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    चतरा के इटखोरी मंदिर में राम नाम से सजेंगे 5 हजार से अधिक पेड़, परिसर में विकसित होगी फूलों की बागवानी

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 05:09 PM (GMT+05:30)

    चतरा के इटखोरी स्थित मां भद्रकाली मंदिर परिसर में 5,000 से अधिक पेड़ों पर 'जय श्री राम' लिखा जाएगा। अनवरत कीर्तन सेवा समिति द्वारा यह पहल श्रद्धालुओं ...और पढ़ें

    कीर्तन समिति की पहल पर मां भद्रकाली मंदिर परिसर में 5 हजार से अधिक पेड़ों पर लिखा जाएगा 'जय श्री राम।

    कीर्तन समिति की पहल पर मां भद्रकाली मंदिर परिसर में 5 हजार से अधिक पेड़ों पर लिखा जाएगा 'जय श्री राम।

    HighLights

    1. मां भद्रकाली मंदिर परिसर में 5,000 पेड़ों पर 'जय श्री राम'।

    2. अनवरत कीर्तन सेवा समिति कर रही है यह आध्यात्मिक पहल।

    3. परिसर में विकसित होगी फूलों और फलदार पौधों की बागवानी।

    पंकज कुमार सिंह, इटखोरी (चतरा)। धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी इटखोरी स्थित प्रसिद्ध मां भद्रकाली मंदिर परिसर में अब वृक्ष भी श्रद्धालुओं को प्रभु श्रीराम का संदेश देंगे। मंदिर परिसर में मौजूद हजारों पेड़ों पर आकर्षक ढंग से जय श्री राम अंकित करने का अभियान शुरू किया गया है।

    मंदिर परिसर में पीपल, कदम, बेल, आम और आंवला समेत विभिन्न प्रजातियों के लगभग 5,000 से अधिक पेड़ हैं। आने वाले दिनों में इन सभी वृक्षों पर राम नाम लिखा नजर आएगा। 
     

    कीर्तन सेवा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा कार्य

    यह कार्य मंदिर परिसर में संचालित अनवरत कीर्तन सेवा समिति के तत्वावधान में किया जा रहा है। समिति का मानना है कि पेड़ों पर अंकित राम नाम श्रद्धालुओं को अध्यात्म से जोड़ने के साथ-साथ परिसर के धार्मिक व सकारात्मक वातावरण को और अधिक समृद्ध करेगा।


    प्रतिदिन बड़ी संख्या में मां भद्रकाली के दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए परिसर में प्रवेश करते ही यह पहल विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।

    ताजे फूलों से होगी माता की पूजा, विकसित होगी बागवानी 

    कीर्तन सेवा समिति की योजना केवल पेड़ों पर राम नाम लिखने तक सीमित नहीं है। समिति द्वारा मंदिर परिसर में फलदार पौधों और अलग-अलग प्रजातियों के फूलों की एक आकर्षक बागवानी भी विकसित की जाएगी। 
     
    इन पौधों से मिलने वाले ताजे फूलों का उपयोग प्रतिदिन मां भद्रकाली के श्रृंगार और पूजा-अर्चना में होगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य मंदिर आने वाले भक्तों को आध्यात्मिक अनुभूति कराने के साथ-साथ प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण का सशक्त संदेश देना है।