चंडीगढ़ जानकी दास हत्याकांड में नया खुलासा, कपूरथला जेल में रची गई साजिश, गैंगस्टर 'गोली' ने दिए थे हथियार-पैसे
चंडीगढ़ के जानकी दास हत्याकांड की साजिश कपूरथला जेल में रची गई थी, जिसमें गैंगस्टर 'गोली' ने शूटरों को हथियार और पैसे दिए थे। ...और पढ़ें

जेल में बंद गैंगस्टरों ने मिलकर रची साजिश, सभी आरोपी पुलिस गिरफ्त में।
HighLights
जानकी दास हत्याकांड की साजिश कपूरथला जेल में रची गई।
गैंगस्टर 'गोली' ने शूटरों को हथियार और अन्य सहायता दी।
जांच में क्रॉस-बॉर्डर नार्को-टेरर नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
निश्चंत सिंह संब्याल, सांबा। चंडीगढ़ के सेक्टर-11 स्थित श्री कुमार मेडिकोज के कैशियर जानकी दास की हत्या की साज़िश कपूरथला की जेल में रची गई थी। जेल में बंद कुख्यात गैंगस्टर धमेंद्र सिंह उर्फ़ गोली ने ही शूटरों को पिस्तौल, रहने खाने पीने एवं मोटर साइकिल और पैसो का इंतज़ाम किया था। गोली भी इस समय चंडीगढ़ पुलिस के पास रिमांड पर चल रहा है। गोली पिछले पांच वर्षो से जेल में बंद है।
हत्या कांड की जांच में कई अहम खुलासे सामने आ रहे है। चंडीगढ़ पुलिस और जम्मू कश्मीर पुलिस ने जानकी दास की हत्या में शामिल सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपित अमित कुमार उर्फ़ शराबी निवासी सांबा इस समय चंडीगढ़ पुलिस के पास रिमांड पर है वहीं जम्मू की कोट भलवाल जेल में बंद रोहित कुमार उर्फ़ मक्खन को भी चंडीगढ़ पुलिस अपने साथ 4 दिन की रिमांड पर ले गई है।
चंडीगढ़ पुलिस ने आर्यन शर्मा और सन्नी मेहरा को पहले से गिरफ्तार कर साथ ले जा चुकी है अब इन सब को सामने बैठाकर जांच की जा रही है ताकि हत्या की साज़िश का पता चल सके। जांच में अमित कुमार उर्फ़ शराबी ने अपने खुलासे में बताया कि उसे जिगाना पिस्तौल पंजाब के तरनतारन निवासी गुरमीत सिंह उर्फ़ बादशाह ने दी थी पुलिस ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया है। बादशाह के खुलासे पर आकाश कुमार उर्फ़ मन्नी और सचिन को भी चंडीगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
पूछताछ में क्रास-बार्डर नार्को-टेरर का हुआ खुलासा
वहीं जांच के दौरान चंडीगढ़ पुलिस ने पाकिस्तान से संचालित एक बड़े क्रास-बार्डर नार्को-टेरर और फेक इंडियन करेंसी नेटवर्क का पर्दाफाश होने का दावा किया है। चंडीगढ़ पुलिस की जांच में सामने आया है कि पाकिस्तान से लो-फ्लाइंग ड्रोन के माध्यम से भारतीय सीमा में गिराए जाने वाले विदेशी हथियार, हाई-ग्रेड आइस (मेथामफेटामाइन) और नकली नोट एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाए जा रहे थे।
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चंडीगढ़ में पत्रकार वार्ता के दौरान डीएसपी क्राइम लक्ष्य पांडे के मार्गदर्शन और इंस्पेक्टर नरिंदर सिंह पटियाल के नेतृत्व में टीम ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपितों के खुलासे के बाद पुलिस ने पंजाब के तरनतारन और अमृतसर में कई दिनों तक चली छापेमारी के दौरान आरोपितों के कब्जे से 3.028 किलोग्राम आइस ड्रग, आठ लाख रुपये के नकली नोट, दो विदेशी पिस्तौल और मैगजीन बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में यह नेटवर्क पाकिस्तान, विदेश में बैठे गैंगस्टरों और पंजाब के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय माड्यूल के बीच मजबूत कड़ी के रूप में सामने आया है।
ड्रोन से सीमा पार, फिर कई हाथों से गुजरती थी खेप
जांच में सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे संचालक रात के समय लो-फ्लाइंग ड्रोन के जरिए पंजाब सीमा के नजदीक हथियार, ड्रग्स और नकली भारतीय मुद्रा गिराते थे। इसके बाद सीमा क्षेत्र में सक्रिय स्थानीय माड्यूल, जिन्हें नेटवर्क में पांडी कहा जाता है, इन खेपों को उठाकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते थे।
इनका काम केवल कंसाइनमेंट उठाना नहीं था, बल्कि विदेश में बैठे गैंगस्टरों के निर्देश पर तय स्थान पर सामान रखकर उसकी फोटो, वीडियो और लाइव लोकेशन भेजना भी था। इसके बाद दूसरे व्यक्ति को वही लोकेशन भेजी जाती और वह खेप उठाकर अगले ठिकाने तक पहुंचाता। इसी तरह कई चरणों में सामान अंतिम सप्लायर तक पहुंचता था। आकाश कुमार उर्फ मन्नी तक भी इसी तरीके से खेप पहुंचती थी।
एन्क्रिप्टेड ऐप से चलता था नेटवर्क : पूरे गिरोह के सदस्य एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप्लीकेशन के जरिए संपर्क में रहते थे। सभी निर्देश विदेश में बैठे हैंडलरों और जेल में बंद गैंगस्टरों से मिलते थे। बातचीत और लोकेशन शेयरिंग ऐसे माध्यमों से की जाती थी।
चीन से पाकिस्तान, फिर भारत पहुंची जिगाना, तीन लाख रुपये था किराया
जानकी दास की हत्या में इस्तेमाल विदेशी जिगाना पिस्तौल चीन से पाकिस्तान के रास्ते ड्रोन के माध्यम से भारत भेजा गया था। विदेश में बैठे गैंगस्टर ने यह हथियार पाकिस्तान के माध्यम से मंगवाया था। बाद में इसे करीब तीन लाख रुपये किराए पर गैंगस्टर गोल्डी ढिल्लों तक पहुंचाया गया। हत्या के बाद हथियार वापस नेटवर्क को लौटा दिया गया है जिसकी पुलिस लगातार तलाश कर रही है।
केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में हुई शामिल : पुलिस का मानना है कि बरामद आठ लाख रुपये के नकली नोट इस नेटवर्क का केवल एक हिस्सा हैं। अब यह पता लगाया जा रहा है कि सीमा पार से अब तक कितनी मात्रा में नकली भारतीय मुद्रा देश में पहुंच चुकी है और उसका इस्तेमाल किन राज्यों में किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय एजेंसियां भी जांच में जुट गई हैं।