पुंछ में मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास के दौरान छाया सन्नाटा, 10 मिनट के लिए थम-सा गया जीवन
पुंछ जिले में शुक्रवार शाम को 10 मिनट का मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास किया गया, जिससे पूरे जिले में सन्नाटा छा गया। यह अभ्यास सुरक्षा तैयारियों को मजब ...और पढ़ें

पुंछ में मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट (File Photo)
HighLights
पुंछ में 10 मिनट का मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास
सुरक्षा तैयारियों को मजबूत करने और जागरूकता बढ़ाने का उद्देश्य
जनता ने प्रशासन के निर्देशों का पूरा सहयोग किया
जागरण संवाददाता, पुंछ। सीमावर्ती जिला पुंछ में शुक्रवार शाम को मॉक ड्रिल और ब्लैकआउट अभ्यास का आयोजन किया गया, जिसके दौरान पूरे जिले में करीब दस मिनट तक सन्नाटा पसरा रहा। इस अभ्यास के तहत शाम 8 बजे से 8:10 बजे तक शहर, गांवों और मोहल्लों में पूरी तरह से बिजली बंद रखी गई, जिससे आम जनजीवन कुछ समय के लिए थम-सा गया।
यह अभ्यास प्रदेश के अन्य जिलों की तरह पुंछ में भी सुरक्षा और आपातकालीन तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया। खासतौर पर नियंत्रण रेखा (एलओसी) से सटे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को युद्ध जैसी स्थिति में अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा के प्रति जागरूक करना इसका मुख्य उद्देश्य रहा।
मॉक ड्रिल से पहले जिला उपायुक्त पुंछ आशोक कुमार शर्मा ने शुक्रवार सुबह एक प्रेस वार्ता आयोजित कर इस अभ्यास के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह अभ्यास मानक सुरक्षा प्रोटोकॉल का हिस्सा है और इसका मकसद लोगों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए तैयार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस दौरान घबराने की कोई जरूरत नहीं है और नागरिकों को शांत रहकर प्रशासन का सहयोग करना चाहिए।
'अफवाहों पर न दें ध्यान'
ब्लैकआउट के दौरान पूरे जिले में अंधेरा छा गया, जिससे एक अलग ही माहौल देखने को मिला। हालांकि नियंत्रण रेखा पर लगी तारबंदी पर सुरक्षा कारणों से लाइटें चालू रखी गईं। प्रशासन ने पहले ही लोगों से अपील की थी कि वे इस दौरान अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी तरह की घबराहट से बचें।
अभ्यास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की भारी तैनाती की गई थी, ताकि अंधेरे का फायदा उठाकर कोई असामाजिक तत्व किसी भी प्रकार की हरकत न कर सके। जवानों ने पूरे क्षेत्र में गश्त कर सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा।
लोगों ने किया सहयोग
स्थानीय लोगों ने भी इस अभ्यास में पूरा सहयोग दिया और निर्धारित समय पर अपने घरों की लाइटें बंद रखीं। कई जगहों पर लोगों ने अपने मोबाइल फोन की रोशनी तक बंद रखकर प्रशासन के निर्देशों का पालन किया।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह के मॉक ड्रिल से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और वे किसी भी आपात स्थिति में बेहतर तरीके से प्रतिक्रिया देने में सक्षम होते हैं। यह अभ्यास न केवल सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय को परखने का माध्यम है, बल्कि आम नागरिकों को भी जिम्मेदार और सतर्क बनने का संदेश देता है।
इस सफल आयोजन के बाद प्रशासन ने लोगों का धन्यवाद करते हुए कहा कि भविष्य में भी ऐसे अभ्यास किए जाएंगे, ताकि जिले में सुरक्षा और तैयारियों को और मजबूत किया जा सके।