चतरा के ग्रामीण स्कूलों में शिक्षकों का संकट गहराया, प्रतिनियोजन से कौरा-प्रतापपुर के 2600 छात्रों का भविष्य अधर में
प्रतापपुर प्रखंड के कौरा और प्रतापपुर के दो उच्च विद्यालयों में हाल ही में नियुक्त शिक्षकों के प्रतिनियोजन से गंभीर शिक्षक संकट पैदा हो गया है। इससे ल ...और पढ़ें

शिक्षक की कमी से 2600 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित। एआई जेनरेटेड इमेज
HighLights
कौरा-प्रतापपुर स्कूलों से शिक्षकों का दूसरे विद्यालयों में प्रतिनियोजन।
गंभीर शिक्षक कमी से 2600 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित।
संवाददाता जागरण, प्रतापपुर (चतरा)। ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच प्रतापपुर प्रखंड के उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय, कौरा और उत्क्रमित प्लस टू राज्य संपोषित उच्च विद्यालय, प्रतापपुर की स्थिति कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
इसी वर्ष शिक्षकों की नियुक्ति होने से वर्षों से शिक्षक संकट झेल रहे इन दोनों विद्यालयों के छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और स्थानीय लोगों में नई उम्मीद जगी थी कि अब नियमित पढ़ाई होगी और बच्चों का भविष्य संवर सकेगा। लेकिन यह खुशी अधिक दिनों तक नहीं टिक सकी।
नियुक्ति के कुछ ही समय बाद कई शिक्षकों ने प्रतिनियोजन कराकर दूसरे विद्यालयों का रुख कर लिया, जिससे दोनों विद्यालय फिर से शिक्षक संकट से जूझने लगे हैं। उत्क्रमित प्लस टू उच्च विद्यालय, कौरा में कक्षा एक से 12वीं तक लगभग 1200 विद्यार्थी नामांकित हैं। यहां 29 शिक्षकों का पद स्वीकृत है, जिनमें सात प्राथमिक, 11 टीजीटी और 11 पीजीटी शिक्षक शामिल हैं।
इसके विपरीत वर्तमान में केवल एक प्राथमिक शिक्षक, चार टीजीटी और पांच पीजीटी शिक्षक ही कार्यरत है यानी 29 स्वीकृत पदों के विरुद्ध केवल 10 शिक्षक बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा संभाल रहे हैं।
हालत यह है कि प्राथमिक कक्षाओं से लेकर इंटर तक की पढ़ाई सीमित शिक्षकों के भरोसे चल रही है। विद्यालय में नियुक्त चार पीजीटी शिक्षकों ने प्रतिनियोजन कराकर अन्य विद्यालयों में योगदान दे दिया है। इनमें रसायन, जीव विज्ञान, अंग्रेजी और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक शामिल हैं। इसके कारण विज्ञान संकाय की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हुई है।
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स्थिति प्रतापपुर स्थित उत्क्रमित प्लस टू राज्य संपोषित उच्च विद्यालय में भी अलग नहीं है। यहां लगभग 1400 विद्यार्थी नामांकित हैं। विद्यालय में सात टीजीटी और सात पीजीटी शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी, लेकिन सात पीजीटी शिक्षकों में से चार ने प्रतिनियोजन कराकर रांची, धनबाद, चतरा और सिमरिया के विद्यालयों में योगदान दे दिया।
अब 11वीं और 12वीं की पढ़ाई केवल तीन पीजीटी शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रही है। गणित, जीव विज्ञान, अंग्रेजी और कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक प्रतिनियोजन पर चले जाने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सबसे बड़ी विडंबना यह है कि विभागीय अभिलेखों में ये शिक्षक अब भी मूल विद्यालयों में पदस्थापित माने जाते हैं, जबकि वे वास्तविक रूप से दूसरे विद्यालयों में सेवाएं दे रहे हैं।परिणामस्वरूप विभाग नए शिक्षकों की नियुक्ति भी नहीं कर पा रहा है, क्योंकि रिकॉर्ड में दोनों विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध दर्शाए जा रहे हैं।
इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्र के लगभग 2600 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीण अभिभावकों का कहना है कि शहर के विद्यालयों में शिक्षक पहुंच जाएं और गांव के विद्यालय खाली हो जाएं, तो शिक्षा में समान अवसर का दावा कैसे पूरा होगा?
उनका आरोप है कि यदि प्रभाव और पैरवी के आधार पर प्रतिनियोजन की व्यवस्था चलती रही तो दूरदराज के विद्यालय कभी भी शिक्षक संकट से बाहर नहीं निकल पाएंगे।स्थानीय लोगों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि दोनों विद्यालयों में प्रतिनियोजन की समीक्षा कर शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापन स्थल पर वापस भेजा जाए।
साथ ही जहां वास्तविक रूप से शिक्षकों की कमी है, वहां स्थायी पदस्थापना सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्रामीण बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अधिकार व्यवहार में मिल सके।
अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि जब सरकार शिक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने और प्रत्येक विद्यालय में पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, तब क्या ग्रामीण विद्यालयों से शिक्षकों का लगातार प्रतिनियोजन उन दावों को कमजोर नहीं कर रहा? आखिर कौरा और प्रतापपुर के लगभग 2600 विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?