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ऊधमपुर में बड़ी कार्रवाई, 32 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया जल शक्ति विभाग का कर्मचारी अभिकांत शर्मा टर्मिनेट

By Naveen Sharma Edited By: Rahul Sharma
Published: Tue, 28 Jul 2026 11:25 AM (IST)

जल शक्ति विभाग के कर्मचारी अभिकांत शर्मा को मादक पदार्थ तस्करी (NDPS) मामले में सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।

सरकारी कर्मचारी की करतूत से विभाग की साख दांव पर, सेवा से हमेशा के लिए छुट्टी।

सरकारी कर्मचारी की करतूत से विभाग की साख दांव पर, सेवा से हमेशा के लिए छुट्टी

HighLights

  1. जल शक्ति विभाग कर्मचारी अभिकांत शर्मा सेवा से बर्खास्त।

  2. मादक पदार्थ तस्करी (NDPS) मामले में हुई गिरफ्तारी।

  3. ऊधमपुर में 32 ग्राम हेरोइन के साथ पकड़ा गया।

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। मादक पदार्थ तस्करी (एनडीपीएस) मामले में गिरफ्तार जल शक्ति (पीएचई) विभाग के कर्मचारी अभिकांत शर्मा को जम्मू-कश्मीर सरकार ने सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभाग की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि कर्मचारी के खिलाफ विभागीय जांच में आरोप गंभीर पाए गए, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई।

सरकारी आदेश के अनुसार, ऊधमपुर के रहने वाले अभिकांत शर्मा पीएचई डिवीजन उधमपुर में टर्नकॉक के पद पर तैनात थे। उनके खिलाफ थाना माजलता में एनडीपीएस अधिनियम के तहत एफआईआर संख्या 43/2026 दर्ज की गई थी। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 32 ग्राम हेरोइन बरामद करने का दावा किया था, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

मामले के सामने आने के बाद जल शक्ति विभाग ने पहले उन्हें निलंबित किया और फिर विभागीय जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस रिकॉर्ड, फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की गई। एफएसएल रिपोर्ट में जब्त पदार्थ के हेरोइन (डायएसिटाइलमॉर्फीन) होने की पुष्टि हुई।

जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कर्मचारी का कथित आचरण सरकारी सेवक के लिए अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं है और इससे विभाग की साख पर प्रतिकूल असर पड़ा है। रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने अभिकांत शर्मा को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश में यह भी कहा गया है कि वह भविष्य में किसी भी सरकारी सेवा के लिए पात्र नहीं होंगे।

उल्लेखनीय है कि यह कार्रवाई विभागीय जांच और सरकार द्वारा जारी आदेश के आधार पर की गई है। एनडीपीएस मामले में अंतिम फैसला संबंधित न्यायालय द्वारा किया जाना बाकी है।