने वाली युवतियों को रहने, मार्गदर्शन और अनजान शहर में सहारे की जरूरत होती है। इन अनुभवों से उन्हें निश्शुल्क रोजगार की दिशा में काम करने वाली संस्थाओं की तलाश की प्रेरणा मिली। उनकी सोच बद्दी के लघु उद्योग संघ से मेल खाई और रोजगार मिशन हिमाचल आरंभ हुआ।

36 रोजगार मेले लगाए

हिम जन कल्याण समिति की प्रभारी डिंपल परमार व लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष डा. अशोक राणा के अनुसार, रोजगार मिशन हिमाचल अब तक 36 रोजगार मेले आयोजित कर चुका है। इनमें युवाओं से शुल्क नहीं लिया और प्रदेश के विभिन्न जिलों तक पहुंचने का प्रयास किया गया। मिशन का उद्देश्य उन युवाओं को नौकरी का अवसर देना है, जो आर्थिक या पारिवारिक कारणों से घर से बाहर निकलने में संकोच करते हैं।

काउसिलिंग के बाद मार्गदर्शन

डिंपल ने बताया कि बद्दी स्थित कार्यालय में युवतियों की पहले काउंसिलिंग होती है और फिर मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देकर उन्हें कंपनियों में साक्षात्कार के लिए भेजा जाता है। शुरुआत में जरूरतमंद युवाओं को आवास से संबंधित मदद देने का प्रयास भी किया।

15 हजार रुपये से शुरू हुई कमाई दोगुनी तक पहुंची

इस पहल से अब तक करीब 500 युवाओं को रोजगार पाने में मदद मिली है, जिनमें करीब 80 युवतियां हैं। कुछ ने 15 हजार रुपये वेतन से नौकरी आरंभ की और अनुभव के साथ उनकी आय दोगुनी तक पहुंच गई। डिंपल के मुताबिक, नौकरी हासिल कर युवतियां परिवार की आर्थिक मदद कर पाती हैं।

सरकारी सहयोग नहीं, फिर भी प्रयास जारी 

डिंपल ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2023 में अभियान को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। नौकरी हासिल करने के लिए किए गए संघर्ष के कारण वह उन युवतियों की चिंताओं को समझती हैं, जो अनजान शहर में रहने और काम आरंभ करने को लेकर असहज होती हैं। अभियान में लघु उद्योग संघ का प्रमुख सहयोग रहा है और कुछ रोजगार मेलों में अन्य संस्थाओं ने भी साथ दिया। अभी तक सरकारी स्तर पर कोई सहयोग नहीं मिला है, लेकिन फिर भी अधिक युवतियों को रोजगार से जोड़ने का प्रयास जारी है।

यह भी पढ़ें: बेंगलुरु की चमक छोड़ हिमाचल की एकता और प्रवीण ने शुरू किया उद्यम, 600 से अधिक परिवारों को मिला रोजगार 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।