बद्दी फोरलेन भूमि अधिग्रहण मामले में हिमाचल हाई कोर्ट का संज्ञान, NHAI को तुरंत जमीन का कब्जा सौंपने के निर्देश
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बद्दी-नालागढ़ फोरलेन भूमि अधिग्रहण मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने उपमंडलीय मजिस्ट्रेट को उन जमीनों का भौतिक कब्जा NHAI को सौंपने का आदेश दिया है।

बद्दी नालागढ़ फोरलेन की भूमि अधिग्रहण में देरी पर हिमाचल हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
हाई कोर्ट ने बद्दी फोरलेन भूमि अधिग्रहण पर कड़ा रुख अपनाया।
उपमंडलीय मजिस्ट्रेट को NHAI को जमीन का कब्जा सौंपने का आदेश।
मुआवजा वितरण और 1200 से अधिक मामले अभी भी लंबित।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पिंजौर बाईपास से बद्दी-नालागढ़ बीच बन रहे फोरलेन के भूमि अधिग्रहण और मुआवजा वितरण से जुड़े मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने संबंधित उपमंडलीय मजिस्ट्रेट को आदेश दिया है कि वह उन जमीनों का भौतिक कब्जा जल्द से जल्द एनएचएआई को सौंपना सुनिश्चित करें, जिनका मुआवजा पहले ही जमा कराया जा चुका है।
मुआवजा वितरण भी बाकी
अदालत में दाखिल किए गए हलफनामे के मुताबिक, नालागढ़ क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण का काम तीन चरणों में पूरा किया गया था, जिसमें 189 ढांचों और 35 ट्यूबवेलों का मूल्यांकन करके उनके अवार्ड घोषित किए जा चुके हैं। हालांकि, कुल मुआवजे का 3 प्रतिशत हिस्सा अभी भी आवंटित होना बाकी है, क्योंकि संबंधित भू-स्वामियों ने अभी तक अपने बैंक खाते और आवश्यक विवरण जमा नहीं किए हैं।
1200 से ज्यादा मामले लंबित
रिपोर्ट के अनुसार, इस अधिग्रहण से जुड़े विवादों के चलते वर्तमान में 2 मामले दीवानी अदालतों में, एक मामला हाई कोर्ट में और लगभग 1200 आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) के मामले लंबित हैं।
धार्मिक स्थल व अवैध कब्जे भी शामिल
सुनवाई के दौरान एनएचएआई की ओर से अदालत को बताया कि जिन जमीनों का कब्जा अभी तक नहीं मिला है, उनकी पूरी सूची प्रशासन को दे दी गई है। इसमें कुछ धार्मिक स्थल, व्यावसायिक परिसर और अवैध कब्जे वाले क्षेत्र शामिल हैं। कोर्ट ने अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 सितंबर 2026 की तारीख तय की है, जिसमें अनुपस्थित उत्तरदाताओं को पेश होने के निर्देश दिए गए हैं।
