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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 05, 2011 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    ब्रह्म की प्राप्ति, भ्रम की समाप्ति

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    Updated: Thu, 17 Nov 2011 02:14 PM (IST)

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    ऊधमपुर, जागरण संवाद केंद्र :

    संत निरंकारी सत्संग भवन शाखा ऊधमपुर व लांसी में मंगलवार को संत निरंकारी मिशन के सेंट्रल एडवाइजरी बोर्ड व प्लानिंग के चेयरमैन महात्मा गोविंद सिंह जी की अध्यक्षता में सत्संग का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर महात्मा जी के आध्यात्मिक प्रवचनों द्वारा आशीर्वाद प्राप्त किया।

    शाखा ऊधमपुर में सुबह साढ़े दस बजे सत्संग का शुभारंभ अवतार वाणी गायन के साथ हुआ। महात्मा गोविंद सिंह जी ने विचारों में बताया कि सतगुरु ने ब्रह्म ज्ञान प्रदान करने से पहले पांच प्रण लिए हैं। पहला प्रण तन, मन, धन निरंकार प्रभु का है और इसे प्रभु का ही समझकर इस्तेमाल करना है। दूसरा प्रण जातपात को नहीं मानना है, क्योंकि प्रभु ने हमें मानव बनाकर धरती पर भेजा है। तीसरा प्रण किसी के खानपान व रहन-सहन पर आपत्ति नहीं करनी है। चौथा प्रण गृहस्थ में रहकर जीवन व्यतीत करना है और पांचवां प्रण जो निरंकार प्रभु का ज्ञान दिया है इसे सतगुरु की आज्ञा के बिना खोलना नहीं है। उन्होंने बताया कि जो भी ब्रह्मज्ञान प्राप्त करने के बाद इन पांच प्रण को निभाते हुए जीवन व्यतीत करता है।

    उन्होंने कहा कि सहनशीलता व नम्रता गुरुसिखी का गहना है। जिसे अपनाने पर जीवन का श्रंगार होता है। मानव विभिन्न प्रकार के भ्रमों में पड़कर अपने जीवन को व्यर्थ में गवा रहा है। लेकिन समय का सतगुरु बाबा हरदेव सिंह जी महाराज मानव को आवाज दे रहा है कि ब्रह्म की प्राप्ति के बाद भ्रम की समाप्ति हो जाती है। शाखा प्रमुख महात्मा अमृत लाल जी ने महात्मा गोविंद जी का ऊधमपुर पहुंचकर श्रद्धालुओं को प्रदान करने पर धन्यवाद व्यक्त किया। शाम करीब चार से छह बजे लांसी भवन में सत्संग का आयोजन हुआ। इस मौके पर जम्मू कश्मीर के जोन नंबर वन ए जोनल इंचार्ज अजीत सिंह व अन्य कई महात्मा उपस्थित थे।

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