36 साल बाद भी घाटी वापसी का इंतजार! अब अनशन पर बैठे कश्मीरी हिंदू, होमलैंड से 20,000 नौकरियों तक की मांग
पनुन कश्मीर ने कश्मीरी हिंदुओं की घाटी वापसी के लिए होमलैंड, मासिक नगद राहत बढ़ाने और 20 हजार नौकरियों की ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में पनुन कश्मीर ने तेज किया आंदोलन।
HighLights
पनुन कश्मीर ने कश्मीरी हिंदुओं के लिए होमलैंड की मांग की।
विस्थापितों की मासिक नगद राहत बढ़ाने की अपील की गई।
कश्मीरी हिंदू युवाओं के लिए 20 हजार नौकरियों का पैकेज मांगा।
जागरण संवाददाता, जम्मू। कश्मीरी हिंदुओं की घाटी वापसी समेत विस्थापितों की मासिक नगद राहत को बढ़ाने, कश्मीरी हिंदू युवाओं के रोजगार दिलाने के मुद्दों को लेकर पनुन कश्मीर ने शनिवार से अपना आंदोलन तेज कर दिया।
अपनी मांगों को लेकर ये विस्थापित कश्मीरी हिंदू पनुन कश्मीर के बैनर तले शनिवार को प्रदर्शनी मैदान के बाहर अनशन पर बैठे और केंद्र सरकार से उनकी जायज मांगें पूरी करने की अपील की।
अब घाटी वापसी के लिए होमलैंड की मांग
पनुन कश्मीर के वरिष्ठ सदस्य एमके धर ने बताया कि पिछले 36 बरस से कश्मीरी हिंदू विस्थापित कालोनी में अपना जीवन गुजार रहे हैं। इन लोगों की घाटी वापसी नहीं हो पाई, जबकि हमने सरकार को बार-बार कहा कि कश्मीरी हिंदुओं की घाटी वापसी का एक ही तरीका है और वह है झेलम नदी के पूर्व पश्चिम का क्षेत्र कश्मीरी हिंदुओं के होमलैंड के लिए तय किया जाए।
उनका कहना है कि यह होमलैंड पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन हो यहां कश्मीरी हिंदू सुखचैन से रह सके, लेकिन हमारी बातों को अभी तक सरकार तरजीह दे ही नहीं रही। इसलिए आज उन्हें अनशन पर बैठने के लिए विवश होना पड़ा।
उन्होंने कहा कि 1990 में कश्मीर में आतंकवाद के कारण खराब हुए माहौल को लेकर कश्मीरी हिंदुओं को घाटी से विस्थापित होने के लिए मजबूर होना पड़ा था। क्योंकि वहां पर जाति संहार हुआ था, मगर सरकार मानने को तैयार नहीं।
अब 20 हजार पदों के पैकेज की मांग
पनुन कश्मीर के चेयरमैन टीटू गंजू ने बताया कि केंद्र सरकार ने 2010 में कश्मीरी हिंदू युवाओं की 6000 नौकरियों का पैकेज तो दिया लेकिन उसके बाद दोबारा कोई इस तरह का निर्णय नहीं दिया गया। इससे कश्मीरी हिंदू युवाओं में निराशा है क्योंकि उनके पास रोजगार नहीं। हम 20 हजार नौकरियों का पैकेज दिए जाने की मांग करते आ रहे हैं।
वहीं विस्थापित कश्मीरी हिंदू परिवार जो बरसों से महज 13 हजार रुपए की नगद राशि प्राप्त कर रहा है, की वृद्धि आज तक नहीं की गई। बार-बार हम अपनी मांग सरकार के पास रखते हैं लेकिन कोई इस दिशा में ध्यान नहीं दिया जा रहा। इसीलिए अब पनुन कश्मीर अब अपने आंदोलन को गति देगा।
उन्होंने बताया कि कश्मीरी अपनी मर्जी से नहीं मजबूरी से कश्मीर से यहां आया था। अब इनका पुनर्वास करने का काम सरकार का है और जब तक ऐसा नहीं किया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
