बोकारों में PM आवास योजना के तहत मिले मकानों में पानी का संकट, पुराने आशियाने में लौटे 15 परिवार
गोमिया प्रखंड के सियारी पंचायत में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बसाए गए पासी जनजाति के 41 परिवार गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। ...और पढ़ें
-1777807787082_m.webp)
AI Generated Image

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
रजनीश प्रसाद, बेरमो। गोमिया प्रखंड के सियारी पंचायत में पासी जनजाति के 41 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बसाया गया है। इन्हें बेहतर जीवन और रोजमर्रा की सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यहां पक्के मकान बनाकर दिए गए थे, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत साबित हो रही है।
जिस स्थान पर इन परिवारों को बसाया गया है, वहां पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। मिठु पासी ने बताया कि 15 परिवार अपने पक्के मकान छोड़कर स्वांग उत्तरी पंचायत के गांधीग्राम स्थित अपने पुराने झोपड़ियों में वापस चले गए हैं।
करीब एक महीने पहले यहां एक डीप बोरिंग कराई गई थी। बोरिंग स्थल पर लगे बोर्ड के अनुसार यह कार्य ओएनजीसी द्वारा कराया गया है, लेकिन उसमें पानी नहीं निकल सका। इसके बाद एक गड्ढे से पानी निकालकर टंकी में सप्लाई की जा रही थी, पर अब उस मोटर को भी हटा लिया गया है। जिस गड्ढे से पानी लिया जा रहा था, वह अत्यंत दूषित है और पीने योग्य नहीं है। उसमें मिट्टी, कीचड़ और गंदगी साफ दिखाई देती है।
जब मकानों का निर्माण कराया गया था, उस समय भी दो डीप बोरिंग कराई गई थीं, लेकिन क्षेत्र में जलस्तर कम होने के कारण वहां से भी पानी नहीं मिल सका।
वर्तमान में वहां रह रहे परिवारों का कहना है कि वे करीब ढाई साल पहले अपने पुराने स्थान को छोड़कर यहां आए थे। उन्हें कई तरह के आश्वासन और सपने दिखाए गए थे, लेकिन अब वे वापस भी नहीं जा सकते, क्योंकि उनका पुराना घर भी रहने योग्य नहीं रह गया है।
खबरें और भी
यहां रहने वाले लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए या तो जार का पानी खरीदते हैं या फिर एक से डेढ़ किलोमीटर दूर रेलवे ट्रैक पार कर पानी लाते हैं। कई बार उन्हें गड्ढों और नालों से पानी भरकर सिर पर ढोना पड़ता है।
घटिया निर्माण से मकानों में सीपेज, बारिश में रहना मुश्किल
पक्के मकान बनाकर दिए गए थे, लेकिन उनकी स्थिति दयनीय है। बारिश होते ही छत और दीवारों से पानी का सीपेज शुरू हो जाता है, जिससे घर के अंदर रहना मुश्किल हो जाता है। कई घरों में पानी भर जाता है, जिससे लोग काफी परेशान हैं।
यह साफ देखा गया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता की घोर अनदेखी की गई है। कई स्थानों पर गिट्टी साफ दिखाई देती है और सीमेंट की मात्रा बेहद कम है, जो निर्माण में लापरवाही को दर्शाता है।
पंचायत बदलने से लाभार्थी उपेक्षित, न यहां के रहे न वहां के
पहले इनका निवास स्थान स्वांग उत्तरी पंचायत में था, लेकिन वर्तमान में ये सियारी पंचायत के अंतर्गत आते हैं। अभी भी इनका वोटर कार्ड स्वांग उत्तरी पंचायत में बना हुआ है, जबकि ये अब सियारी पंचायत में रह रहे हैं।
इसी वजह से न सियारी पंचायत के मुखिया इन पर ध्यान देते हैं और न ही स्वांग उत्तरी पंचायत के मुखिया। परिणामस्वरूप इनकी स्थिति ऐसी हो गई है कि न इनका ठिकाना स्पष्ट है और न ही कोई जिम्मेदारी लेने वाला।
हम लोगों को यहां लाकर बसाया गया, लेकिन पानी की कोई समुचित व्यवस्था नहीं की गई। जो बोरिंग दी गई है, वह भी बेकार साबित हो रही है। पानी के अभाव के कारण यहां के 15 परिवार अपने पुराने स्थान पर वापस चले गए हैं। पानी की कमी इतनी गंभीर है कि मैं स्वयं पिछले 15 दिनों से नहा नहीं पाया हूं।
मिठु पासी, निवासी गांधीग्राम सियारी
हम लोगों को जो घर दिए गए हैं, उनमें पानी टपकता है। बरसात के दिनों में यहां रहना बेहद मुश्किल हो जाता है। घर की छत से पानी गिरता है, लेकिन रोजमर्रा के कामों के लिए पानी उपलब्ध नहीं है।
जानकी देवी, निवासी गांधीग्राम सियारी
हम लोगों को राशन लेने के लिए पिपराडीह जाना पड़ता है, जो यहां से 6 किलोमीटर दूर है। हमें सियारी पंचायत में बसाया गया है, लेकिन हमारी सभी सुविधाएं और दस्तावेज अब भी स्वांग उत्तरी पंचायत में ही हैं।
सिमा देवी, निवासी गांधीग्राम सियारी
जो भी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं, उनके समाधान के लिए हम लोग आगे योजना बनाकर कार्य करेंगे।
मुकेश मछुआ, एसडीएम बेरमो