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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 23, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कश्मीर की डल झील को दुनिया में मिलेगी नई पहचान, शिकारा-क्रिकेट बल्लों सहित सात उत्पादों को मिलेगा GI Tag

Published: Sat, 23 Nov 2024 10:22 AM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर के सात और उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) प्रमाणन मिलने जा रहा है जिसमें डल झील में तैरते शिकारे ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर की डल झील में तैरने वाले शिकारा को जीआई टैग मिलने वाला है।
जम्मू-कश्मीर की डल झील में तैरने वाले शिकारा को जीआई टैग मिलने वाला है।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। डल झील में तैरते शिकारा के साथ-साथ कश्मीर की क्रिवल कढ़ाई और कश्मीरी विलो के बने क्रिकेट बल्लों समेत सात और उत्पादों को भौगोलिक संकेत (जीआई) प्रमाणन मिलने वाला है। हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग ने इस विषय में सभी आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा कर लिया है।

इन उत्पादों को जीआइ प्रमाणन मिलने से न सिर्फ संबंधित शिल्प और कला की विशिष्टता का संरक्षण होगा बल्कि संबंधित क्षेत्रों से जुड़े लोगों की आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलेगा, उनके आर्थिक-सामाजिक उत्थान में भी मदद मिलेगी।

हस्तशिल्प एवं हथकरघा विभाग के कश्मीर के निदेशक महमूद अहमद शाह ने बताया कि कश्मीर के पश्मीना शाल, कानी शाल, सोजनी, पेपर-माछी, अखरोट की लकड़ी की नक्काशी, खतमबंद व हाथ से बुने हुए कालीन पहले ही जीआइ प्रमाणित हो चुके हैं।

केसर को जीआई प्रमाणन मिल चुका है। 18 नवंबर को हमने सात और उत्पादों में शिकारा, क्रिवल कढ़ाई, नमदा, ट्वीड, कश्मीरी विलो के बने क्रिकेट बल्ले, चेन स्टिच व वग्गू के लिए जीआइ प्रमाणन संबंधी औपचारिकताओं को पूरा किया है।

अब कांदकारी और हाउसबोट की बारी

निदेशक ने बताया कि हमने सात उत्पादों और शिल्पों के जीआई प्रमाणन की आवश्यकता से संबंधित प्राधिकरण को अवगत करते हुए इनके इतिहास और विशिष्टता की पूरी जानकारी दी है। उम्मीद है कि दिसंबर या अगले वर्ष में सभी को जीआइ प्रमाणन प्रदान कर दिया जाएगा। हम कश्मीर में हाथ से तांबे के बर्तन तैयार करने की कला (कांदकारी) और कश्मीर के हाउसबोट के लिए भी जीआइ प्रमाणन प्राप्त करने के लिए आवश्यक डोजियर तैयार कर रहे हैं।

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कश्मीर के कारीगर उत्साहित

कारीगर फारूक अहमद खान ने कहा कि नमदा को जीआइ प्रमाणन की सुविधा मिलने से नमदा की कला, इससे जुड़े कारीगरों को नयी जिंदगी मिलेगी। बाजार में कश्मीरी नमदा के नाम पर कई नकली और घटिया उत्पाद उपलब्ध हैं, जो कारीगरों और शिल्प को बदनाम कर रहे हैं। जीआइ टैग इस तरह के नकली सामान को समाप्त कर देगा।

इन उत्पादों को भी मिलेगा GI टैग

  • शिकारा: कश्मीर का शिकारा (नौका) देश के अन्य भागों में इस्तेमाल की जाने वाली नौकाओं से अलग होता है। यह सिर्फ जलविहारों में सैर के लिए ही होता है। बना तो यह लकड़ी का ही होता है, लेकिन इसमें धूप और बारिश से बचाव के लिए छत होती है, इसके अलावा यह आगे पीछे, दाएं-बाएं से खुला होता है। इसमें नक्काशी भी होती है।
  • नमदा: भेड़ की ऊन से तैयार किए जाने वाला यह एक तरह का ऊनी कालीन की तरह होता है, जिसे बिस्तर पर या बैठने वाली जगह पर बिछाया जाता है। इसपर कढ़ाई भी शानदार होती है और इसे साज-सज्जा के लिए भी इस्तेमाल किया जाता है।
  • ट्वीड: यह कश्मीर में उत्पादित ऊनी कपड़ा है, जो बेहद गर्म और गुणवत्ता में काफी बेहतर होता है। l कश्मीर विलो के बने क्रिकेट बल्ले : यहां के विल्लो से बने बल्ले वजन में हल्के और गुणवत्ता में कहीं बेहतर होते हैं।
  • चेन स्टिच और क्रिवल: कश्मीर की यह दोनों कढ़ाई अपने आप में विशिष्ट है।
  • वग्गू: कश्मीर में वेटलैंड में उपलब्ध होने वाली एक प्रकार की घास से तैयार की जाने वाली एक चटाई होती है। यह ठंड से बचाव करती है।

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