यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 31, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आतंकियों ने किडनैप किया, धमकी दी पर नहीं डिगे कदम; फरहत सिद्दकी ऐसे बनी कश्मीर की पहली महिला कलाकार
कश्मीर की पहली महिला कलाकार फरहत सिद्दीकी (Farhat Siddiqui) कश्मीर की पहली महिला कलाकार हैं जिन्होंने 1990 के आतंक के दौर में भी अभिनय का सफर जारी रखा ...और पढ़ें

HighLights
- आतंक के दौर में भी छिपकर अभिनय करने जाती थी फरहत
- रेडियो और दूरदर्शन के कुछ कार्यक्रमों से की शुरुआत
- फरहत दूरदर्शन कार्यालय आठ किलोमीटर पैदल चलकर जाती थी
रजिया नूर, श्रीनगर। कश्मीर में 1990 का दौर... इसे याद कर भय से बदन कांपने लगता है। घाटी में आतंक की भट्टी गर्म हो रही थी। शहर और गांव क्या, गलियों में भी सन्नाटा रहता था। आवाज थी तो वहां सिर्फ गोलियों की।
लोग घरों से निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे। इस बीच, श्रीनगर में डाउनटाउन के सराफाकदल की तंग गली में एक दिन 16-17 साल की किशोरी निकलती है। धड़कन तेज है, लेकिन मजबूत इरादे लिए वह तेज कदमों से सन्नाटे को चीरती हुई दूरदर्शन केंद्र का रुख करती है।
वहां वह एक कार्यक्रम की मेजबानी करती है। इसके बाद यह सिलसिला रहा। आज वह अभिनय की दुनिया में एक बड़ा मुकाम प्राप्त कर चुकी हैं। फरहत सिद्दीकी आज कश्मीर में रंगमंच की बड़ी कलाकार हैं।
इस सफर में उनके पैरों ही नहीं, दिल पर भी छाले पड़े, आतंकियों ने धमकियां दीं, बंदी बनाया, लेकिन उन्होंने रंगमंच पर अपने कदम नहीं डिगने दिए।
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फोटो: श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके की रहने वाली अभिनेत्री फरहत सिद्दीकी कश्मीर की पहली महिला कलाकार हैं। जागरण
अभिनय में किया शानदार प्रदर्शन
कश्मीर की इस दिग्गज अभिनेत्री फरहत सिद्दीकी ने रंगमंच, रेडियो व टेलीविजन धारावाहिकों में उत्कृष्ट अभिनय से लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी है। कश्मीर में तीन दशक पहले वह इस क्षेत्र में तनहा खड़ी थी, आज वह स्थानीय अभिनेत्रियों की प्रेरणस्रोत और मार्गदर्शक है।
फरहत बताती हैं कि वह आज जिस मुकाम पर हैं वहां पहुंचने के लिए बहुत कुछ झेलना पड़ा। आतंकियों की गोली का हर कदम पर भय था, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। अभिनय के शौक ने मुझे हर कदम पर हिम्मत दी।
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फोटो: श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके की रहने वाली अभिनेत्री फरहत सिद्दीक
मेरा यह शौक उस दौर में परवान चढ़ा जब यहां आतंक चरम पर था। सिनेमाघर बंद थे। स्थानीय थियेटर में महिलाओं पर पाबंदी थी, पुरुष अभिनेता ही महिलाओं की भूमिका निभाते थे।
हालांकि, रेडियो और दूरदर्शन कुछ कार्यक्रमों में महिलाओं को मौका दे रहे थे। मैंने इस मौके का लाभ उठाया और एक दिन दूरदर्शन जा पहुंची। मुझे वहां चुन लिया गया और बच्चों का कार्यक्रम होस्ट करने का मौका मिला।
वीरान सड़कों पर आठ किमी पैदल चलती थी
फरहत के घर से दूरदर्शन कार्यालय आठ किलोमीटर दूर था। उन दिनों अक्सर ही कर्फ्यू, हड़ताल, पथराव, मुठभेड़ होती थीं। मैं सूनी और वीरान सड़कों पर पैदल चलकर वहां पहुंचती थी।
महीनों यह सिलसिला चला। कुछ दिनों बाद कुछ निदेशकों ने मुझे टीवी सीरियलों में अभिनय करने का प्रस्ताव दिया। मुझे 'टीकालाल' नामक धारावाहिक में अहम रोल मिल गया। धारावाहिक लोकप्रिय हुआ और मेरे अभिनय का सफर तेजी से शुरू हो गया।
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फोटो: श्रीनगर के डाउनटाउन इलाके की रहने वाली अभिनेत्री फरहत सिद्दीकी एक नाटक में भूमिका निभाती हुईं। वह कश्मीर की पहली महिला कलाकार हैं।
छिपकर जाती थी थियेटर में काम करने
फरहत के अभिनय को देख कश्मीर कला मंच ड्रामेटिक क्लब ने अपने साथ जोड़ लिया। आतंक की वजह से यह क्लब निजी मकान में चलता था। इसके सदस्य चोरी-छिपे वहां आते थे। फरहत भी ऐसे ही पहुंचती थी। हालात सुधरने पर यह क्लब खुलेआम चलने लगा, लेकिन समाज को महिलाओं का थियेटर में काम करना पसंद नहीं था। इसलिए उनका बहिष्कार किया जाने लगा।
इसी बीच, फरहत को आतंकी संगठनों ने अभिनय छोड़ने की धमकियां दी। एक बार आतंकियों ने उन्हें बंदी बना लिया, पर कुछ स्थानीय लोगों ने छुड़वा दिया। इसके बावजूद वह अपने लक्ष्य पर अडिग रहीं।
फरहत बताती हैं कि उनके कांटों भरा सफर बाद में सुखद अहसास लाया। उनके परिवार वाले खासकर उनके पिता और भाई का साथ मिल गया। शादी के बाद पति ने भी समर्थन दिया। लोगों को इस क्षेत्र से जोड़ने के लिए उन्होंने वर्ष 2014 में महक ड्रामेटिक क्लब बना लिया।
फरहत ने जिस दौर में अभिनय को चुना था, मुझे याद है उस दौर में थियेटर में कोई लड़की काम नहीं करती थी। दूरदर्शन में तो महिलाएं काम करती थीं, लेकिन वह हिंदू समुदाय से थीं। फरहत का टीवी, थियेटर से जुड़ना और फिर तमाम चुनौतियों से आगे बढ़ना, यह सब के बस की बात नहीं है।
-अब्दुल मजीद वानी, वरिष्ठ रंगमंच एवं टीवी कलाकार