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जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक होगा बैन? विधानसभा की पर्यावरण समिति ने की मांग

Published: Thu, 18 Jun 2026 08:19 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर विधानसभा की पर्यावरण समिति ने बेलगाम प्लास्टिक प्रदूषण पर चिंता जताते हुए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में प्लास्टिक, विशेषकर सिंगल-यूज प्लास्टिक, पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की वकालत की है।

जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक प्रदूषण पर समिति सख्त व्यापक प्रतिबंध की मांग।

जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक प्रदूषण पर समिति सख्त व्यापक प्रतिबंध की मांग।

HighLights

  1. पर्यावरण समिति ने प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध की वकालत की

  2. सिंगल-यूज प्लास्टिक से नदियों, झीलों को गंभीर खतरा

  3. सफाईकर्मियों की हड़ताल, लैंडफिल साइटों पर भी चिंता जताई

जागरण संवाददाता, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बेलगाम प्लास्टिक प्रदूषण को लेकर विधानसभा की पर्यावरण समिति ने सरकार और संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए पूरे केंद्र शासित प्रदेश में प्लास्टिक, विशेषकर सिंगल-यूज प्लास्टिक, पर व्यापक प्रतिबंध लगाने की जोरदार वकालत की है।

समिति ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि समय रहते कठोर कदम नहीं उठाए गए तो प्रदेश की नदियां, झीलें और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्र अपूरणीय क्षति का शिकार हो सकते हैं। समिति ने सफाईकर्मियों की हड़ताल पर भी कड़ा रुख अपनाया और संबधित प्रशासन को उनसे वार्ता कर उनके मुद्दों को यथासंभव हल करने को कहा।

विधायक एमवाई तारीगामी की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में बढ़ते प्लास्टिक कचरे को जम्मू-कश्मीर के सामने खड़े सबसे गंभीर पर्यावरणीय खतरों में से एक बताया गया। समिति ने कहा कि प्लास्टिक का अंधाधुंध इस्तेमाल जल स्रोतों को प्रदूषित कर रहा है, जनस्वास्थ्य को खतरे में डाल रहा है और प्रदेश के नाजुक पारिस्थितिक संतुलन को लगातार नुकसान पहुंचा रहा है।

बैठक में एम.वाई. तारीगामी ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से पूरे जम्मू-कश्मीर में प्लास्टिक के उपयोग पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के लिए कार्यकारी आदेश जारी करने की मांग करते हुए कहा कि अब आधे-अधूरे उपायों का समय बीत चुका है।

उन्होंने जम्मू-कश्मीर प्रदूषण नियंत्रण समिति (जेकेपीसीसी) को भी कड़ी फटकार लगाते हुए सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध संबंधी कानूनों को सख्ती से लागू करने और उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। विशेष रूप से पर्यटन स्थलों, धार्मिक परिसरों और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताई गई।

समिति ने यह भी साफ किया कि केवल कागजी आदेशों से जम्मू-कश्मीर प्लास्टिक मुक्त नहीं होगा। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति, श्रीनगर नगर निगम और जम्मू नगर निगम के बीच समन्वित और जवाबदेह कार्रवाई आवश्यक है। सरकारी कार्यालयों, बैठकों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में प्लास्टिक के उपयोग को तत्काल बंद करने की भी सिफारिश की गई।

बैठक में सफाई कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। समिति ने चेतावनी दी कि यदि स्वच्छता कर्मचारियों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो शहरी क्षेत्रों में स्वच्छता व्यवस्था गंभीर संकट में पड़ सकती है। आवास एवं शहरी विकास विभाग को आंदोलनरत कर्मचारियों से तत्काल वार्ता कर उनकी नियमितीकरण संबंधी मांगों पर सकारात्मक पहल करने के निर्देश दिए गए।

पर्यावरण समिति ने श्रीनगर के अच्छन लैंडफिल और जम्मू के भगवती नगर डंपिंग साइट की स्थिति पर भी कड़ा रुख अपनाया। समिति ने इन स्थलों के पर्यावरणीय प्रभाव, पुराने कचरे के निस्तारण, वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुपालन पर विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए जवाबदेही तय करने के संकेत दिए।

अंचार झील, तवी नदी, सुरंईसर झील और मानसर झील में बढ़ते प्रदूषण को लेकर भी समिति ने गहरी चिंता जताई। तवी नदी में गिर रहे सीवेज और गंदे नालों को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा गया तथा बिना उपचारित गंदे पानी की निकासी रोकने के लिए चल रही परियोजनाओं की समीक्षा की गई। अधिकारियों को इन जल निकायों का मौके पर निरीक्षण कर संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए आवश्यक उपाय सुझाने के निर्देश दिए गए।

समिति ने जम्मू नगर निगम से नगर सीमा के भीतर स्थित तालाबों, झीलों और अन्य जल निकायों के संरक्षण, पुनर्जीवन और अतिक्रमण मुक्त कराने संबंधी प्रयासों की जानकारी भी मांगी। बैठक में वर्ष 2025 की सीएजी रिपोर्ट में शहरी स्थानीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित टिप्पणियों को अगली बैठक में प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया गया।समिति ने जल निकायों के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।

समिति ने स्पष्ट संदेश दिया कि पर्यावरणीय मुद्दों पर अब किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अध्यक्ष एमवाई तारीगामी ने अधिकारियों को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने और अगली बैठक में विस्तृत कार्रवाई प्रतिवेदन (एटीआर) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। समिति ने संकेत दिया कि यदि स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ तो संबंधित विभागों की जवाबदेही तय की जाएगी

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