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जम्मू शहर का सबसे पुराना शिव मंदिर! काशी से लाए गए 11 स्फटिक शिवलिंग हैं खास; एक क्विंटल की घंटी भी खींचती ध्यान

Updated: Wed, 19 Aug 2026 07:15 AM (IST)

जम्मू का श्री रणबीरेश्वर मंदिर, महाराजा रणबीर सिंह द्वारा 1880 में निर्मित, शहर का सबसे पुराना शिव मंदिर है। यह विशाल शिवलिंग, दुर्लभ एकादश स्फटिक लिंग और नंदी प्रतिमा के साथ जम्मू की धार्मिक पहचान का केंद्र है।

जम्मू का प्राचीन श्री रणबीरेश्वर मंदिर (फाइल फोटो)

जम्मू का प्राचीन श्री रणबीरेश्वर मंदिर (फाइल फोटो)

HighLights

  1. महाराजा रणबीर सिंह द्वारा 1880 में निर्मित जम्मू का सबसे पुराना शिव मंदिर।

  2. विशाल शिवलिंग, दुर्लभ एकादश स्फटिक लिंग और भव्य नंदी प्रतिमा मुख्य आकर्षण।

  3. महाकाली, हनुमान सहित अन्य देवी-देवताओं के मंदिर परिसर में स्थित हैं।

जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू को मंदिरों का शहर कहा जाता है और श्री रणबीरेश्वर मंदिर जम्मू शहर का सबसे पुराना मंदिर है। श्री रणबीरेश्वर मंदिर को काशी की तर्ज़ पर बनाने की कोशिश जम्मू के राजा ने की थी। श्री रणबीरेश्वर मंदिर जम्मू के प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिरों में से एक है, जिसका निर्माण महाराजा रणबीर सिंह ने लगभग 1880 में करवाया था।

भगवान शिव को समर्पित इस भव्य मंदिर में विशाल शिवलिंग, दुर्लभ एकादश स्फटिक लिंग और विशाल नंदी की प्रतिमा विशेष आकर्षण हैं। मंदिर की आध्यात्मिक भव्यता और ऐतिहासिक विरासत इसे जम्मू की धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र बनाती है।

मंदिर का इतिहास

लगभग 1880 में महाराजा रणबीर सिंह द्वारा निर्मित यह मंदिर जम्मू की प्राचीन धार्मिक विरासत का प्रतीक है। काशी की तर्ज पर महाराजा रणबीर सिंह ने जम्मू को मंदिरों के शहर के रूप में विकसित करने का संकल्प लिया था। मंदिर के गर्भगृह में एक ही पत्थर से निर्मित विशाल शिवलिंग है।

मंदिर की विशेषता

ग्यारह स्फटिक लिंग, बनारस से लाए गए दुर्लभ एकादश स्फटिक लिंग मंदिर की विशिष्ट पहचान हैं। भव्य नंदी, मंदिर के प्रवेश पर भगवान शिव की ओर मुख किए विशाल नंदी विराजमान हैं। शालिग्राम शिलाएं, नर्मदा नदी की तलहटी से लाई गई शालिग्राम शिलाओं का भी विशेष धार्मिक महत्व है।अन्य देवालय, परिसर में महाकाली, पंचमुखी हनुमान, शनिदेव, गणेश और कार्तिकेय के मंदिर भी स्थित हैं।

एक क्विंटल वजन की विशाल घंटी है खास

पुजारी विनोद शर्मा बताते हैं कि भगवान शिव के समक्ष हाथ जोड़े महाराजा रणबीर सिंह की प्रतिमा श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित करती है। विशाल घंटी, मंदिर परिसर में करीब एक क्विंटल वजन की विशाल धातु की घंटी भी विशेष आकर्षण है। संत की समाधि, मंदिर के नीचे स्थित खुले परिसर में उस संत की समाधि है, जो कभी इस स्थान पर ध्यान किया करते थे।हर पर्व त्यौहार और आम दिनों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पूजा अर्चना करने आते हैं।

मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ भक्तों के बैठने और ध्यान करने के लिए पर्याप्त स्थान है।यशो-कर्ण पार्क, मंदिर के पीछे बना यशो-कर्ण पार्क इसके धार्मिक एवं ऐतिहासिक परिवेश को और आकर्षक बनाता है। मंदिर में यज्ञशाला भी है। मंदिर में श्रावण मास के हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। हर सोमवार और शनिवार को हजारों श्रद्धालु पूजा अर्चना करते हैं। बड़ी संख्या में पर्यटक भी मंदिर देखने एवं माथा टेकने आते रहते हैं।