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    जम्मू-कश्मीर में बारिश के बाद उमस ने छुड़ाए पसीने, कठुआ में 35 डिग्री रहा तापमान

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 07:47 AM (IST)

    कठुआ में सुबह मूसलाधार बारिश हुई, लेकिन दोपहर होते-होते उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। तजवाल गांव में खड्ड के पानी और पॉलीथिन से किसानों की धान व चारे ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. सुबह कठुआ में मूसलाधार बारिश, दोपहर में उमस से लोग बेहाल

    2. तजवाल गांव में खड्ड के पानी से किसानों की फसलें हुई नष्ट

    3. खेतों में पॉलीथिन कचरा पहुंचा, ग्रामीणों ने की सुधार की मांग

    जागरण संवाददाता, कठुआ। जम्मू-कश्मीर में मानसून की दस्तक के बीच अब बारिश तो होने लगी है। साथ ही उमस भी जमकर सता रही है। कठुआ में मंगलवार सुबह तड़के जमकर बारिश हुई।

    1.5 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई। सड़कों पर लोगों को भीगते हुए देखा गया। इसके बावजूद दोपहर होते-होते गर्मी ने अपना रुद्र रूप दिखाया। हालांकि तापमान कम रहा, लेकिन भारी उमस ने लोगों के पसीने छुड़ाए। गर्मी से राहत पाने के लिए जगह-जगह ठंडे पेयजल लेते नजर आए।

    शहर की प्रसिद्ध ड्रीमलैंड पार्क के नजदीक कठुआ नहर में भारी संख्या में युवा और लोग नहाने के लिए पहुंचे। कृषि विज्ञान केंद्र कठुआ के अनुसार अब आने वाले दिनों में रुक रुक कर बारिश होती रहेगी।

    इसके चलते उमस का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, मंगलवार को अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री रिकॉर्ड किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री रहा। बुधवार को भी बारिश होने के आसार हैं। वहीं, जिले के बनी, बिलावर और बसोहली में भी कुछ जगह बारिश हुई। हालांकि, बनी में दिनभर मौसम सुहावना रहा।

    उधर, शहर से सटे तजवाल गांव में किसानों की फसलों को बारिश से भारी नुकसान हुआ है।

    दरअसल, कठुआ शहर की खड्ड का पानी गांव की तरफ जाता है, लेकिन गांव तक पहुंचते ही खड्ड का आकार बदल जाता है। कोई भी हदबंदी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी सी बारिश होने पर भी खड्ड से सैलाब की तरह पानी आता है। बारिश की वजह से उनकी धान और चारे की फसल नष्ट हो गई है।

    गांव के रहने वाले राजीव सिंह ने बताया कि सरकार ने पॉलीथीन पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बावजूद पूरे शहर का जमा हुआ पालीथीन बहकर उनके खेतों में आ पहुंचा है।

    समझ में नहीं आता कि कौन सा प्रतिबंध लगाया है। अभी तो एक बारिश हुई है। फिर भी खेतों में पानी की तरह सैलाब आया है। उन्होंने मांग की कि खड्ड का आकार ठीक किया जाए। इसके आसपास क्रेट बनाए जाएं, ताकि पानी बाहर न आए।

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