सोनमर्ग में हिमालयी भूरा भालू और 2 शावकों की एंट्री, प्रशासन ने टूरिस्ट और ड्राइवरों के लिए जारी की एडवाइजरी
सोनमर्ग के फिश प्वाइंट के पास एक हिमालयी भूरे भालू को उसके दो शावकों के साथ देखा गया, जिसके बाद ...और पढ़ें

सोनमर्ग में भूरे भालू और शावकों की दस्तक पर्यटकों के लिए एडवाइजरी जारी।
HighLights
सोनमर्ग में हिमालयी भूरा भालू दो शावकों संग दिखा।
प्रशासन ने पर्यटकों, स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी।
वन्यजीवों से दूरी बनाए रखने, उन्हें न छेड़ने की अपील।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोनमर्ग के फिश प्वाइंट क्षेत्र के निकट देर रात एक हिमालयी भूरे भालू (Himalayan Brown Bear) को उसके दो शावकों के साथ देखा गया। इस घटना के बाद प्रशासन ने पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों से क्षेत्र में आवाजाही के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।
भालू और उसके दोनों शावकों की मौजूदगी से पर्यटकों और स्थानीय लोगों में उत्सुकता के साथ-साथ सतर्कता का माहौल देखा गया। घने जंगलों और अल्पाइन प्राकृतिक परिवेश से घिरा सोनमर्ग हिमालयी भूरे भालू सहित कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, विशेषकर रात्रि के समय ऐसे वन्यजीवों का आबादी वाले इलाकों या पर्यटन स्थलों के आसपास दिखाई देना असामान्य नहीं है।
वन्यजीव विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों में भी सोनमर्ग के विभिन्न क्षेत्रों से, विशेषकर गर्मियों के मौसम में जब जंगलों के किनारे मानव गतिविधियां बढ़ जाती हैं, भालुओं के देखे जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं।
पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील
प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे किसी भी जंगली जानवर के करीब जाने, उन्हें भोजन खिलाने, निकट से फोटो या वीडियो लेने अथवा उन्हें उकसाने का प्रयास न करें। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार की गतिविधियां मानव और वन्यजीव—दोनों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं।
वन्यजीव संरक्षण विभाग ने लोगों से किसी भी जंगली जानवर के दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखने, सतर्क रहने तथा वन्यजीवों की असामान्य गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की है, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
विभाग ने यह भी कहा कि सोनमर्ग जैसे संवेदनशील वन्यजीव आवास वाले पर्यटन स्थलों पर सभी सुरक्षा दिशानिर्देशों का पालन करना और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है।
