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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 13, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सिंधु जल संधि महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला पर साधा निशाना, कहा- बीजेपी के एजेंडे को दे रहे बढ़ावा

Published: Wed, 13 Nov 2024 06:00 PM (IST)

Indus Waters Treaty सिंधु जल संधि को लेकर जम्मू-कश्मीर में सियासत गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने उमर ...और पढ़ें

सिंधु जल संधि महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला को घेरा (जागरण फाइल फोटो)
सिंधु जल संधि महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला को घेरा (जागरण फाइल फोटो)

HighLights

  1. भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ेगा तो लाभ भाजपा को होगा: पीडीपी प्रमुख
  2. 'भाजपा के एजेंडे को, उसके नरेटिव को ही आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं उमर'

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। सिंधु जल संधि पर जम्मू-कश्मीर में फिर सियासत शुरू हो गई है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी पीडीपी की अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने बुधवार को कहा कि तय मुद्दों को फिर से विवादित बनाकर, सिर्फ भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को ही बढ़ाया जाएगा, जिसका लाभ भाजपा को होगा।

कहा कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस संधि पर अब सवाल उठाकर, सिर्फ भाजपा के एजेंडे को, उसके नरेटिव को ही आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। बेहतर है कि वह केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर को कम से कम दो जलविद्युत परियोजनाओं का पूरा अधिकार सौंपने के लिए कहें।

आर्थिक नुकसान की भरपाई करे केंद्र

उल्लेखनीय है कि सिंधु जल संधि को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने गत मंगलवार को दिल्ली में कहा था कि इस संधि के कारण जम्मू-कश्मीर अपने नदियों का सदुपयोग नहीं कर पा रहा है। इससे जम्मू-कश्मीर को आर्थिक नुकसान हो रहा है। केंद्र सरकार को इसका मुआवजा देना चाहिए।

आज महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला के इसी बयान पर पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री का यह बयान भारत-पाकिस्तान के बीच तय एक मामले को फिर से विवाद बनाने का प्रयास जैसा है। दोनों मुल्कों में जब भी तनाव बढ़ेगा, उसका असर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान पर नहीं, जम्मू कश्मीर पर ही होगा।

'दोनों मुल्कों को हुआ काफी नुकसान'

बीते 70 वर्ष से जम्मू कश्मीर ने, हमने दोनो मुल्कों के बीच तनाव का सबसे ज्यादा नुकसान उठाया है। दोनों मुल्कों के बीच कई युद्ध हुए हैं, लेकिन उन्होंने कभी भी सिंधु जल संधि को नहीं तोड़ा।

बीजेपी बीते कुछ वर्षों से इस संधि को लेकर अपने राजनीतिक लाभ के लिए विवाद बनाना चाहती है। भारत सरकार अब इस संधि को लेकर नया विवाद पैदा करना चाहती है।

उन्होंने कहा कि बेहतर है कि उमर अब्दुल्ला इस मामले को लेकर विवाद पैदा करने और भाजपा के नरेटिव को फायदा पहुंचाने के बजाय केंद्र सरकार से मुआवजा मांगे। उन्होंने कहा कि वह यह बताएं कि हमारे जो भी यहां जलविद्युत परियोजनाएं जारी हैं,उनमें से कितनी हमारे पास हैं।

'बिजली पैदा होती है लेकिन हम अंधेरे में रहते हैं'

जम्मू-कश्मीर में बिजली पैदा होती है, लेकिन हम अंधेरे में रहते हैं और बाहर से हमे बिजली खरीदनी पड़ती है। शेख अब्दुल्ला ने सलाल जल विद्युत परियोजना एनएचपीसी के हवाले की थी और वर्ष 1996 में जम्मू कश्मीर का मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने भी छह-सात परियोजनाएं एनएचपीसी व अन्य संस्थानों को सौंपी।

इसलिए उमर अब्दुल्ला को चाहिए कि वह कम से कम दो जलविद्युत परियोजनाएं केंद्र सरकार से वापस लें। हमें जो नुकसान हुआ है, उसका मुआवजा मिलना चाहिए।

रंगराजन समिति ने भी इसकी सिफारिश की है। पीडीपी ने जब भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाई थी तो उस समय तय किए गए एजेंडा ऑफ एलांयस में भी जलविद्युत परियोजनाओं को वापस जम्मू-कश्मीर को सौंपे जाने पर सहमति हुई थी।

नुकसान का केंद्र सरकार को देना होगा मुआवजा

यहां यह बताना असंगत नहीं होगा कि महबूबा मुफ्ती ने सितंबर 2016 में ,जब वह जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री थी, ने पीएम उज्जवला योजना को जम्मू कश्मीर में शुरू किए जाने के अवसर पर भी कहा था कि सिंधु जल संधि समझौते से जम्मू-कश्मीर को हो रहे नुकसान का केंद्र सरकार को मुआवजा देना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि देानों मुल्कों ने इस संधि को नहीं तोड़ा है, क्येांकि यह दोनों मुल्कों को लाभ पहुंचा रही है, जबकि नुकसान जम्मू कश्मीर का हो रहा है।

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