देवघर में मानसून की बेरूखी: सूखने के कगार पर धान के बिचड़े, अकाल की आशंका से किसान परेशान
देवघर में मानसून की बेरुखी से किसान परेशान हैं, पिछले दस दिनों से बारिश न होने के कारण धान के बिचड़े सूखने के कगार पर हैं। इससे अकाल की आशंका बढ़ गई ह ...और पढ़ें

सूखने के कगार पर धान के बिचड़े
HighLights
देवघर में दस दिनों से बारिश नहीं, धान के बिचड़े सूखे।
किसान अकाल की आशंका से ग्रस्त, आजीविका पर संकट।
पिछले साल की तुलना में धान की रोपाई नहीं हो पाई।
मनोज सिंह, करौं (देवघर)। आषाढ़ का महीना समाप्त होने को है। मगर अभी तक पूरी तरह से मानसून का आगमन नहीं हुआ है। पिछले दस दिनों से बारिश नहीं होने पर किसानों में बेचैनी बढ़ने लगी है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए है कि कब बारिश हो। बारिश नहीं होने से किसान सूखा पड़ने की आशंका से आशंकित है।
खेतों में लगे धान के बिचड़े सूखने के कगार पर पहुंच चुके हैं। बिचड़े को देख किसानों का कलेजा फट रहा है। यह स्थिति पूरे प्रखंड की है। किसान आसमान की ओर टकटकी लगाकर देख रहे हैं। दिन व रातें वर्षा के इंतजार में कट रही है। मगर मानसून छलावा बना है।
बादल आकर चले जाते, पर बरसते नहीं
बादल आते और चले जाते हैं, लेकिन बरसते नहीं। तीखी धूप से खेतों से नमी कम हो रही है। बिचड़ा पानी के अभाव में मुरझाने लगा है। इसे देख किसानों के चेहरे से मुस्कान गायब है। चिंता की बात यह है कि वर्षा होने के आसार भी नहीं दिख रहा।
पर्याप्त बारिश नहीं होने से खेतों में धान की बुआई करना तो दूर बिचड़ा को बचा पाना मुश्किल हो गया है। वर्तमान में बारिश नहीं होने से किसान काफी चिंतित हैं। मानसून की दगाबाजी से जहां खेत सूख चुके हैं एवं उगे धान का बिचड़ा पर भी प्रभाव दिखने लगा है।
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मानसून की बेरुखी की मार झेल रहे किसान
हल्की बूंदाबांदी को छोड़ दिया जाए तो अब तक मानसून की झमाझम बारिश नहीं हुई है। जबकि जुलाई माह गुजरने को है। किसान मानसून की बेरुखी की मार झेल रहे हैं।
प्रखंड के लगभग 80 फीसद लोगों की जीविका का एकमात्र साधन धान की फसल है। यहां की खेती मानसूनी वर्षा पर निर्भर है। अगर खेती नहीं हुई तो यहां के किसानों को भोजन जुटाने में परेशानी होगी।
पिछले वर्ष इस समय तक पचास फीसद की धनरोपनी का कार्य हो गया था। लेकिन इस वर्ष अभी तक खेती लायक बारिश नहीं हुई है। जिससे खेत में धान का बिचड़ा को बचा पाना मुश्किल हो गया है। - इंदु सिंह, किसान, रानीडीह
जून माह में हुई बारिश के कारण वे सभी आनन फानन में कर्ज लेकर बीज की खरीदारी कर खेतों में डाला। लेकिन मौसम की बेरुखी से ऐसा लग रहा कि इस वर्ष धनरोपनी होना संभव नहीं है। जिससे उन्हें अकाल की छाया मंडराते दिखने लगा है।- श्यामू बाउरी , किसान, करौं
सिंचाई के लिए कई तालाब, डोभा व चेकडैम बना है। लेकिन पिछले साल पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण इनमें जल जमाव नहीं हो सका है। जिस कारण इससे खेतों की सिंचाई हो पाना मुश्किल है।- जीतन मंडल, किसान, कोलडीह
अब तक धनरोपनी का कार्य शुरू नहीं हो सका है। जब तक क्षेत्र में झमाझम बारिश नहीं होगी तब तक धान रोपाई नहीं हो सकता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष स्थिति चिंतनीय है। -आनंद मंडल, किसान, करौं।