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    कोल इंडिया की चेतावनी: न्यू लेबर कोड हड़ताल पर 'काम नहीं तो वेतन नहीं'

    By Ashish Kumar Ambastha Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Fri, 06 Feb 2026 11:57 PM (IST)

    चार लेबर कोड के विरोध में 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल बुलाई गई है। कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी साईराम ने इसे अवैध बताते हुए 'काम नहीं तो वेतन नह ...और पढ़ें

    न्यू लेबर कोड के विरोध में कोल इंडिया में भी हड़ताल की तैयारी।

    न्यू लेबर कोड के विरोध में कोल इंडिया में भी हड़ताल की तैयारी।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। चार लेबर कोड को लेकर 12 फरवरी को श्रमिक तथा अन्य संगठनों की देशव्यापी हड़ताल बुलाई गई है। हड़ताल को लेकर कोयला कंपनियों में काफी हलचल है। श्रम संगठनों की ओर से कोयला सेक्टर भी हड़ताल का नोटिस दिया है।

    इधर, हड़ताल को लेकर कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी साईराम ने एक अपील जारी की है। जिसमें कहा है कि कोल इंडिया द्वारा बिजली के अलावा, स्टील, सीमेंट और उर्वरक जैसे जरूरी उद्योगों को भी कोयला की आपूर्ति की जाती है, जो देश की आधारभूत संरचना के विकास के लिए बहुत जरूरी है।

    यह मामला श्रम प्रवर्तन प्राधिकरणों के समक्ष सुलह की प्रक्रिया में है, यह एक गैर-कानूनी हड़ताल होगी और इस पर काम नहीं तो वेतन नहीं और अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाही लागू किया जाएगा।


    कोयला उद्योग में कार्यरत एमएचएस, एटक, सीटू, इंटक से जुड़े कुछ श्रम संगठनों द्वारा 12 फरवरी 2026 को चार लेबर कोड के नोटिफिकेशन तथा श्रमिकों एवं जनसामान्य की अन्य मांगों के विरोध में एक दिवसीय हड़ताल का नोटिस दिया गया है।

    औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 एवं उसके अंतर्गत नियमों के प्रावधानों के अनुसार, उक्त हड़ताल नोटिस को मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय), नई दिल्ली, कोयला मंत्रालय एवं अन्य प्राधिकरणों को भेजा गया है।

    कहा है कि कोल इंडिया एवं इसकी अनुषंगी कंपनियां भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जो देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 80 प्रतिशत उत्पादन करती हैं।

    मानसून से प्रभावित उत्पादन अब फिर से पटरी पर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025- 26 के उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने और ऊर्जा क्षेत्र की मांग को पूर्ण करने के लिए बिना किसी अवरोध के काम जारी रखना आवश्यक है।

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    काम बंद होने से अनुषंगी कंपनियों की उत्पादन क्षमता में बाधा आ सकती है और देश में कोयले की आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) आयातित कोयले पर निर्भरता को कम करके आत्मनिर्भर भारत पहल में अहम योगदान दे रहा है।

    कोयला उद्योग में हड़ताल से देश की निरंतर ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ेगा। कोल इंडिया चेयरमैन के अपील के बाद कोयला कंपनियां में इसी के तर्ज पर गतिविधियां तेज हो गई है। यूनियन नेताओं से प्रबंधन की ओर से लगातार इस पर सहयोग की बात कही जा रही है।