क्या है उज्ज परियोजना? जिसे लेकर जम्मू में दो गुटों में बंटे लोग, एक तरफ खुशी तो दूसरी ओर आंसू
Bilawar Ujh project updates: कई साल से लंबित उज्ज परियोजना का निर्माण कठुआ में शुरू होने जा रहा है, जिससे जम्मू-कश्मीर और पंजाब को सिंचाई व पेयजल मिले ...और पढ़ें
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लोगों का कहना- उज्ज परियोजना के निर्माण से 14 पंचायतों का नक्शे से मिट जाएगा नामोनिशान ।
HighLights
सौ साल से लंबित उज्ज परियोजना का निर्माण शुरू।
जम्मू-कश्मीर और पंजाब को सिंचाई व पेयजल लाभ।
14 पंचायतों के डूबने, धार्मिक स्थलों पर खतरे का विरोध।
करुण शर्मा, बिलावर. एक सौ साल से लंबित उज्ज बहुउद्देश्यीय परियोजना का जिन्न एक बार फिर से बाहर आ गया है। इसका कुछ लोग स्वागत करते हुए इसे जम्मू-कश्मीर के लिए गेम चेंजर बता रहे हैं तो कुछ लोग विरोध में हैं। विरोध कर रहे लोग इसे संस्कृत भौगोलिक और धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ बता रहे हैं। कुल मिलाकर आने वाले दिनों में उज्ज डैम निर्माण को लेकर जनता का विरोध सामने आएगा। हालांकि जम्मू-कश्मीर और पंजाब के लिए अच्छी खबर है।
लगभग 100 साल बाद कठुआ जिले में उज्ज बहुउद्देश्यीय परियोजना का निर्माण शुरू होने जा रहा है। परियोजना के नए रोडमैप पर चर्चा करने के लिए वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड (वाप्कोस लिमिटेड ) लिमिटेड और जल शक्ति मंत्रालय के अधिकारियों के साथ एक बैठक की गई।
जम्मू कश्मीर और पंजाब को फायदा
इस परियोजना से जम्मू कश्मीर के कठुआ और सांबा जिलों और पंजाब के पठानकोट और गुरदासपुर जिलों को सीधे फायदा होगा। इससे लगभग 90,000 हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई के साथ-साथ कठुआ जिले को पीने का पानी और उद्योगों के लिए पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।
यह प्रोजेक्ट आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेगा। परियोजना के निर्माण करने वाली एजेंसी अभी प्रोजेक्ट साइट और उससे जुड़ी ज़रूरतों पर काम कर रही है। इसकी जानकारी पीएमओ में केंद्रीय राज्य मंत्री डा. जितेंद्र सिंह पिछले दिनों ही कठुआ में एक सभा के दौरान दे चुके हैं। उनके अनुसार इसी सप्ताह जल शक्ति मंत्रालय और वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड के सदस्यों की हाई पावर कमेटी उज्ज बहुउद्देशीय परियोजना के निर्माण को लेकर कठुआ जिले का दौरा करेगी।
खबरें और भी
इससे पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी (टीएसी) ने परियोजना के संशोधित प्रस्ताव पहली डीपीआर 9167 करोड़ की लागत, जिससे 196 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जाना था। फिर उसे सरकार द्वारा बिजली उत्पादन के बजाय जल प्रबंधन पर केंद्रित किया जा रहा है, ऐसे में लागत को बढ़ाकर 11907 करोड़ की डीपीआर को मंजूरी दे दी गई है।
14 पंचायतों का नामोनिशान नक्शे से मिट जाएगा
डैम निर्माण संबंधी समाचार मिलने के बाद लोगों में कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं। यहां उज्ज बहुउद्देश्यीय डैम कोआर्डिनेशन कमेटी ने डैम निर्माण का विरोध किया है। कमेटी के अनुसार, डैम निर्माण से 14 पंचायतों का नामोनिशान के नक्शे से मिट जाएगा।
आतंक पर प्रहार का प्रयास
उज्ज दरिया, पंजतिर्थी जो प्राचीन आतंकियों केरूट माने जाते हैं। इसके सहारे आतंकी पाकिस्तान से कठुआ जिले के बिलावर के पहाड़ी क्षेत्र से ऊधमपुर और डोडा की ओर जाते हैं। सरकार उज्ज बहुउद्देशीय योजना से पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी पर प्रहार करने की योजना तैयार कर रही है तो वही प्राचीन आतंकी रूट को उज्ज बहुउद्देशीय डैम निर्माण कर बंद करने का प्रयास है। इसे पाकिस्तान पर भारत का डबल अटैक माना जा रहा है।
वर्ष 1927 में पहली बार हुआ था परियोजना का सर्वे
उज्ज बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर पहली बार अमेरिकन इंजीनियरों ने 1927 में सर्वे किया था।
वर्ष 1960 में परियोजना की विस्तृत जांच केंद्रीय जल आयोग की ओर से शुरू की गई।
जम्मू- कश्मीर सरकार ने केंद्रीय जल आयोग के साथ परियोजना की पहली डीपीआर वर्ष 1966 में तैयार की। जिसमें इससे 117 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य था।
2008 में उज्ज बहुउद्देशीय परियोजनाओं को तत्कालीन केंद्र सरकार की ओर से राष्ट्रीय परियोजना के रूप में मंजूरी दे दी गई।
2014 में इस परियोजना को लेकर फिर से कवायद तेज हो गई और परियोजना के स्वरूप को बदले और 50 प्रतिशत पानी के इस्तेमाल को लेकर फैसले किए गए
इस परियोजना की डीपीआर को वर्ष 2020 में फिर से बहाल कर दिया गया। परियोजना में डूबने वाले क्षेत्र को 41 से 34.5 वर्ग किलोमीटर कर दिया।
उज्ज डैम महापंचायत कोआर्डिनेशन कमेटी कर रही फैसले का विरोध
उज्ज डैम महापंचायत कोआर्डिनेशन कमेटी ने कहा कि डैम निर्माण को लेकर सरकार जनता से रायशुमारी करें, उसके बाद कोई भी डीपीआर बनाई जाए, लेकिन सरकार जहां डीपीआर को बार-बार बदल रही है और जनता से उनकी राय तक नहीं जानी जा रही।
उन्होंने उज्ज मल्टीपरपज डैम प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले 14 पंचायतों के लोगों को 2017 की नेशनल रिलीफ एंड रिहैबिलिटेशन पालिसी के अनुरूप मुआवजा देने की भी मांग की गई। लोगों को उनकी जमीन लेने से पहले कालोनियां बनाकर बसाया जाए उसके बाद ही डैम निर्माण के बारे में सरकार सोचे।
उज्ज डैम निर्माण से पंचमुखी शिवलिंग के अस्तित्व पर खतरा
केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय की टेक्निकल एडवाइजरी कमेटी द्वारा उज्ज डैम निर्माण को लेकर संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी जरूर दे दी है। जिससे डैम निर्माण होने से भगवान शिव के पंचमुखी शिवलिंग जो नेपाल और पंजतिर्ती में ही है।
उसके अस्तित्व पर संकट आ जाएगा। पंजतिर्थी स्थित पंचमुखी शिवलिंग जांकी दरिया के मध्य में है, वह डैम निर्माण होने से जलमग्न हो जाएगा। इससे स्थानीय लोगों की धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचेगी। इसीलिए सरकार डैम निर्माण से पहले लोगों की धार्मिक आस्था के बारे में भी विचार करें।
बिलावर की जनता को लाभ काम और नुकसान अधिक
डैम कोआर्डिनेशन महापंचायत के अध्यक्ष एसपी शर्मा का कहना है कि उज्ज बहुउद्देश्यीय प्रोजेक्ट से बिलावर की 14 पंचायतों की 11 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित होंगे। जिनका उज्ज डैम के निर्माण से पलायन होगा। इस प्रोजेक्ट से बिलावर की जनता को लाभ काम और नुकसान अधिक होगा। 14 पंचायतों की जनता डैम निर्माण का विरोध करती है। उनकी मांग है कि सरकार अपने फैसले पर पुनर्विचार करें।
वहीं मांडली पूर्व डीडीसी सदस्य नीरू राजपूत का कहना है कि डैम निर्माण के दौरान प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा मिले और सभी को कालोनियां बनाकर बसाया जाए । ताकि हर कोई अपने समाज, संस्कृति और सभ्यता से पलायन करने से बच सकें।
बिलावर ब्लाक पूर्व बीडीसी चेयरमैन अशोक कुमार सपोलिया का कहना है कि उज्ज डैम प्रोजेक्ट का वह कड़े शब्दों में विरोध करते हैं। उनकी मांग है कि डैम निर्माण को लेकर लोगों की रायशुमारी करने के बाद ही सरकार डैम निर्माण के बारे में सोचें। क्योंकि इससे बिलावर की भौगोलिक और सांस्कृतिक विरासत बुरी तरह से प्रभावित होगी।
विहिप विभाग मंत्री कैप्टन पवन शर्मा का कहना है कि उज्ज डैम निर्माण होने से भगवान शिव के पंचमुखी शिवलिंग के अस्तित्व पर संकट आ जाएगा, जिससे धार्मिक आस्था पर चोट पहुंचेगी। इसीलिए सरकार डैम निर्माण से पहले लोगों की धार्मिक आस्था के बारे में भी विचार करें।