170 साल पुराना ऐतिहासिक वॉच टावर: जानिए अंग्रेजों की अद्भुत सिग्नल संचार प्रणाली
चतरा के गिद्धौर स्थित ब्रह्मपुर पहाड़ी पर 170 साल पुराना ब्रिटिशकालीन वॉच टावर आज भी कौतूहल का विषय है। यह मीनार अंग्रेजों द्वारा सूचनाओं के आदान-प्रद ...और पढ़ें

गिद्धौर की ब्रह्मपुर पहाड़ी पर स्थित ब्रिटिश कालीन वॉच टावर, जो कभी था औपनिवेशिक शासन का प्रहरी।
HighLights
चतरा के गिद्धौर में 170 साल पुराना वॉच टावर।
ब्रिटिश काल में सूचनाओं के आदान-प्रदान हेतु निर्मित।
कोलकाता से वाराणसी 50 मिनट में पहुँचती थी सूचना।
लक्ष्मण दांगी, गिद्धौर (चतरा)। प्रखंड क्षेत्र की ब्रह्मपुर पहाड़ी की चोटी पर स्थित ऐतिहासिक मीनार आज भी स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए कौतूहल एवं गहन जिज्ञासा का विषय बनी हुई है।
वर्षों से लोगों के मन में यह सवाल उठता रहा है कि आखिर इस ऊंची मीनार का निर्माण किसने, कब और किस उद्देश्य से कराया था।
इतिहास के पन्नों पर नजर डालें तो पता चलता है कि यह मीनार लगभग 170 वर्ष पूर्व ब्रिटिश शासनकाल में एक वॉच टावर के रूप में बनाई गई थी।
इसका उपयोग अंग्रेजी प्रशासन द्वारा दूर-दराज के क्षेत्रों तक सूचनाओं का आदान-प्रदान करने तथा आसपास की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए किया जाता था।
करीब 40 फीट ऊंची यह दो मंजिला गोलाकार मीनार चूना-सुरखी के पारंपरिक मिश्रण से निर्मित है। इसकी वास्तुकला उस दौर की उन्नत इंजीनियरिंग और निर्माण शैली का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है।
मीनार के ऊपरी हिस्से में दोनों ओर खिड़कियां बनाई गई हैं, जहां से दूरबीन की सहायता से कई किलोमीटर दूर तक की गतिविधियों पर नजर रखी जाती थी।
समय के थपेड़ों से यह ऐतिहासिक धरोहर आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है, लेकिन इसकी बनावट आज भी तत्कालीन ब्रिटिश स्थापत्य कला की कहानी बयां करती है।
देशभर में बनाए गए थे 45 वॉच टावर
इतिहासकारों के अनुसार वर्ष 1855 के आसपास ब्रिटिश इंजीनियरों ने इस वॉच टावर का निर्माण कराया था। उस समय ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी पूरे भारत में अपना प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत कर रही थी।
प्रशासनिक गतिविधियों की निगरानी और सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में करीब 45 वॉच टावर बनाए गए थे।
इनमें झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश की ऊंची पहाड़ियों का चयन किया गया था। इन्हीं चुनिंदा टावरों में गिद्धौर प्रखंड की ब्रह्मपुर पहाड़ी पर स्थित यह ऐतिहासिक मीनार भी शामिल है।
50 मिनट में कोलकाता से वाराणसी पहुंच जाती थी सूचना
ब्रिटिश शासनकाल में यह वॉच टावर तत्कालीन संचार व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हुआ करते थे। फोर्ट विलियम (कोलकाता) से लेकर वाराणसी के चुनार किले तक लगभग 9.5 से 13 मील की दूरी पर एक-एक वॉच टावर स्थापित किए गए थे।
इन टावरों के माध्यम से विशेष संकेत प्रणाली अपनाकर संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता था। बताया जाता है कि इस व्यवस्था के जरिए फोर्ट विलियम, कोलकाता से वाराणसी तक सूचना महज 50 मिनट में पहुंच जाती थी, जो उस समय के हिसाब से अत्यंत तीव्र एवं आधुनिक संचार प्रणाली मानी जाती थी।
झारखंड-बिहार के कई इलाकों में मौजूद हैं अवशेष
जानकारी के अनुसार झारखंड के कान्हाचट्टी, गिद्धौर की ब्रह्मपुर पहाड़ी, कटकमसांडी के शाहपुर, हजारीबाग के सिलवार, बोकारो के चंदनक्यारी तथा गोमियो क्षेत्र सहित कई स्थानों पर ऐसे वॉच टावर स्थापित किए गए थे। वहीं बिहार के शेरघाटी तक इस ऐतिहासिक संचार श्रृंखला के अवशेष मिलते हैं।
इतिहासकारों का मानना है कि इन टावरों ने अंग्रेजी शासन की प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
आज ब्रह्मपुर पहाड़ी की यह मीनार केवल एक पुरानी इमारत नहीं, बल्कि औपनिवेशिक काल की संचार प्रणाली, स्थापत्य कला और ऐतिहासिक विरासत की जीवंत पहचान है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इस धरोहर का संरक्षण किया जाए और पर्यटन की दृष्टि से विकास हो, तो यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन सकता है।