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'जवानों को खोने के दुख से हत्या...', ब्रिगेडियर आचार्य की सजा बरकरार; पुंछ में 3 लोगों की मौत मामले में बड़ा फैसला

Published: Sat, 22 Aug 2026 11:25 PM (IST)

सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) ने पुंछ में 2023 के आतंकी हमले के बाद तीन नागरिकों की मौत के मामले में ...और पढ़ें

पुंछ में 3 लोगों की मौत के मामले में बड़ा फैसला। फाइल फोटो

पुंछ में 3 लोगों की मौत के मामले में बड़ा फैसला। फाइल फोटो

HighLights

  1. एएफटी ने ब्रिगेडियर आचार्य की दो साल की सजा बरकरार रखी।

  2. पुंछ में 2023 आतंकी हमले के बाद तीन नागरिकों की मौत।

  3. सैन्य अनुशासन भावनाओं और बदले की भावना से ऊपर है।

एजेंसी, पुंछ। जम्मू-कश्मीर के पुंछ में दिसंबर 2023 में आतंकी हमले के बाद नागरिकों से पूछताछ के दौरान हुई तीन मौतों के मामले में सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) ने सेना की कार्रवाई को सही ठहराया है। एएफटी की चंडीगढ़ पीठ ने 48 आरआर के तत्कालीन कमांडिंग ऑफिसर ब्रिगेडियर पी आचार्य को दी गई दो वर्ष की ‘गंभीर असंतुष्टि’ की सजा में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा कि सेना की कार्रवाई में न तो कोई अवैधानिकता मिली और न ही प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ। पीठ ने कहा कि अपने साथियों को खोने के बाद की गई आगे की सैन्य कार्रवाइयों में शामिल जवानों के लिए “भावनाएं सैन्य अनुशासन और नागरिकों के साथ मानवीय व्यवहार करने की कानूनी जिम्मेदारी पर हावी नहीं हो सकतीं।

न्यायमूर्ति सुधीर मित्तल और लेफ्टिनेंट जनरल रणबीर सिंह की पीठ ने 20 अगस्त को दिए आदेश में कहा कि पूछताछ के दौरान संबंधित आरआर बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर ने कंपनी कमांडर को ‘थोड़े सख्त’ तरीके अपनाने का निर्देश दिया था। पीठ के अनुसार, ब्रिगेडियर आचार्य ने खुद भी एक संदिग्ध के साथ मारपीट की और अधीनस्थ अधिकारियों को संयम बरतने के लिए प्रभावी कमान एवं नियंत्रण सुनिश्चित नहीं किया।

सैनिकों के गुस्से को माना स्वाभाविक

एएफटी ने माना कि 21 दिसंबर 2023 को पुंछ में हुए आतंकी हमले के बाद सैनिकों के सामने बेहद कठिन और भावनात्मक परिस्थितियां थीं। हमले में चार सैन्यकर्मी बलिदान हुए थे, जबकि दो के शवों के साथ कथित तौर पर बर्बरता की गई थी। ऐसे हालात में सैनिकों में गुस्सा और बदले की भावना उत्पन्न होना स्वाभाविक था।

हालांकि, अधिकरण ने स्पष्ट किया कि ऐसी भावनाएं सैन्य अनुशासन और कानून से ऊपर नहीं हो सकतीं। पीठ ने कहा कि सैनिकों को कठोर प्रशिक्षण के माध्यम से संयम और अनुशासन के लिए तैयार किया जाता है। युद्ध जैसी परिस्थितियों में भी कानून और जिनेवा कन्वेंशन के मानकों का पालन करना आवश्यक है।

21 दिसंबर को आतंकियों ने किया था सेना के काफिले पर हमला

मामला 21 दिसंबर 2023 का है। पुंछ जिले में धत्यार मोड़ के पास आतंकियों ने सेना के वाहनों के काफिले पर घात लगाकर हमला किया था। इसमें चार सैन्यकर्मी बलिदान हुए और तीन घायल हुए थे। हमले में मारे गए दो सैन्यकर्मियों के सिर काटे जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।हमले के बाद सुरक्षा बलों ने डेरा की गली, बफलियाज और टोपा पीर समेत आसपास के इलाकों में तलाशी और घेराबंदी अभियान चलाया। इस दौरान कई स्थानीय लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।

अधिकरण के रिकार्ड के अनुसार, टोपा पीर निवासी गुज्जर-बकरवाल समुदाय के सफीर अहमद, मोहम्मद शौकत और शबीर अहमद की बाद में मौत हो गई। घटना के बाद सामने आए कथित वीडियो में हिरासत में लिए गए लोगों के साथ मारपीट और शारीरिक दुर्व्यवहार के दृश्य दिखाई दिए थे। इसके बाद स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैल गया और मामले में जवाबदेही तय करने की मांग उठी।

16 कोर ने कराई थी जांच

नागरिकों की मौत की परिस्थितियों की जांच के लिए दिसंबर 2023 में 16 कोर मुख्यालय ने कोर्ट ऑफ इंक्वायरी गठित की थी। 48 आरआर उस समय 13 सेक्टर आरआर के अधीन थी और इसकी कमान ब्रिगेडियर आचार्य के पास थी।

जांच के बाद अप्रैल 2024 में आचार्य को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। उन पर नागरिकों से पूछताछ के दौरान उचित कमान एवं नियंत्रण नहीं रखने, नागरिकों के खिलाफ शारीरिक बल के इस्तेमाल, अत्यधिक एवं गैरकानूनी बल को रोकने में विफल रहने और अधीनस्थ अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश नहीं देने के आरोप लगाए गए।

आचार्य के जवाब पर विचार करने के बाद 16 कोर, नगरोटा के जनरल ऑफिसर कमांडिंग ने जुलाई 2024 में उन्हें दो वर्ष के लिए ‘गंभीर अप्रसन्नता’ की सजा दी। इसके खिलाफ ब्रिगेडियर आचार्य ने एएफटी में याचिका दायर की थी।

घात के बाद संदिग्धों को पूछताछ के लिए ले जाया गया

एएफटी के रिकार्ड के अनुसार, 48 आरआर के डेरा की गली, मस्तान धारा और बफलियाज में कंपनी आपरेटिंग बेस थे। 21 दिसंबर को कंपनी कमांडर मेजर पंकज सिंह ने कार्यवाहक कमांडिंग ऑफिसर मेजर राज कुमार से रात में फायरिंग अभियान की अनुमति मांगी थी, जिसे मंजूरी दे दी गई।

इसके बाद फायरिंग पार्टी डेरा की गली की ओर रवाना हुई। करीब 3:37 बजे बफलियाज लौट रहे सेना के वाहनों पर हमले की सूचना मिली। बटालियन कमांडर ने तत्काल सेक्टर कमांडर को जानकारी दी और एंबुलेंस के साथ सैनिकों को घटनास्थल पर भेजा गया।

हमले में बलिदान हुए सैन्यकर्मियों के शव बरामद होने के बाद तलाशी और घेराबंदी अभियान शुरू किया गया। उसी रात संदिग्धों की सूची कमांडिंग ऑफिसर को भेजी गई। अगले दिन सुबह घेराबंदी हटने के बाद कई संदिग्धों को मस्तान धारा स्थित कंपनी आपरेटिंग बेस में पूछताछ के लिए ले जाया गया। अधिकरण के रिकार्ड के मुताबिक, इसी पूछताछ के दौरान तीन नागरिकों की मौत हुई।

कमांडरों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर

एएफटी ने ब्रिगेडियर आचार्य की यह दलील खारिज कर दी कि उनके खिलाफ की गई प्रशासनिक कार्रवाई कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। पीठ ने कहा कि सेना का अनुशासन कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी कानून की सीमाओं के भीतर रहकर कार्रवाई करने की मांग करता है।

अधिकरण ने कहा कि सैनिकों के भीतर गुस्सा और बदले की भावना पैदा होना स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन सैन्य प्रशिक्षण उन्हें संयम बरतने के लिए बाध्य करता है। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि युद्ध की स्थिति में भी भारतीय सैनिक से अनुशासन और सशस्त्र संघर्ष के लागू मानवीय कानूनों का सम्मान करने की अपेक्षा की जाती है।

एफटी ने कहा कि मानवीय भावनाओं और अनुशासन के बीच टकराव की स्थिति में अनुशासन को प्राथमिकता देनी होगी। अधिकरण ने निष्कर्ष निकाला कि सेना ने ब्रिगेडियर आचार्य के खिलाफ कार्रवाई में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।

राजनाथ सिंह ने दिया था पीड़ित परिवारों को न्याय का भरोसा

दिसंबर 2023 की घटना के बाद जम्मू-कश्मीर, विशेषकर गुज्जर-बकरवाल समुदाय में व्यापक चिंता पैदा हुई थी। घटना से सेना और स्थानीय समुदाय के बीच विश्वास को लेकर भी सवाल उठे थे।रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मृतकों के परिवारों से मुलाकात कर उन्हें न्याय का भरोसा दिया था।

उन्होंने सुरक्षा बलों से सतर्कता और अनुशासन बनाए रखने के साथ स्थानीय लोगों का विश्वास जीतने का आह्वान किया था।सिंह ने कहा था कि मृतकों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन न्याय जरूर होगा। उन्होंने यह भी कहा था कि भारतीय सेना का दायित्व केवल राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि लोगों का विश्वास और उनके दिल जीतना भी है।