'जनता के अधिकारों के साथ समझौता...', सांसद आगा रूहुल्लाह के इस्तीफे के एलान पर मीरवाइज का आया बयान
मीरवाइज उमर फारूक ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में चल रहे अंतर्कलह के बीच पार्टी नेतृत्व को घेरा, जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने की नसीहत दी।

सांसद आगा रूहुल्लाह के इस्तीफे के एलान पर मीरवाइज का आया बयान। फाइल फोटो
HighLights
मीरवाइज ने नेशनल कॉन्फ्रेंस नेतृत्व को जम्मू-कश्मीर के हितों पर घेरा।
आगा रुहुल्ला मेहदी ने लोकसभा और पार्टी से इस्तीफे की मंशा जताई।
मीरवाइज ने नेताओं से जनता के हितों के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) में बढ़ते अंतर्कलह के बीच कश्मीर के मीरवाइज उमर फारूक ने पार्टी नेतृत्व को कठघरे में खड़ा करते हुए जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक हितों और लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता देने की नसीहत दी है।
उन्होंने श्रीनगर सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी समेत सभी राजनीतिक नेताओं से कहा कि वे आपसी खींचतान से बाहर निकलकर जम्मू-कश्मीर की पहचान और अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस राजनीतिक संघर्ष करें।
आगा रुहल्ला के इस्तीफे के एलान पर क्या बोले
मीरवाइज ने नेकां के मौजूदा विवाद पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन मुद्दों के नाम पर पार्टी ने जनता से वोट और जनादेश हासिल किया था, वे अब जमीन पर प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए नेकां ने जितना करना चाहिए था, दुर्भाग्य से उतना नहीं किया।
उनकी यह टिप्पणी नेकां के भीतर चल रहे खुले टकराव के बीच आई है। पार्टी सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी लगातार नेतृत्व की नीति पर सवाल उठा रहे हैं। खासकर अनुच्छेद 370 की बहाली समेत जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति से जुड़े मुद्दों पर उनका रुख पार्टी नेतृत्व के लिए असहज स्थिति पैदा करता रहा है।
फारूक की चुनौती के बाद रुहुल्ला का पलटवार
विवाद उस समय और तीखा हो गया जब नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने सार्वजनिक रूप से रुहुल्ला को पार्टी और लोकसभा की सदस्यता छोड़ने की चुनौती दे दी। इसके जवाब में रुहुल्लाह ने शुक्रवार को लोकसभा सांसद पद और नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने की मंशा जाहिर कर दी।
रुहुल्लालंबे समय से अनुच्छेद 370 और जम्मू-कश्मीर के अधिकारों के मुद्दे पर पार्टी नेतृत्व से अलग सुर में बोलते रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी को जनता से किए गए राजनीतिक वादों और मूल एजेंडे पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
मीरवाइज ने राजनीतिक नेतृत्व को याद दिलाया कि जम्मू-कश्मीर की पहचान और अधिकार किसी दल की आंतरिक सत्ता लड़ाई के बंधक नहीं हो सकते। उन्होंने सामूहिक राजनीतिक प्रयास की जरूरत बताते हुए कहा कि नेताओं को व्यक्तिगत और दलगत मतभेदों से ऊपर उठकर जनता के व्यापक हितों के लिए आवाज बुलंद करनी चाहिए।
