हिमाचल: बस में जा रही थी महिला तभी पहुंची पुलिस, कछुए के साथ किया गिरफ्तार; महंत को देने क्यों जा रही थी धर्मशाला?
ऊना जिले के अंब में दिल्ली से बैजनाथ जा रही बस में एक महिला को कछुए के साथ पकड़ा गया। ...और पढ़ें

हिमाचल में कछुए के साथ महिला गिरफ्तार। फोटो जागरण
HighLights
दिल्ली से बैजनाथ जा रही बस में महिला कछुए के साथ पकड़ी।
बस चालक की सतर्कता से कछुआ ले जा रही महिला गिरफ्तार हुई।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत महिला पर मामला दर्ज।
संवाद सहयोगी, अंब (ऊना)। ऊना जिले के अंब उपमंडल में दिल्ली से बैजनाथ जा रही हरियाणा रोडवेज की बस में कछुआ (इंडियन फ्लैपशेल टर्टल) ले जा रही उत्तर प्रदेश की महिला को चालक की मुस्तैदी से पकड़ा गया है। आरोपित की पहचान गीता देवी पत्नी कन्हैया लाल द्विवेदी, निवासी गांव चकराना तिवारी, पोस्ट आफिस नैनी, जिला प्रयागराज उत्तर प्रदेश के रूप में हुई है।
पुलिस ने महिला को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया, जहां से उसे पहली सितंबर तक रिमांड पर भेजा गया है। कछुए को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। भारत में कछुए का शिकार करना, बेचना या उसे रखना गैरकानूनी है और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत गंभीर अपराध है।
बस से नीचे उतरी महिला यात्री
हरियाणा रोडवेज के दिल्ली डिपो में कार्यरत चालक सुधीर कुमार निवासी गांव रिडाऊ, खरखौदा सोनीपत दिल्ली से बैजनाथ रूट पर जा रहा था। शनिवार रात लगभग डेढ़ बजे बस अंब के कटौहड़ कलां में ढाबे पर रुकी तो महिला यात्री बस से नीचे उतरी। चालक ने देखा कि महिला के हाथ में प्लास्टिक का डिब्बा है और वह उसका पानी बदल रही है।
ध्यान से देखने पर पता चला कि डिब्बे के भीतर जिंदा कछुआ था। उसने महिला से कछुआ ले जाने संबंधी दस्तावेज या अनुमति पत्र मांगा तो वह कोई कागजात पेश नहीं कर सकी। पूछताछ के दौरान महिला ने बताया कि वह इस कछुए को धर्मशाला स्थित मंदिर के महंत मंगल पुरी के पास ले जा रही थी।
डीएसपी अंब अनिल पटियाल ने बताया कि बस चालक की शिकायत पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अलावा बीएनएसएस की धारा 173 के तहत शिकायत दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित कछुए को बिना अनुमति ले जाने के संदर्भ में महिला से पूछताछ की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि कछुआ कहां से लाया गया था।
अंधविश्वास के कारण पालते हैं लोग
कई लोग वास्तु शास्त्र या भाग्य चमकने के अंधविश्वास में कछुआ पालते हैं, लेकिन कानूनन ऐसा करना गंभीर अपराध माना जाता है। भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत भारतीय मूल की प्रजातियों को संरक्षण प्रदान किया गया है। यह गैर-जमानती अपराध है, जिसमें वन विभाग या पुलिस बिना वारंट के भी आरोपी को गिरफ्तार कर सकती है।
कितनी सजा का प्रविधान
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (2022 संशोधन के बाद) के तहत कछुओं की तस्करी या उन्हें अवैध रूप से घर में कैद रखने पर सख्त सजा तय की गई है। पहली बार अपराध पर तीन से सात साल की कठोर कैद और कम से कम ₹25,000 रुपये जुर्माना (एक लाख से कम) का प्रविधान है। दूसरी बार पकड़े जाने पर पांच से सात साल की सजा और 1,00,000 से अधिक का जुर्माने का प्रविधान है।
प्रदेश में सामने आए प्रमुख मामले
- मई 2026 : कांगड़ा जिले के पालमपुर में फिश वर्ल्ड टैंक पर वन्यजीव अधिकारियों ने छापा मारकर 39 इंडियन टेंट कछुए और आठ इंडियन रूफ्ड कछुए बरामद किए थे। इन कछुओं को बेहद खराब स्थिति में छिपाकर रखा गया था।
- मार्च, 2026 : सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी के दुकानदार को दो प्रतिबंधित इंडियन रूफ्ड कछुए मिलने पर गिरफ्तार किया गया था। उसने इन कछुओं को एक छोटे से एक्वेरियम में बिना यूवी लाइट और सही वातावरण के रखा था, जिससे कछुओं के कवच में संक्रमण हो गया था।
- मई, 2024 : चंबा वन विभाग ने तुनूहट्टी चेकपोस्ट पर प्रतिबंधित वन्यजीव अंगों के साथ फ्लैपशेल कछुए का खोल बरामद किया गया था। चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था।
