900 रुपये में कैसे चले घर? ऊधमपुर में बच्चों का पेट भरने वाले कुक खुद परेशान, सरकार को आंदोलन की चेतावनी
ऊधमपुर में मिड-डे-मील कुक ने कम मानदेय और भुगतान में देरी के खिलाफ सीईओ कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने ...और पढ़ें

मिड-डे-मील कुक ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा।
HighLights
मिड-डे-मील कुक ने कम मानदेय के खिलाफ प्रदर्शन किया।
900 रुपये मानदेय बढ़ाने और स्थायीकरण की मांग की।
सितंबर में जम्मू में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
जागरण संवाददाता, ऊधमपुर। सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे-मील तैयार करने वाले कुक अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए। लंबे समय से कम मानदेय और भुगतान में देरी का सामना कर रहे कुक ने मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने मानदेय बढ़ाने के साथ उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग उठाई। बाद में कुक ने अपनी मांगों का ज्ञापन सीईओ को सौंपा।
आल डेलीवेजर्स संघर्ष समिति के चेयरमैन सन्नी चिब के नेतृत्व में हुए प्रदर्शन के दौरान प्रवीन अख्तर सहित अन्य कुक ने अपनी परेशानियां सामने रखीं। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मिड-डे-मील तैयार करने के बदले उन्हें केवल 900 रुपये मानदेय दिया जा रहा है। महंगाई के इस दौर में इतनी कम राशि में परिवार की जरूरतें पूरी करना बेहद मुश्किल हो गया है।
उन्होंने कहा कि 900 रुपये से घर का खर्च चलाना तो दूर, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की आवश्यकताओं का खर्च भी पूरा नहीं हो पाता। आर्थिक तंगी के कारण उन्हें कई बार उधार लेकर परिवार की जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे कुक
प्रदर्शनकारियों ने मानदेय के भुगतान में देरी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि मानदेय हर महीने नियमित रूप से नहीं मिलता। कई बार छह महीने या उससे भी अधिक समय तक भुगतान लंबित रहता है। लंबे समय तक मानदेय नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
कुक ने कहा कि वे सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो रहा है। उन्होंने सरकार से मानदेय में सम्मानजनक बढ़ोतरी करने और उन्हें स्थायी कर्मचारी बनाने के लिए ठोस नीति तैयार करने की मांग की।
सरकार पर वादे भूलने का आरोप
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए सन्नी चिब ने सरकार पर अस्थायी कर्मचारियों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास मंत्रियों और विधायकों के खर्च बढ़ाने के लिए धन है, लेकिन गरीब अस्थायी कर्मचारियों का मानदेय बढ़ाने के लिए पैसा नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनावों के दौरान सरकार की ओर से अस्थायी कर्मचारियों के हित में बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को भुला दिया गया।
उन्होंने सरकार से मांग की कि कुक की समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो सितंबर में जम्मू में बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मानदेय में बढ़ोतरी और स्थायी कर्मचारी बनाने सहित अन्य मांगों को पूरा किए जाने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
