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    सीआरपीएफ जवान की मौत से भड़का जनाक्रोश, चतरा-सिमरिया मार्ग 24 घंटे से जाम

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 04:55 PM (IST)

    सिमरिया में हाईवा की चपेट में आने से सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की मौत के बाद ग्रामीणों ने चतरा-सिमरिया मार्ग जाम कर दिया। ग्रामीण मृतक के परिजन ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. हाईवा की चपेट में आने से सीआरपीएफ जवान की मौत।

    2. चतरा-सिमरिया मार्ग 24 घंटे से मुआवजे की मांग पर जाम।

    संवाद सूत्र, सिमरिया (चतरा)। सिमरिया थाना क्षेत्र की देल्हो घाटी में कोयला लदे हाईवा की चपेट में आने से घायल सीआरपीएफ जवान लक्ष्मण कुमार यादव की इलाज के दौरान मौत के बाद ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा। मृतक के पैतृक गांव विराजपुर के ग्रामीणों ने गुरुवार की रात से ही चतरा-सिमरिया मुख्य मार्ग जाम कर दिया।

    सड़क पर टायर जलाकर प्रदर्शन कर रहे ग्रामीण मृतक के स्वजन को उचित मुआवजा देने, नागरिक सड़क से कोयला एवं फ्लाई ऐश की ट्रांसपोर्टिंग तत्काल बंद करने तथा लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने की मांग पर अड़े रहे।

    ग्रामीणों का आरोप है कि नागरिक सड़क पर भारी वाहनों के लगातार परिचालन के कारण आए दिन हादसे हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से प्रभावी कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

    प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। समाचार लिखे जाने तक सड़क जाम लगभग 24 घंटे सेजारी था, जिससे दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सड़क जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।

    सिमरिया अंचल अधिकारी गौरव कुमार राय ने ग्रामीणों से वार्ता करते हुए बताया कि ट्रांसपोर्टरों से लगातार संपर्क कर मृतक के स्वजन को उचित मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने सरकारी प्रावधानों के तहत भी हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम रहे।

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    घटना की जानकारी मिलने पर झामुमो नेता मनोज कुमार चंद्रा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष चंद्रदेव गोप तथा पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता भी जाम स्थल पहुंचे।

    उन्होंने मृतक के स्वजन से मुलाकात कर गहरी संवेदना व्यक्त की तथा प्रशासन से अविलंब मुआवजा उपलब्ध कराने और नागरिक सड़क पर भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने की मांग की। देर शाम तक प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने के प्रयास में जुटा रहा, लेकिन ग्रामीणों का आंदोलन जारी था।