देवघर में भरभरा कर गिर सकता है 41 साल पुराना पुल, भारी भार से दम तोड़ रही मधुपुर-मारगोमुंडा की लाइफलाइन
मधुपुर-मारगोमुंडा को जोड़ने वाला 1985 में बना फागो जोरिया पुल समय और बढ़ते वाहनों के भार से जर्जर हो रहा है। पुल के पिलर से सरिया बाहर निकल रहा है और ...और पढ़ें

फागो जोरिया पुल। फोटो जागरण
HighLights
1985 में बना फागो जोरिया पुल जर्जर स्थिति में।
पुल के पिलर से सरिया बाहर, नींव कमजोर हुई।
बढ़ते यातायात भार से बड़े हादसे का खतरा।
बाल मुकुंद शर्मा, मधुपुर (देवघर)। मधुपुर अनुमंडल मुख्यालय से मारगोमुंडा प्रखंड को जोड़ने वाली सड़क के बीच चार दशक पूर्व फागो जोरिया पर बना पुल समय की मार और वजन के भार से दम तोड़ रहा है। 1985 में आठ पाया वाले पुल का निर्माण आरइओ विभाग द्वारा किया गया था। उस वक्त इस विभाग का संचालन दुमका से होता था।
देवघर जिला बनने के बाद अक्टूबर 1987 में आइओ विभाग कार्यशील हुई। 41 साल पूर्व बना इस पुल के नीचे का सरिया, पिलर का सरिया स्पष्ट रूप से बाहर निकल गया है। दो साल पूर्व पुल के नीचे पिलर के बेस की मिट्टी का कटाव हो गया था, उस वक्त देवघर से विभागीय अभियंता आकर जांच किया था।
इसके बाद किसी तरह की कोई भी मरम्मत का कार्य नहीं किया गया। यदि पुल का नींव ही कमजोर हो जाए तो आने वाला कल असुरक्षित हो सकता है। पुल के ऊपर से गुजरने वाले सैकड़ों भारी वाहनों का भार यह पुल कैसे संभालेगा, यह चिंता का विषय है।
समय के साथ बढ़ा दबाव
जिस समय पुल का निर्माण हुआ था, उस समय लोग साइकिल, रिक्शा, छोटे-छोटे वाहनों से चलते थे। लेकिन अब हालात यह है कि जिस क्षमता की पुल का निर्माण हुआ था, उससे कई गुना अधिक भार बढ़ गया है।
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जिससे परिचालन का खतरा बढ़ गया है। वर्तमान में हजारों चार पहिया वाहन से लेकर ओवरलोड गिट्टी से भरा हाईवा, ट्रैक्टर बालू, मालवाहक ट्रक के अलावा स्कूल बस, हजारों मोटरसाइकिल का रोजाना परिचालन होता है।
करीब 16 किलोमीटर लंबी मधुपुर थाना चौक से मारगोमुंडा प्रखंड मुख्यालय तक आरइओ विभाग के इस सड़क को 2008 में पथ निर्माण विभाग में परिवर्तित किया गया था।
जिस वक्त पुल का निर्माण हुआ था, इसकी ऊंचाई थी। लेकिन अब धीरे-धीरे पुल की गहराई नीचे की ओर जा रही है, जो कि सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक हो सकती है।
क्या कहते हैं ग्रामीण?
इस पुल से सैकड़ों गांव का आवागमन होता है। मधुपुर अनुमंडल मुख्यालय को जोड़ने वाली पुल के पिलर के नीचे सरिया निकल आया है। धीरे-धीरे पुल नीचे गहराई की ओर जा रही है। इसका नींव कमजोर होने की संभावना है। भविष्य में पुल कमजोर हो जाएगा। इसलिए समय रहते विभाग को इस पर ध्यान देना चाहिए। -संतोष यादव
1985 में पुल का निर्माण हुआ था। उस वक्त का तकनीक कुछ अलग था। 40 साल पुराने पुल के पिलर का राड दोनों तरफ निकल गया है। मिट्टी की भी पिलर के बेस से कटाई हो रही है। विभाग को अविलंब ध्यान देने की जरूरत है। ताकि लोग सुरक्षित तरीके से आवागमन कर सकें। -देवानंद पंडित
लगभग सभी पिलरों के नीचे का सरिया सड़ कर निकल चुका है। धीरे-धीरे यह पुल नीचे की ओर खिसकता जा रहा है। इससे क्षतिग्रस्त होने की संभावना बनी हुई है। समय रहते इस पर ध्यान दिया जाए ताकि कोई बड़ी दुर्घटना न हो। -पप्पू पंडित
मधुपुर- मारगोमुंडा प्रखंड का यह पुल लाइफ लाइन है। चार दशक पहले पुल का निर्माण हुआ था। लेकिन सही देखरेख के अभाव में पुल का पिलर का सरिया बाहर निकल चुका है। प्लास्टर का बुरादा टुटकर गिरते रहता है। पुल के निचले हिस्से का कंक्रीट झरते रहा है। इस पर विभाग को तुरंत ध्यान देना चाहिए ताकि लोगों के जान माल की नुकसान नहीं हो सके। -नंदलाल मंडल
पुल का निर्माण देवघर आरइओ विभाग के कार्यकाल में नहीं हुआ था। अक्टूबर 1987 में आरइओ विभाग देवघर जिला में अस्तित्व में आया। जिस समय पुल का निर्माण हुआ था उस वक्त दुमका में यह विभाग कार्यशील था। चूंकि पथ निर्माण विभाग का सड़क है। इसलिए पुल की देखरेख का जिम्मा पथ निर्माण विभाग की है। वैसे संबंधित विभाग के अभियंता को इसकी सूचना दे दी जाएगी। -देवकी नंदन राव, कनीय अभियंता, आरडब्ल्यूडी, देवघर