जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पहले दिन गरमाया माहौल, पारा ने उठाया आरक्षण का मुद्दा; रोजगार-NHM पर BJP ने खोला मोर्चा
जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शीतकालीन सत्र का पहला दिन युवाओं, कर्मचारियों और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर तीखी नोकझोंक के नाम ...और पढ़ें

J&K विधानसभा के पहले दिन आरक्षण और युवाओं के मुद्दे गरमाए। (फाइल फोटो)
HighLights
विधानसभा सत्र का पहला दिन रोजगार और कर्मचारियों के मुद्दों पर गरमाया।
पीडीपी विधायक ने आरक्षण से जुड़े मामलों में देरी पर चिंता जताई।
विपक्ष ने सरकार पर भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं की कमी का आरोप।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा के शरदकालीन सत्र का पहला दिन ही युवाओं, कर्मचारियों और रोजगार से जुड़े मुद्दों के नाम रहा। सदन की शुरुआत के साथ ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। भाजपा ने रोजगार, आउटसोर्सिंग, दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण, बिजली की दरों और नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) कर्मचारियों की समस्याओं समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी की।
वहीं, पीडीपी विधायक वहीद परा ने आरक्षण से जुड़े मामलों में देरी को लेकर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। उनका कहना था कि आरक्षण का मुद्दा सीधे जम्मू-कश्मीर के युवाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं व दाखिले की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा है। हालांकि, सदन में पहले दिन इस प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी।
शुरुआत में ही नारेबाजी, मुद्दों पर बहस का मौका नहीं
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। भाजपा सदस्य रोजगार, अस्थायी कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति और जनता से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सरकार से जवाब मांगते नजर आए।
विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने दोनों पक्षों को शांत कराने का प्रयास किया, लेकिन सदन का माहौल सामान्य नहीं हो सका। इसी बीच वहीद परा का आरक्षण से जुड़ा प्रस्ताव भी चर्चा का विषय नहीं बन पाया।
परा ने आरक्षण के मामलों में देरी को लेकर चिंता जताई थी। खासतौर पर ओपन मेरिट के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले की तैयारी कर रहे युवाओं के भविष्य को लेकर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, पहले दिन की राजनीतिक तनातनी के कारण इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा नहीं हो सकी।
दो साल बाद भी सरकार के पास हर सवाल का एक ही जवाब
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने उमर अब्दुल्ला सरकार पर वादे पूरे नहीं करने और लोगों को पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं नहीं देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, खासकर उन लोगों को जो लंबे समय से अपनी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहे हैं।
शर्मा ने आरोप लगाया कि करीब दो साल सत्ता में रहने के बाद भी सरकार कई मुद्दों पर यही कहती नजर आती है कि उसके पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं और वह कुछ नहीं कर सकती।
उन्होंने बिजली और पानी की आपूर्ति को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। शर्मा का दावा था कि कई क्षेत्रों में बिजली की आपूर्ति संतोषजनक नहीं होने के बावजूद बिजली की दरों में बढ़ोतरी की गई है, जबकि पानी की समस्या भी कई जगह बनी हुई है।
दिहाड़ी से NHM तक, कर्मचारियों के मुद्दे भी रहेंगे केंद्र में
भाजपा ने विधानसभा सत्र के दौरान दिहाड़ी मजदूरों के नियमितीकरण, NHM कर्मचारियों, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाने की बात कही है। इसके अलावा नौकरी के उम्मीदवारों के लिए उम्र सीमा में छूट की मांग भी विपक्ष के एजेंडे में शामिल है।
सुनील शर्मा ने सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए और मंत्रियों व अधिकारियों पर भ्रष्टाचार में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि, ये विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप हैं, जिन्हें सरकार के जवाब के संदर्भ में देखा जाना बाकी है।
कुल मिलाकर, विधानसभा के शरदकालीन सत्र के पहले ही दिन रोजगार, आरक्षण, कर्मचारियों के अधिकार और बुनियादी सुविधाओं जैसे मुद्दे राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गए। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के आसार हैं।
