अमरनाथ यात्रा 2026: 57 दिन में जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मिलेगी 500 करोड़ की नई ऊर्जा, प्रशासन अलर्ट मोड पर
3 जुलाई से शुरू होने वाली 57 दिवसीय बाबा अमरनाथ यात्रा 2026 से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को लगभग 500 करोड़ रुपये का बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

अमरनाथ यात्रा बनी हजारों कश्मीरियों और पहाड़ी लोगों की उम्मीद।
HighLights
57 दिवसीय अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से होगी शुरू।
जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मिलेगा 500 करोड़ का बूस्ट।
स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में तीन जुलाई से शुरू होने जा रही 57 दिन की बाबा अमरनाथ यात्रा से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार यात्रा से प्रदेश की आर्थिकी को करीब 500 करोड़ की गति मिलेगी।
बाबा अमरनाथ यात्रा एक ओर लाखों सनातन प्रेमियों के लिए आस्था, साहस का प्रमुख केंद्र है तो दूसरी तरफ हजारों कश्मीरियों और पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों के लिए आजीविका का प्रमुख साधन है। इतना ही नहीं यात्रा से जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर से लेकर जम्मू व जम्मू से लेकर कश्मीर व यात्रा मार्गों पर संबंधित जुड़े हर वर्ग को फायदा मिलता है।
एक माह पूर्व गांवों से घोड़े वाले और पौनी वाले यात्रा के पड़ाव की ओर निकल पड़ते हैं। टेंट से लेकर पानी की व्यवस्था और टैक्सी से लेकर होटल संचालकों और उसमें कार्य कर रहे हजारों कामगारों के लिए यह यात्रा वर्ष भर में एक अवसर से कम नही है। वर्षा ऋतु के दौरान जब पर्यटन ढलान पर आने लगता है तो यात्रा नई उम्मीद देती है। पहलगाम के बाद जब लगा कि कश्मीर का पर्यटन अब खत्म हो रहा है, ऐसे समय में श्री अमरनाथ यात्रा नई ऊर्जा लेकर आई है।
यात्रा से जुड़े कश्मीर के दुकानदारों के अलावा बालटाल, पहलगाम में भी कई सेवा दाताओं को दुकानें अलाट की गई हैं। स्थानीय लोग टेंट, दुकानें लगा रहे हैं। भगवती नगर जम्मू भी यात्रा का आधार शिविर है। यहां से रोजाना ही श्रद्धालुओं का जत्था पहलगाम व बालटाल के लिए रवाना होगा। इलाके में दुकानदारों ने गर्म कपड़े, बरसाती, छाते, बैग समेत यात्रा के दौरान काम आने वाली वस्तुओं लाकर श्रद्धालुओं को बेचने के लिए रख दी हैं।
28 अगस्त को रक्षा बंधन वाले दिन संपन्न होगी यात्रा
यात्रा सिर्फ जम्मू शहर या कश्मीर के बालटाल या पहलगाम तक ही सीमित नहीं है बल्कि जम्मू कश्मीर के कठुआ, फिर सांबा जिला, जम्मू, उधमपुर, रामबन से होते हुए श्रीनगर, अनंतनाग, गांदरबल जिला से होकर गुजरती है। इससे स्थानीय बिजनेस को बल मिलता है। वहीं यात्रा की निर्धारित तिथि पंजीकरण की तिथि से पहले आ गए यात्रियों का रुख श्री माता वैष्णो देवी की यात्रा, शहरों में घूमना, छोटे पर्यटन स्थलों की तरफ आकर्षित होता है।
श्रद्धालु जब कश्मीर में घूमते हैं तो खरीदारी करते हैं, शिकारा की सैर करते हैं। कश्मीर के पर्यटन स्थलों में घूमते हैं। भले ही यात्री निवास भगवती नगर जम्मू व अन्य स्थानों पर लंगर लगाए गए है लेकिन फिर भी यात्री अपने समय के अनुसार शहर में मंदिरों को दर्शन कर लेते है। छोटी मोटी खरीदारी कर रहे हैं।
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, मुख्य सचिव अटल डुल्लू से लेकर से लेकर संबंधित जिला प्रशासन नियमित तौर पर बैठकें कर यात्रा प्रबंधों का जायजा ले रहे हैं। यात्रा तीन जुलाई से शुरु हो रही है जो 28 अगस्त को रक्षा बंधन वाले दिन संपन्न होगी।
जम्मू कश्मीर होटलर्स क्लब श्रीनगर के उपप्रधान तारिक गनी का कहना है कि बाबा अमरनाथ यात्रा से निश्चित तौर पर होटल बिजनेस को फायदा होता है। उन्होंने कहा कि पहलगाम व बालटाल में होटल वालों को श्रीनगर के मुकाबले में अधिक फायदा होता है। बाबा अमरनाथ यात्रा जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाती है।
जम्मू होटल एंड लाॅज एसोसिएशन के प्रधान पवन गुप्ता का कहना है कि बाबा अमरनाथ यात्रा में आने वाले लाखों श्रद्धालु प्रदेश की आर्थिकी को गति देते हैं। होटल से लेकर हर यात्रियों से जुड़ा हर छोटे उद्योग को फायदा होता है। यह यात्रा आस्था का केंद्र तो है ही साथ ही पर्यटन को भी बढ़ावा मिलता है।
टूर एंड ट्रेवल एसोसिएशन जम्मू के प्रधान विकास का कहना है कि यात्रियों का टैक्सी, बसों या अन्य वाहनों के इस्तेमाल करने से ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को फायदा होता है। इस साल यात्रा दो महीने की है तो हमारे उद्योग से संबंधित लोगों को फायदा होगा। कई श्रद्धालु यात्रा के बाद पर्यटन स्थलों पर जाएंगे।
श्रीनगर में डल झील पर चालीस साल से शिकारा चलाने वाले करीब 75 वर्षीय मोहम्मद हुसैन का कहना है कि बाबा अमरनाथ यात्रा के बढ़ी संख्या में श्रद्धालु यात्रा के बाद श्रीनगर घूमने के लिए आते है। शिकारा की सैर करते हैं। उन्होंने कहा कि मैंने वो समय देखा है जब विदेश मेहमान हाउस बोट में ठहरते थे, फिल्मों की शूटिंग होती थी। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बाबा अमरनाथ यात्रा वरदान की तरह है।
यात्रा के पिछले 25 सालों के आंकड़े
- 2011 6.34 लाख
- 2012 6.22 लाख
- 2013 3.53 लाख
- 2014 3.73 लाख
- 2015 3.52 लाख
- 2016 2.20 लाख
- 2017 2.60 लाख
- 2018 2.85 लाख
- 2019 3.42 लाख
- 2020 कोरोना काल
- 2021 कोरोना काल
- 2022 3.04 लाख
- 2023 4.50 लाख
- 2024 5.12 लाख
- 2025 4. 12 लाख
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।