यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 05, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jammu: मनी लांड्रिंग मामले में लाल सिंह से फिर पूछताछ, कार्रवाई होने तक ईडी कार्यालय के बाहर पत्नी-बेटा रहे मौजूद
जम्मू। (Jammu News) मनी लांड्रिंग मामले में ईडी की टीम ने एक बार फिर से शनिवार को जम्मू कश्मीर सरकार में पूर्व मंत्री रहे लाल सिंह से घंटों तक पूछताछ ...और पढ़ें

HighLights
- मनी लांड्रिंग मामले में लाल सिंह से फिर हुई पूछताछ
- कार्रवाई होने तक ईडी कार्यालय के बाहर पत्नी-बेटा रहे मौजूद
- पत्नी ने शासन-प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
जागरण संवाददाता, जम्मू। (Lal Singh Money Laundering Case) मनी लांड्रिंग मामले में ईडी की टीम ने एक बार फिर से शनिवार को जम्मू कश्मीर सरकार में पूर्व मंत्री रहे लाल सिंह से घंटों पूछताछ की। यह पूछताछ लाल सिंह की पत्नी कांता अंडोत्रा के नाम पर संचालित आरबी एजुकेशनल ट्रस्ट स्थापना के लिए भूमि खरीद में कथित अनियमितताओं के संबंध में हो रही है।
लाल सिंह से 11 घंटे तक हुई पूछताछ
वहीं कांता अंडोत्रा (Kanta Andotra) व उनके बेटा ने समर्थकों के साथ ईडी कार्यालय के बाहर धरना भी दिया। उन्होंने लाल सिंह को राजनीतिक प्रतिस्पर्द्धा के चलते प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। रात दस बजे तक यानी कुल 11 घंटे तक पूछताछ होती रही। लाल सिंह ने कहा कि उन्हें सोमवार को फिर बुलाया गया है।
समर्थकों ने सड़क पर बैठ की सरकार के खिलाफ नारेबाजी
सुबह 11 बजे लाल सिंह अपने समर्थकों के साथ ईडी कार्यालय के बाहर पहुंचे। लाल सिंह के ईडी कार्यालय जाते ही उनके समर्थकों ने सड़क पर बैठक कर सरकार के विरुद्ध नारेबाजी शुरू कर दी। उनकी पत्नी कांता अंडोत्रा ने कहा कि केंद्र सरकार लाल सिंह की आवाज को दबाना चाहती है।
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पत्नी ने शासन-प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
दरअसल लाल सिंह डोगरा नेता हैं। अगले वर्ष होने वाले संसदीय चुनाव में लाल सिंह भाग न ले सके इसलिए उनके पीछे सीबीआई(CBI) व ईडी(ED) को लगा दिया है। जिस आरबी एजुकेशनल ट्रस्ट की 356 कनाल (44.49 एकड़) भूमि होने का दावा किया जा रहा है, उसकी जांच तो पूरी होने दी जाए कि असलियत में ट्रस्ट के पास कितनी भूमि है।
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आरबी एजुकेशनल ट्रस्ट 18 वर्ष पूरा है, लेकिन आज इस ट्रस्ट में धांधलियां होने की बात क्यों की जा रही है। इस मामले की जांच सीबीआइ कर रही है। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उच्च न्यायालय ने हीरानगर कोर्ट को मामले की सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने लोकतंत्र में उन्हें मिले अधिकारों को छीनने का काम किया है।