जम्मू-कश्मीर में पंजाबी समेत 3 भाषाओं को आधिकारिक दर्जा देने की तैयारी, उमर सरकार 2027 के बजट सत्र में लाएगी बिल
जम्मू-कश्मीर में पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी भाषाओं को सरकारी दर्जा मिलने की तैयारी है। उमर अब्दुल्ला सरकार 2027 के बजट ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में पंजाबी समेत तीन भाषाओं को मिलेगा सरकारी दर्जा। (फाइल फोटो)
HighLights
पंजाबी, गोजरी, पहाड़ी को मिलेगा सरकारी भाषा का दर्जा।
उमर सरकार 2027 बजट सत्र में लाएगी विधेयक।
राज्यसभा सदस्य ओबेरॉय ने सिख समुदाय को दिया आश्वासन।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी भाषाओं को सरकारी भाषा का दर्जा देने की तैयारी है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली उमर अब्दुल्ला सरकार 2027 के बजट सत्र में इस संबंध में विधानसभा में विधेयक पेश करेगी। इससे इन भाषाओं को प्रशासनिक और संस्थागत स्तर पर नई पहचान मिलने का रास्ता खुल सकता है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के राज्यसभा सदस्य शम्मी ओबरॉय ने पत्रकारों से बातचीत में इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने पंजाबी, गोजरी और पहाड़ी को आधिकारिक भाषाओं की सूची में शामिल करने का फैसला किया है।
ओबरॉय ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से लोगों से वादा किया था कि पंजाबी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं में शामिल कराया जाएगा। बुधवार को उन्होंने सिख संगत और विभिन्न गुरुद्वारा प्रबंधक समितियों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उन्हें आश्वस्त किया था कि पंजाबी को केंद्र शासित प्रदेश के आधिकारिक भाषा कानून के तहत मान्यता दिलाई जाएगी।
आज वीरवार को एक बार फिर इस घोषणा के साथ राज्य सभा सदस्य ने पंजाबी के अलावा गोजरी और पहाड़ी भाषाओं को भी आधिकारिक दर्जा देने की योजना की घोषणा की। उन्होंने कहा कि बहुत जल्द इन भाषाओं को औपचारिक मान्यता देने के लिए विधानसभा में विधायी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
विधानसभा के पास कानून बनाने का अधिकार
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद संसद ने जम्मू-कश्मीर आधिकारिक भाषा अधिनियम, 2020 पारित किया था। इसके तहत कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक भाषाएं घोषित किया गया।
वहीं, कानून में गोजरी, पंजाबी और पहाड़ी के प्रचार-प्रसार तथा विकास के लिए विशेष प्रयास करने का प्रावधान भी रखा गया। इसके लिए कला, संस्कृति एवं भाषा अकादमी जैसे संस्थागत माध्यमों की भूमिका तय की गई।
वहीं जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 के तहत केंद्र शासित प्रदेश की विधानसभा को किसी भी भाषा को आधिकारिक भाषा के रूप में अपनाने के लिए कानून बनाने का अधिकार है। ऐसे में 2027 के बजट सत्र में प्रस्तावित विधेयक इन तीन भाषाओं को औपचारिक मान्यता देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
