'सम्मान जरूरी, गाने की जबरदस्ती नहीं...', वंदे मातरम पर सियासी घमासान के बीच नेकां नेता तनवीर सादिक का बड़ा बयान
नेकां नेता तनवीर सादिक ने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का सम्मान करना वैधानिक दायित्व है, लेकिन इसे गाने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
HighLights
सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का सम्मान वैधानिक दायित्व है।
किसी को भी वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।
नेकां का हमेशा से निजी आस्था पर दबाव न डालने का रुख।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। वंदे मातरम को लेकर छिड़ी सियासी बहस के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता और विधायक तनवीर सादिक ने बुधवार को पार्टी का रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में वंदे मातरम का सम्मान करना एक वैधानिक दायित्व है, लेकिन किसी को भी इसे गाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। तनवीर सादिक इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरे जाने और भाजपा-पीडीपी द्वारा लगाए जा रहे आरोपों पर प्रतिक्रिया दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का हमेशा से स्पष्ट स्टैंड रहा है। हमने न कभी दोहरा रवैया अपनाया है और न ही कभी छह तरह की बातें की हैं। हम समझते हैं कि पार्टी अलग चीज है और सरकार अलग चीज है।
सादिक ने कहा कि जब संसद ने इस मामले को स्वीकार कर लिया है, तो सरकार के लिए आधिकारिक कार्यक्रमों में इसका पालन करना अनिवार्य हो जाता है। किसी भी सरकारी समारोह में, चाहे वह वंदे मातरम हो या राष्ट्रगान, व्यक्ति को खड़ा होकर उसका सम्मान करना होगा और हम वही कर रहे हैं।
कर्नाटक और तेलंगाना का उदाहरण
उन्होंने इस दौरान कर्नाटक और तेलंगाना के कांग्रेस मुख्यमंत्रियों का उदाहरण भी दिया, जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस समारोहों में वंदे मातरम के दौरान सम्मान में खड़े रहे थे। सादिक ने कहा कि अगर ऐसा है, तो हम पर उंगली उठाने से पहले यह समझना चाहिए कि यह एक वैधानिक बाध्यता है जो कानून बन चुका है और हमें उस कानून का पालन करना है।
पार्टी लाइन को दोहराते हुए सादिक ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का मानना है कि वंदे मातरम गाने को लेकर किसी पर दबाव नहीं होना चाहिए। जहां तक पार्टी के अपने रुख का सवाल है, हमने हमेशा कहा है कि जो कोई वंदे मातरम गाना चाहता है, उसे बिल्कुल गाना चाहिए, लेकिन जो नहीं गाना चाहता, उस पर कोई जोर-जबरदस्ती या बाध्यता नहीं होनी चाहिए।
बजट खर्च और कर्मचारियों के मुद्दों पर भी बोले
पत्रकारों ने जब जम्मू-कश्मीर के बजट को लेकर सवाल पूछा कि लगभग 10-11 हजार करोड़ रुपये के आवंटन में से केवल 2400 करोड़ रुपये ही खर्च हुए हैं और करीब 8000 करोड़ अभी भी लंबित हैं, तो इस पर सादिक ने कहा कि उनके पास फिलहाल आंकड़ों की जानकारी नहीं है।
वित्त विभाग को इसकी जानकारी होगी क्योंकि आपने यह मामला हमारे साथ साझा किया है। पहले हम इस पर जानकारी जुटाते हैं और देखते हैं कि वास्तविकता क्या है, क्योंकि आजकल बहुत सी अफवाहें फैल रही हैं। बेहतर है कि हम पहले इनपुट लाएं और फिर आपके साथ साझा करें।
वहीं, विधानसभा सत्र से पहले दैनिक वेतनभोगियों की मांगों और नेशनल हेल्थ मिशन कर्मचारियों की हड़ताल पर पूछे गए सवाल पर सादिक ने कहा कि सरकार वास्तविक मांगों को हल करना चाहती है। जैसे इंटर्न का मुद्दा बहुत बड़ा था, स्वास्थ्य मंत्री ने उसे हल किया। यह सरकार हमेशा चाहेगी कि उसके लोगों की, चाहे वे कर्मचारी हों या जम्मू-कश्मीर का कोई भी व्यक्ति, जो भी जायज मांगें हैं, उनका किसी तरह समाधान हो। उन्होंने कहा कि आगामी विधानसभा सत्र जनता की आवाज उठाने का एक महत्वपूर्ण मंच होगा, जहां जनहित से जुड़े बिल और प्रस्ताव पास होने की उम्मीद है।
