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पिलर टूटे, सरिए बाहर, प्लास्टर झड़ रहा... जम्मू बस स्टैंड पर खतरे के साए में लोग, फिर क्यों नहीं कराया गया खाली?

Published: Tue, 22 Sep 2026 07:15 AM (IST)

जम्मू का 56 साल पुराना जनरल बस स्टैंड भवन असुरक्षित घोषित होने के बावजूद रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए जानलेवा ...और पढ़ें

जर्जर इमारत के नीचे सैकड़ों जिंदगियां खतरे के बीच सांस ले रही। (फाइल फोटो)

जर्जर इमारत के नीचे सैकड़ों जिंदगियां खतरे के बीच सांस ले रही। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. 56 साल पुराना जम्मू जनरल बस स्टैंड भवन असुरक्षित घोषित।

  2. जर्जर इमारत में रोजाना सैकड़ों लोग जान जोखिम में डाल रहे।

  3. दिल्ली हादसे के बाद भी प्रशासन ने नहीं की कोई कार्रवाई।

अंचल सिंह, जम्मू। जम्मू के 56 वर्ष पुराने जनरल बस स्टैंड की मुख्य इमारत इस समय गंभीर खतरे की जद में है। जम्मू विकास प्राधिकरण द्वारा आधिकारिक रूप से असुरक्षित घोषित किए जाने के बावजूद यहां रोजाना सैकड़ों लोग जान हथेली पर रखकर आवाजाही और कामकाज करने को मजबूर हैं। हालांकि यहां काम करने वाले दुकानदार इसे असुरक्षित घोषित करने को साजिश करार देते हैं।

बरसात के दिनों में छतों और दीवारों से लगातार पानी रिसता रहा, जिसके साए में लोगों ने खौफ के बीच दिन काटे। अब बारिश बीतने के बाद स्थिति विकराल होती दिख रही है। इमारत जगह-जगह से उखड़ चुकी है, छतों व दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, पिलरों का कंक्रीट टूटकर सरिया बाहर आ चुका है और जल निकासी ठप है।

किसी भी पल ढह सकने वाली इस जर्जर इमारत के नीचे रोजाना सैकड़ों जिंदगियां मंडराते खतरे के बीच सांस ले रही हैं।

नवंबर 2022 में असुरक्षित घोषित

इस इमारत को नवंबर 2022 में असुरक्षित घोषित किया गया था। आज दिन तक कोई काम शुरू नहीं हुआ। इसमें चलने वाली पुलिस चौकी व सुरक्षा जवानों को यहां से हटा दिया गया। अब बरसात थमने के बाद इमारत दरकने का खतरा बना हुआ है। दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई होती नहीं दिखी।

150 से अधिक दुकानें और हजारों यात्रियों की आवाजाही

साल 1970 में निर्मित यह इमारत केवल ईंट-सीमेंट का ढांचा नहीं, बल्कि भारी जन-गतिविधि का केंद्र है। यहां 120 दुकानें, 21 कमरे, 5 हाल, 1 जेके बैंक एटीएम भी है। मौजूदा समय में भी यहां बनिहाल, पुंछ व छम्ब ग्रुप के ट्रांसपोर्ट कार्यालय, डिस्पेंसरी और आरटीसी का कार्यालय काम कर रहा है।

इसके अलावा करीब 150 से 200 दुकानदार व रेहड़ी-फड़ी वाले और विभिन्न जिलों के लिए रोजाना हजारों बेखबर यात्री आते-जाते हैं।

दुकानदारों ने बताया साजिश

इमारत के बाहर से बस में बैठने के लिए पहुंचे यात्रियों का कहना है कि इस इमारत में खड़े होने तक हर वक्त डर बना रहता है कि कहीं ऊपर से सीमेंट की कोई भारी सिल्ल न गिर पड़े।

जेडीए ने बाहर खतरा का बोर्ड तो लगा दिया, लेकिन नीचे खड़े आम मुसाफिरों की सुरक्षा के लिए कोई ठोस घेराबंदी नहीं की। यात्रियों का कहना है कि वो रोज तो यहां नहीं आते लेकिन देखने पर डर तो लगता ही है।

'मरम्मत चाहिए, खाली कराने की जरूरत नहीं'

वहीं ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन के प्रधान रमेश कुमार टाक का कहना है कि नए बस स्टैंड के निर्माण में दुकानदारों ने सरकार का पूरा साथ दिया। नई इमारत बनने के बाद इसे असुरक्षित घोषित कर इसमें काम बाहर करने वालों को बाहर करने की साजिश हो रही है। इमारत सिर्फ उचित मरम्मत, सफाई और नई पाइपों की मांग कर रही है।

एसोसिएशन के महासचिव राजन गुप्ता और दुकानदार पंकज गुप्ता ने आरोप लगाया कि लोक निर्माण विभाग और जेडीए ने बीते 15-20 सालों से इसकी सुध नहीं ली। बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था या पुनर्वास योजना के बोर्ड लगाकर लोगों की आजीविका छीनने का प्रयास किया जा रहा है।

पिछले दिनों उपमुख्यमंत्री ने भी दौरा किया। तब साथ आए कुछ सेवानिवृत्त एक्सईएन ने भी देखा तो उन्होंने भी यही कहा कि इमारत सुरक्षित है। सिर्फ मरम्मत कार्याें की जरूरत है।

सेफ्टी आडिट में इमारत अनसेफ

जम्मू विकास प्राधिकरण के सुप्रिंटेंडिंग इंजीनियर अल्ताफ हुसैन ने बताया कि पीडब्ल्यूडी के सेफ्टी आडिट के बाद बिल्डिंग को असुरक्षित घोषित किया गया। किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए वहां चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। भविष्य की योजना के लिए सरकार से एप्रूवल का इंंतजार है। इसकी जगह नया स्ट्रक्चर बनाने की तैयारी है। फिलहाल कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है।