Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बोकारो सदर अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट की मौत से सनसनी, आखिरी ट्रांजैक्शन बना चर्चा का विषय

    Updated: Fri, 31 Jul 2026 12:57 PM (IST)

    बोकारो सदर अस्पताल में फिजियोथैरेपिस्ट वीरेंद्र कुमार महतो का शव उनके कार्यस्थल पर फंदे से लटका मिला। ...और पढ़ें

    फिजियोथैरेपिस्ट वीरेंद्र कुमार महतो की मौत के बाद बिलखते स्वजन। (फोटो जागरण)

    फिजियोथैरेपिस्ट वीरेंद्र कुमार महतो की मौत के बाद बिलखते स्वजन। (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. फिजियोथैरेपिस्ट वीरेंद्र कुमार महतो का शव फंदे से मिला।

    2. मृत्यु से पहले पत्नी को 95 हजार रुपये भेजे थे।

    3. पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं की जांच कर रही है।

    जागरण संवाददाता, बोकारो। सदर अस्पताल बोकारो में कार्यरत फिजियोथैरेपिस्ट वीरेंद्र कुमार महतो का शव गुरुवार रात अस्पताल के फिजियोथैरेपी कक्ष में सीलिंग फैन से फंदे के सहारे लटका मिला। घटना की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को जानकारी दी।

    पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुक्रवार को शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा।  मृतक वीरेंद्र कुमार महतो सेक्टर-वन स्थित अपने आवास पर परिवार के साथ रहते थे। पुलिस नगर उपाधीक्षक राजीव रंजन ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है।

    हालांकि पुलिस हत्या और आत्महत्या दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। आत्महत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। मामले की तह तक पहुंचने के लिए अस्पताल परिसर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएंगे और स्वजनों से भी पूछताछ की जाएगी। मृतक गोमिया प्रखंड किे पचमो का रहने वाला था। 

    ड्यूटी के बाद रुके थे

    सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. एनपी सिंह ने बताया कि वीरेंद्र कुमार की ड्यूटी प्रतिदिन सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक रहती थी। ड्यूटी समाप्त होने के बाद जब अस्पताल का गार्ड फिजियोथैरेपी कक्ष बंद कराने पहुंचा तो वीरेंद्र कुमार ने उससे कहा कि वह चला जाए, कमरे को वह स्वयं बंद कर देंगे।

    खबरें और भी

    इसके बाद वह कमरे में ही रुके रहे। शाम पांच बजे के 25 मिनट के बाद उसका मोबाइल बंद हो गया।  जांच में यह भी सामने आया है कि गुरुवार शाम 5 बजकर 22 मिनट पर वीरेंद्र कुमार ने अपने बैंक खाते से 95 हजार रुपये अपनी पत्नी के खाते में स्थानांतरित किए थे।

    जब देर रात तक नहीं पहुंचा तो उसकी पत्नी ने सहयोगियों को फोन किया। इसके बाद तलाश शुरु हुई तो उसका शव उसके कार्यस्थल पर मिला। हालांकि एक बात यह रही कि मृतक ने थेरेपी सेंटर का दरवाजा तक बंद नहीं किया था। 

    समय का पाबंद था कर्मचारी

    सिविल सर्जन डॉ. अभय भूषण प्रसाद ने बताया कि वीरेंद्र कुमार गुरुवार को अपने गांव से सीधे सदर अस्पताल पहुंचे थे। रात करीब साढ़े नौ बजे उन्हें घटना की सूचना मिली। देर शाम अस्पताल के सफाईकर्मियों ने देखा कि फिजियोथैरेपी कक्ष बंद नहीं था।

    संदेह होने पर अंदर देखा गया तो वीरेंद्र कुमार का शव फंदे से लटका मिला। उन्होंने कहा कि वीरेंद्र कुमार समय के बेहद पाबंद और अपने कार्य के प्रति जिम्मेदार कर्मचारी थे।