सड़क पर गड्ढे या गड्ढों में सड़क? जम्मू के आरएसपुरा-कुल्लियां मार्ग की हालत देख चौंक जाएंगे, रोज हजारों लोग परेशान
जम्मू के आरएसपुरा-कुल्लियां मुख्य मार्ग की बदहाल स्थिति ने हजारों यात्रियों को मुश्किल में डाल दिया है, जहां गहरे गड्ढे ...और पढ़ें

आरएसपुरा-कुल्लियां मार्ग पर गड्ढों से भरा सफर बना मुसीबत।
HighLights
जम्मू के आरएसपुरा-कुल्लियां मार्ग पर गहरे गड्ढे, आवागमन मुश्किल।
सड़क की उखड़ी परत से दुर्घटना का खतरा, लोग परेशान।
स्थानीय निवासियों ने तत्काल मरम्मत की मांग की, विभाग का आश्वासन।
जागरण संवाददाता, आरएसपुरा। सरकार सड़क संपर्क को बेहतर बनाने और लोगों को सुगम यातायात सुविधा देने के दावे करती है, लेकिन आरएसपुरा से कुल्लियां तक करीब पांच से छह किलोमीटर लंबे मुख्य मार्ग की तस्वीरें इन दावों को आईना दिखा रही हैं। सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे, उखड़ी परत और उनमें भरा बारिश का पानी साफ बता रहा है कि सड़क की देखरेख को लेकर जिम्मेदार विभाग कितना गंभीर है।
इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों वाहन और हजारों लोग आवाजाही करते हैं, लेकिन बदहाल सड़क के बीच सफर करना उनकी मजबूरी बन चुका है।
सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ी
आरएसपुरा-कुल्लियां मार्ग पर कई स्थानों पर सड़क की ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। सड़क पर छोटे-बड़े गड्ढों की भरमार है। बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भरने से स्थिति और खतरनाक हो जाती है। वाहन चालक यह अनुमान तक नहीं लगा पाते कि पानी के नीचे गड्ढा कितना गहरा है।
दोपहिया वाहन चालकों के लिए तो यह स्थिति और भी जोखिम भरी है। सड़क की बदहाली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने के दौरान वाहन चालकों को बार-बार गति कम करनी पड़ती है और गड्ढों से बचने के लिए वाहन इधर-उधर निकालना पड़ता है। इससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
'मंत्री जी, इसी सड़क से गुजरकर देखिए जमीनी हकीकत'
स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी और सरकार में इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री को एक बार इस मार्ग से गुजरकर जमीनी हकीकत देखनी चाहिए। वातानुकूलित कार्यालयों और बैठकों में सड़क व्यवस्था की समीक्षा करने से अलग अगर मंत्री स्वयं इस सड़क पर सफर करें तो उन्हें अंदाजा होगा कि आम लोग किस तरह की परेशानी झेल रहे हैं।
लोगों का कहना है कि जब पांच-छह किलोमीटर का महत्वपूर्ण मुख्य मार्ग भी गड्ढों से मुक्त नहीं कराया जा पा रहा है तो सरकार के बेहतर सड़क सुविधा देने के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। सड़क की यह हालत विभाग के लिए किसी आईने से कम नहीं है, जिसमें सड़क रखरखाव की वास्तविक तस्वीर साफ दिखाई दे रही है।
हर दिन परेशानी झेल रहे लोग
स्थानीय निवासी नरेश कुमार ने कहा कि इस सड़क से रोजाना बड़ी संख्या में वाहन गुजरते हैं। इसके बावजूद सड़क की हालत लगातार खराब होती जा रही है। उन्होंने कहा कि गड्ढों के कारण वाहन चलाना मुश्किल है और कई बार दुर्घटना की स्थिति पैदा हो जाती है। विभाग को लोगों की परेशानी को गंभीरता से लेना चाहिए।
सुनीता देवी ने कहा कि बारिश के बाद सड़क की हालत और खराब हो जाती है। पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे अधिक परेशानी होती है। उन्होंने कहा कि विभाग को केवल गड्ढे भरने की औपचारिकता नहीं, बल्कि सड़क की स्थायी मरम्मत करनी चाहिए।
वहीं रामलाल ने कहा कि आरएसपुरा-कुल्लियां मार्ग कोई दूरदराज का रास्ता नहीं है। इसके बावजूद इसकी हालत इतनी खराब है। उन्होंने कहा कि संबंधित मंत्री और अधिकारियों को मौके पर आकर सड़क की स्थिति देखनी चाहिए और लोगों को राहत देनी चाहिए।
पहले सड़क क्यों नहीं संभाली, अब गड्ढे भरने की तैयारी
सड़क की हालत को लेकर विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पूरी तरह खराब होने के बाद अब गड्ढे भरने की बात कही जा रही है। सवाल यह है कि जब सड़क पर गड्ढे लगातार बढ़ रहे थे तो समय रहते उनकी मरम्मत क्यों नहीं की गई। क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था। लोगों ने मांग की है कि गड्ढे भरने के साथ-साथ सड़क की गुणवत्ता और जलनिकासी व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाए, ताकि बारिश के बाद सड़क दोबारा इसी स्थिति में न पहुंचे।
जल्द शुरू होगा गड्ढे भरने का काम
सड़क एवं भवन निर्माण विभाग के एईई रजिंदर भगत ने कहा कि विभाग को सड़क की खराब हालत की जानकारी है। सड़क की स्थिति को देखते हुए जल्द ही गड्ढों को भरने का काम शुरू किया जा रहा है। इसके बाद सड़क की दशा सुधारने के लिए आवश्यक कार्य भी जल्द शुरू करवाया जाएगा।
अब देखना यह होगा कि विभाग की यह घोषणा कब जमीन पर उतरती है और आरएसपुरा-कुल्लियां मार्ग से गुजरने वाले लोगों को गड्ढों से कब राहत मिलती है। फिलहाल सड़क की तस्वीरें विभाग और संबंधित मंत्री के उन दावों के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर रही हैं, जिनमें बेहतर सड़क सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात कही जाती है।
