जम्मू-कश्मीर की 13 वर्षीय बेटी ने किया कमाल, एशियाई खेलों में क्वालीफाई; शरारतों से तंग आकर घरवाले भेजते थे स्टेडियम
श्रेया गुप्ता जम्मू-कश्मीर की पहली महिला तलवारबाज बन गई हैं जिन्होंने एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया है। 13 साल ...और पढ़ें

श्रेया की 13 वर्ष की मेहनत लाई रंग, अब एशियाई खेलों में दिखाएंगी दम।
HighLights
श्रेया गुप्ता एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली महिला तलवारबाज
13 साल की मेहनत के बाद हासिल की यह बड़ी उपलब्धि
उनका अगला लक्ष्य ओलंपिक में देश के लिए पदक जीतना है
विकास अबरोल, जम्मू। आठ साल की उम्र में श्रेया की शरारतों से तंग आकर माता-पिता ने ताइक्वांडो के अभ्यास के लिए मौलाना आजाद स्टेडियम भेजना शुरू कर दिया। उस समय उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि उनकी बेटी एक दिन खेल के क्षेत्र में ऊंचाइयों को छूकर उन्हें सहित प्रदेश को गौरवान्वित करेगी। श्रेया गुप्ता एक कुशल तलवारबाज हैं और हाल ही में एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाली जम्मू-कश्मीर की पहली महिला फेंसिंग खिलाड़ी बनी हैं।
गौरतलब रहे कि जम्मू-कश्मीर के दो तलवारबाज विशाल और श्रेया गुप्ता 2026 एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई किया है। वास्तुकार संजय गुप्ता और गृहिणी रश्मि महाजन की बेटी श्रेया ने कम उम्र में ही ताइक्वांडो खेलना शुरू कर दिया था। बड़े भाई शिवालिक गुप्ता से प्रेरित होकर, जो पहले फेंसिंग खिलाड़ी थे, उन्होंने भी तलवारबाजी को पेशा बना लिया और वर्षों की अथक मेहनत आखिरकार रंग लाई।
एशियाई खेलों के लिए चयनित श्रेया गुप्ता ने कहा लगातार मेहनत और लगन ही सफलता की कुंजी है। तलवारबाजी में 13 वर्षों के सफर ने अनुभव को समृद्ध किया है। तमाम मुश्किलों और चुनौतियों के बावजूद खेल के प्रति समर्पण और देश व माता-पिता को गौरवान्वित करने के लक्ष्य के साथ उन पर विजय प्राप्त की है।
2020 ओलिंपिक खेलों में ओलिंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय तलवारबाज सीए भवानी देवी की राह पर चलते हुए श्रेया ओलिंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं। श्रेया ने कहा भवानी देवी मेरी प्रेरणा हैं और मेरा सपना ओलिंपिक में पहुंचकर अपने देश के लिए पदक जीतना है।
कड़ी मेहनत ही सफलता की एकमात्र कुंजी
श्रेया ने कहा एशियाई खेलों के लिए क्वालीफाई करना एक शानदार एहसास है और अब ध्यान पदक पर है। विश्व स्तरीय प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन में अपने कौशल को निखारने के लिए 2022 में गुजरात के विजयी भारत फाउंडेशन में फेंसिंग के हाई परफार्मेंस प्रोग्राम में दाखिला लेने वाली श्रेया गुप्ता ने कहा जीवन में कोई शार्टकट नहीं होता और निस्संदेह कड़ी मेहनत ही सपनों को साकार करने की एकमात्र कुंजी है।
बनना चाहती हैं मानसिक शक्ति विशेषज्ञ
मनोविज्ञान में प्रोफेशनल डिग्री हासिल कर रही श्रेया भविष्य में मानसिक शक्ति विशेषज्ञ बनना चाहती हैं, ताकि वे खिलाड़ियों को मानसिक रूप से मजबूत बनने और प्रतियोगिताओं के दौरान अक्सर महसूस होने वाले डर, चिंता या दबाव से उबरने में मदद कर सकें। लक्ष्य अभी तक हासिल नहीं हुआ है। ओलिंपिक मेरा लक्ष्य है और देश के लिए पदक जीतना मेरा सबसे बड़ा सपना है, जिसके लिए मैं कड़ी मेहनत कर रही हूं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत चुकी हैं पदक
वर्ष 2013 से लेकर आज तक श्रेया ने पीछे कभी मुड़कर नहीं देखा है। वर्ष 2019 में गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान स्टेट अवार्ड और वर्ष 2017-18 में शेर ए कश्मीर अवार्ड हासिल करने वाली श्रेया गुप्ता अभी तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में चार कांस्य पदक और एक रजत पदक जीत चुकी हैं।
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के दम पर 21 स्वर्ण, पांच रजत और 13 कांस्य पदक अर्जित कर चुकी हैं। अभी तक 22 अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं, जबकि 26 बार राष्ट्रीय स्तर पर भाग लेकर अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी हैं।
खेल के साथ पढ़ाई में भी हैं अव्वल
श्रेया न सिर्फ खेल के मैदान में अव्वल हैं बल्कि पढ़ाई में भी उनका कोई सानी नहीं है। एमए साइकालजी के पहले वर्ष की छात्रा श्रेया ने 10वीं की परीक्षा में 91.8 प्रतिशत और 12वीं की परीक्षा में 93.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। श्रेया ने बताया कि तलवारबाजी अपनी खास वर्दी, मुखौटे और योद्धा जैसी ट्रेनिंग की वजह से पसंद थी और इसने बहुत आकर्षित किया।
वर्ष 2013 से मैंने तलवारबाजी की ट्रेनिंग को आगे बढ़ाने के लिए मौलाना आजाद स्टेडियम में जाना शुरू कर दिया। फरवरी 2022 में अमृतसर में सीनियर फेंसिंग नेशनल के फाइनल में भारत की पहली और एकमात्र महिला ओलिंपिक फेंसर भवानी देवी से हार गई थी।
