‘न डरेंगे, न भागेंगे’, धमकी के बाद कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों ने मांगी सुरक्षा; पूछा- निजी जानकारी कैसे लीक हुई?
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऑल पीएम पैकेज एम्प्लाइज फोरम ने कथित धमकी पोस्टर के बाद सुरक्षा बढ़ाने और जांच की मांग की है।

कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए मुख्य सचिव को पत्र (फाइल फोटो)
HighLights
विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा बढ़ाने की मांग।
कथित धमकी पोस्टर से घाटी में सुरक्षा चिंता बढ़ी।
धमकी के स्रोत और निजी डेटा लीक की जांच हो।
राज्य ब्यूरो, जागरण, श्रीनगर। कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ऑल पीएम पैकेज एम्प्लाइज फोरम कश्मीर ने जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और उन्हें पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है। फोरम ने सोशल मीडिया पर प्रसारित एक कथित धमकी पोस्टर का हवाला देते हुए प्रशासन से मामले की तत्काल जांच और आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है।
फोरम ने 24 अगस्त को लिखे अपने पत्र में प्रशासन का ध्यान 23 अगस्त की तारीख वाले एक कथित धमकी पोस्टर की ओर आकर्षित किया। पोस्टर कथित तौर पर खुद को यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल ) बताने वाले संगठन की ओर से जारी किया गया है। फोरम के अनुसार, पोस्टर में घाटी में कार्यरत विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को कथित तौर पर धमकी दी गई है। इसमें कुछ कर्मचारियों के नाम, पते और वाहन नंबर जैसी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियों का भी उल्लेख होने का दावा किया गया है।
हालांकि, फोरम ने स्पष्ट किया है कि कथित पोस्टर की प्रामाणिकता की अभी पुलिस अथवा सुरक्षा एजेंसियों की ओर से पुष्टि नहीं की गई है। संगठन ने कहा कि इसके बावजूद इस तरह के धमकी भरे पत्रों और पोस्टरों का बार-बार सामने आना गंभीर चिंता का विषय है, विशेषकर तब जब इनमें कर्मचारियों से जुड़ी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी शामिल होने का दावा किया जा रहा हो।
‘न डरेंगे, न घाटी छोड़कर भागेंगे’
कथित धमकी पर प्रतिक्रिया देते हुए एक विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारी ने कहा कि वे इस तरह की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं और न ही घाटी छोड़कर भागेंगे। कर्मचारी ने कहा कि कश्मीर उनका भी है और यही उनकी जन्मभूमि है।
उन्होंने बताया कि अगस्त के पहले सप्ताह में भी एक धमकी पत्र सामने आया था। अब एक बार फिर ऐसा पत्र या पोस्टर सोशल मीडिया पर प्रसारित किया गया है, जिसमें कथित तौर पर कर्मचारियों के पते, वाहन नंबर और फोन नंबर जैसी जानकारी का उल्लेख है।
कर्मचारी ने प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों से इन धमकियों के स्रोत का पता लगाने तथा यह जांच करने की अपील की कि संबंधित लोगों तक कर्मचारियों की निजी जानकारी कैसे पहुंच रही है।
पहले भी सामने आ चुके हैं लक्षित हमले
फोरम ने अपने पत्र में विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों के खिलाफ पहले हुए लक्षित हमलों का भी उल्लेख किया। संगठन ने कहा कि ऐसी घटनाओं में कर्मचारियों की जान जा चुकी है। लगातार सामने आ रही कथित धमकियों के कारण कर्मचारियों और उनके परिवारों में भय तथा असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।
फोरम ने मांग की है कि घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत तैनात सभी विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। साथ ही, नवीनतम कथित धमकी पोस्टर की गहन जांच कर उसकी वास्तविकता का पता लगाया जाए और यदि यह वास्तविक पाया जाता है या जानबूझकर कर्मचारियों को भयभीत करने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया है, तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
पोस्टिंग स्थल, आवास और आवागमन मार्गों की सुरक्षा समीक्षा की मांग
संगठन ने कर्मचारियों के पोस्टिंग स्थलों, आवासीय परिसरों और आवागमन के मार्गों पर मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने की भी मांग की है। जिन कर्मचारियों के नाम, पते या वाहन संबंधी विवरण कथित पोस्टर में सामने आए हैं, उन्हें तत्काल सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है।
फोरम ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा आकलन और खुफिया सूचनाओं के आधार पर एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए। संगठन ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई करने और विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों तथा उनके परिवारों में सुरक्षा का भरोसा कायम करने की अपील की है।
कश्मीर घाटी में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत विस्थापित कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब उनकी सुरक्षा का मुद्दा लगातार संवेदनशील बना हुआ है। फोरम ने प्रशासन से कथित धमकी की औपचारिक जांच कर सच्चाई सामने लाने के साथ-साथ कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल मजबूत करने का आग्रह किया है।
