कारगिल में उगेगी हींग की खुशबू, आईआईटी जम्मू की पहल से बंजर जमीन अब उगलेगी सोना
आईआईटी जम्मू की हींग खेती परियोजना कारगिल में किसानों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजित करने में सफल हो रही है। ...और पढ़ें
-1784724044691_m.webp)
2024 में कारगिल में हींग खेती परियोजना की शुरुआत हुई।
HighLights
कारगिल में हींग खेती परियोजना आईआईटी जम्मू की पहल से सफल।
नौ किसानों को प्रशिक्षित कर हींग के पौधे रोपित किए गए।
किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजित करने का लक्ष्य।
जागरण संवाददाता, जम्मू। कारगिल में हींग की खेती का सपना धीरे-धीरे साकार होता नजर आ रहा है। आईआईटी जम्मू की पहले से हींग खेती परियोजना सफलतापूर्वक आगे बढ़ रही है। इस परियोजना की शुरुआत 24 में की गई थी। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, जलवायु के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना और लद्दाख में रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
दरअसल, IIT जम्मू ने एक कार्यक्रम में कारगिल में चल रही हींग खेती परियोजना की अब तक की प्रगति की जानकारी दी। इस कार्यक्रम में विज्ञान और नई तकनीक के जरिए कारगिल के विकास के तरीकों पर भी चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी जम्मू तथा गवर्नमेंट डिग्री कालेज कारगिल ने किया।
2024 में हींग खेती परियोजना की शुरुआत
आईआईटी जम्मू ने वर्ष 2024 में जीडीसी कारगिल के सहयोग से हींग खेती परियोजना की शुरुआत की थी। इस परियोजना का उद्देश्य जलवायु-अनुकूल एवं उच्च मूल्य वाली कृषि को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाना है। आईआईटी जम्मू ने परियोजना की परिकल्पना से लेकर क्रियान्वयन तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्थान ने नौ किसानों का चयन कर ट्रेनिंग दिलाई और उनकी यात्रा, आवास और अन्य व्यवस्थाओं का पूरा खर्च उठाया। ट्रेनिंग के बाद सीएसआईआर-आईएचबीटी, पालमपुर में हींग के पौधे तैयार किए गए, जिन्हें आईआईटी जम्मू के समन्वय और वित्तीय सहयोग से कारगिल पहुंचाकर खेतों में रोपित किया गया। यह कार्यक्रम आईआईटी जम्मू के निदेशक प्रो. मनोज सिंह गौर के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।
खबरें और भी
उद्घाटन में प्रो. मीनाक्षी राजीव ने परियोजना के अनुभव साझा किए। वहीं आउटरीच के एसोसिएट डीन डा. समीर कुमार शर्मा पचल्ला ने कारगिल के विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। प्रोजेक्ट एसोसिएट ज्योति ने भी कारगिल पहुंचकर स्थानीय हितधारकों और संस्थानों के साथ बातचीत की। कार्यक्रम के दौरान सीएसआईआर, आईआईटी, आईसीएआर, नाबार्ड सहित विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हींग की खेती वाले चार स्थलों का निरीक्षण किया।
5 साल बाद उत्पादन देना शुरू कर देंगे पौधे
निरीक्षण में तीन स्थलों पर पौधे नेचुरल डॉर्मेंसी में पाए गए जबकि चौथे स्थल पर पौधों में सक्रिय वृद्धि दर्ज की गई। परियोजना अब अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है और निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि हींग के पौधे करीब 5 साल बाद अच्छी मात्रा में उत्पादन देना शुरू कर देंगे। इस परियोजना से लद्दाख में महंगी फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह भी साबित होगा कि वैज्ञानिकों और विभिन्न संस्थानों के सहयोग से किसानों को नई खेती अपनाने में मदद मिल सकती है।