6 महीने, 58 केस और 82 गिरफ्तारियां: चतरा बना नशा तस्करी का गढ़; कई राज्यों की जेलों में बंद जिले के युवा
चतरा जिला मादक पदार्थों की तस्करी का बड़ा केंद्र बन गया है, जहां युवा तेजी से इस अवैध कारोबार में फंस रहे हैं। जनवरी से जून तक 58 मामलों में 82 गिरफ्त ...और पढ़ें
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HighLights
चतरा मादक पदार्थों की तस्करी का प्रमुख केंद्र बना।
जनवरी-जून में 58 केस, 82 युवा तस्कर गिरफ्तार।
3000 एकड़ से अधिक अफीम की खेती नष्ट की गई।
जागरण संवाददाता, चतरा। चतरा जिला मादक पदार्थों की तस्करी का बड़ा केंद्र बन गया है। अफीम और ब्राउन शुगर की तस्करी के लिए पूरे देश में बदनाम है। यहां के युवक झारखंड और बिहार ही नहीं, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान आदि कई प्रदेशों के सलाखों के पीछे जिंदगी काट रहे हैं। यह घोर चिंता का विषय है। इस अवैध कारोबार में युवा तेजी से फंस रहे हैं।
त्वरित कमाई के लालच में वे नशा तस्करों के नेटवर्क का हिस्सा बन रहे हैं और गिरफ्तारी के बाद उनकी जवानी सलाखों के पीछे कट रही है। जिले में जनवरी से 20 जून तक के उपलब्ध आंकड़े स्थिति की गंभीरता को उजागर करते हैं। इस अवधि में एनडीपीएस एक्ट के 58 मामले दर्ज किए गए, जिनमें 82 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। यानी हर महीने औसतन 14 तस्करों को जेल भेजा गया।
गिरफ्तार आरोपियों में लगभग 99 प्रतिशत युवा वर्ग से हैं। यह इस बात का संकेत है कि नशा तस्करों का सबसे आसान निशाना बेरोजगार और कम उम्र के युवक बन रहे हैं। एक-दो नहीं, बल्कि दर्जनभर से अधिक मामलों में अंतरराज्यीय गिरोहों की संलिप्तता सामने आई है। सीमावर्ती इलाकों का लाभ उठाकर तस्कर मादक पदार्थों की खेप एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचा रहे हैं। लगातार छापेमारी के बावजूद नेटवर्क पूरी तरह नहीं टूट सका है।
तीन हजार एकड़ में अवैध अफीम की खेती की गई नष्ट
पुलिस ने इस वर्ष मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान को और तेज किया है। विशेष अभियान चलाकर तीन हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में लगी अवैध अफीम की खेती नष्ट की गई। यह कार्रवाई बताती है कि जिले में अवैध खेती का दायरा कितना व्यापक था।
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हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल खेती नष्ट करने से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए तस्करी के पूरे नेटवर्क, आर्थिक स्रोत और खरीद-बिक्री की श्रृंखला पर एक साथ कार्रवाई करनी होगी।
रोजगार की कमी और लालच बना बड़ी वजह
सामाजिक जानकारों का कहना है कि बेरोजगारी, तेजी से पैसा कमाने की चाह और गलत संगत युवाओं को इस दलदल में धकेल रही है। गांवों तक फैले तस्करों के एजेंट युवाओं को मामूली रकम का लालच देकर नशीले पदार्थों की ढुलाई और बिक्री में लगा देते हैं। पहली बार में आसान कमाई का आकर्षण उन्हें अपराध की दुनिया में ले जाता है, जहां से लौटना मुश्किल हो जाता है।
जागरूकता की जरूरत, तभी टूटेगा नेटवर्क
पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन केवल गिरफ्तारी से इस समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। जरूरत है कि गांव-गांव तक जनजागरूकता अभियान चलाए जाएं, युवाओं को रोजगार और कौशल विकास से जोड़ा जाए तथा अभिभावकों को भी सतर्क किया जाए। सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी, खुफिया तंत्र को मजबूत करने और जनसहयोग बढ़ाने से ही नशे के इस नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

(तस्करों से जब्त डोडा। फाइल फोटो)
बमरामद मादक पदार्थों का विवरण
- अफीम- 144.607 किलो
- ब्राउन शुगर- 548.619 ग्राम
- गांजा- 78.168 किलो
- डोडा- 2.2 टन
- पोस्ता दाना- 236.7 किलो
- नकद रुपये - 3.28 लाख।
नशे के कारोबार में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। आने वाले दिनों में अभियान को और तेज किया जाएगा। साथ ही युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। कठोर कानूनी कार्रवाई और जनसहयोग से ही जिले को नशा तस्करी के जाल से बाहर निकाला जा सकता है।
अनिमेष नाथवानी, एसपी, चतरा।