यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 25, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जम्मू कश्मीर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की होगी जांच, आज से दौड़ेंगे ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’ PM मोदी दिखाएंगे हरी झंडी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रविवार को गुजरात के राजकोट से जम्मू कश्मीर को सौगात देंगे। कश्मीर में बनने वाले 13 क्रिटिकल केयर ब्लॉक की नींव रखेंगे। जम्म ...और पढ़ें

HighLights
- आज से दौड़ेंगे ‘फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स’।
- प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के राजकोट से वाहनों को दिखाएंगे झंडी।
- जम्मू कश्मीर में 13 क्रिटिकल केयर ब्लॉक का रखेंगे नींव।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) रविवार को गुजरात के राजकोट से देश के अन्य भागों के साथ जम्मू कश्मीर में बनने वाले 13 क्रिटिकल केयर ब्लॉक का नींव पत्थर रखेंगे। वह जम्मू कश्मीर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए छह फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स गाड़ियां (Food Safety on Wheels) भी जनता को समर्पित करेंगे।
13 क्रिटिकल केयर ब्लॉक की रखेंगे नींव
प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम को जम्मू और श्रीनगर के अलावा अन्य संबंधित जिलों में भी दिखाया जाएगा। कार्यक्रम वर्चुअल मोड पर होगा। प्रधानमंत्री 350.25 करोड़ रुपयों की लागत से बनने वाली 13 क्रिटिकल केयर ब्लॉक का नींव पत्थर रखेंगे। यह ब्लॉक राजकीय मेडिकल कालेज जम्मू, झेलम वेली मेडिकल कालेज श्रीनगर, राजकीय मेडिकल कालेज बारामुला, राजकीय मेडिकल कालेज राजौरी।
750 बिस्तरों की होगी क्षमता
राजकीय मेडिकल कॉलेज कठुआ, जिला अस्पताल बड़गाम, जिला अस्पताल शोपियां, जिला अस्पताल कुलगाम, जिला अस्पताल पुलवामा, जिला अस्पताल रियासी, जिला अस्पताल पुंछ, जिला अस्पताल कुपवाड़ा और प्राथमिक चिकित्सा केंद्र सोनामर्ग में बन रहे हैं। इनमें 750 बिस्तरों की क्षमता होगी।
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फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स गाड़ियों को भी दिखाएंगे झंडी
जीएमसी जम्मू और जिला अस्पताल बड़गाम के केंद्र 100-100 बिस्तरों की क्षमता वाले होंगे जबकि अन्य सभी की क्षमता 50-50 बिस्तरों की होगी। प्रधानमंत्री जम्मू कश्मीर में 2.63 करोड़ रुपये से खरीदी गई फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स गाड़ियों को भी झंडी दिखाएंगे।
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इन सभी गाड़ियों को चलाने के लिए सभी प्रबंध किए गए हैं। यह छह गाड़ियां जम्मू और कश्मीर के दो-दो ग्रामीण जिलों में चलेंगी। इसके अलावा एक-एक गाड़ी जम्मू और श्रीनगर जिले में चलेगी। इससे खाद्य पदार्थों की जांच के लिए अभी तक कम पड़ रही ढांचागत सुविधाओं की कमी दूर होगी। हर गाड़ी में हर महीने कम से कम 250 सैंपल जांच होगी जबकि 20 जागरूकता कार्यक्रम होंगे और 15 प्रशिक्षण कार्यक्रम होंगे।