एक क्लिक में खुल रही अपराधियों की पूरी कुंडली, डिजिटल पुलिसिंग से बदली जांच की तस्वीर
Dhanbad Police अब अंतर-प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली (ICJS) का उपयोग कर अपराधियों, खासकर संगठित गिरोहों और साइबर अपराधियों के रिकॉर्ड पल भर में प्राप्त कर रही है।

अपराधी की कुंडली खंगालती पुलिस। (एआइ फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। पहले किसी पकड़े गए अपराधी का आपराधिक इतिहास खंगालने और दूसरे राज्यों से उसके बारे में जानकारी जुटाने में पुलिस को कई सप्ताह, कभी-कभी महीनों तक इंतजार करना पड़ता था। अब अंतर-प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली के माध्यम से पुलिस एक क्लिक में देश के विभिन्न हिस्सों में दर्ज अपराधियों के रिकार्ड तक पहुंच बना रही है।
खासकर संगठित गिरोहों से जुड़े अपराधियों की पूरी कुंडली खंगालने में इस व्यवस्था ने धनबाद पुलिस को बड़ी राहत दी है। धनबाद पुलिस संगठित अपराधियों और कुख्यात गिरोहों के सदस्यों पर शिकंजा कसने के लिए इस डिजिटल व्यवस्था का प्रभावी ढंग से उपयोग कर रही है।
प्रिंस खान गिरोह समेत विभिन्न संगठित गिरोहों से जुड़े अपराधियों के पुराने मामलों और आपराधिक गतिविधियों की जानकारी जुटाने में भी पुलिस को काफी सहायता मिली है। दागी और आपराधिक चरित्रवाले लोगों का रिकार्ड खंगालने का काम अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
जिले के सभी थाना की पुलिस डिजिटल व्यवस्था में काफी संतुष्ट हैं। पल भर में ही किसी दागी का पूरा कुंडली निकाल रही है।
पुलिस को मिल रहा अपराधियों का पूरा रिकार्ड
- अपराधी जेल में है या बाहर, इसकी जानकारी अब पुलिस को एक क्लिक पर मिल रही है।
- पुलिस द्वारा की जाने वाली ऑनलाइन विवेचना की केस डायरी, चार्जशीट और एफआर कोर्ट में भी एक क्लिक पर देखी जा रही है।
- कोर्ट के निर्णय, रिमांड समेत अन्य जरूरी जानकारी पुलिस ऑनलाइन आसानी से देख पा रही है। पहले इन जानकारियों के लिए पुलिस को कोर्ट जाना पड़ता था।
- कौन आरोपित जेल से रिहा हो चुका है और कौन रिहा होने वाला है, इसकी जानकारी ई-प्रिजन के माध्यम से पुलिस को मिल रही है।
- अपराधियों के फिंगरप्रिंट का मिलान जेल के ऑनलाइन डाटा से किया जा रहा है, जिससे आरोपितों की पहचान और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच में मदद मिल रही है।
एक दिन में तैयार हो रही अपराधी की पूरी जानकारी
पहले किसी अपराधी के पकड़े जाने के बाद पुलिस को उसके पुराने मामलों की जानकारी के लिए दूसरे जिलों और राज्यों की पुलिस से संपर्क करना पड़ता था। रिकार्ड मंगाने और उसका सत्यापन करने में लंबा समय लग जाता था। कई मामलों में अपराधी के पूरे आपराधिक इतिहास तक पहुंचने में महीनों लग जाते थे।
अब अपराधियों से जुड़े रिकार्ड के डिजिटल होने के कारण पुलिस को कम समय में जरूरी जानकारी मिल रही है। देश के किसी भी हिस्से में दर्ज मामलों और उपलब्ध आपराधिक रिकार्ड की जानकारी हासिल करने में पुलिस को काफी सुविधा हो रही है। धनबाद पुलिस किसी संदिग्ध या गिरफ्तार अपराधी का पूरा आपराधिक इतिहास तेजी से खंगालने में सफल हो रही है।
साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने में भी मददगार
यह डिजिटल व्यवस्था साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई में भी धनबाद पुलिस के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। साइबर ठगी के मामलों में पकड़े जानेवाले आरोपितों का रिकार्ड खंगालने के दौरान पुलिस को अब दूसरे राज्यों से जानकारी जुटाने में पहले जैसी परेशानी नहीं हो रही है।
देश के किसी भी कोने में साइबर अपराध के मामलों में गिरफ्तार होकर जेल जा चुके अपराधियों की उपलब्ध जानकारी तक पहुंचने में पुलिस को सुविधा मिल रही है। इससे बार-बार अपराध करनेवाले साइबर अपराधियों की पहचान करने और उनके नेटवर्क तक पहुंचने में जांच एजेंसियों को मदद मिल सकती है।
पांच प्रमुख संस्थाएं एक डिजिटल मंच से जुड़ी
अंतर-प्रचलित आपराधिक न्याय प्रणाली एक ऐसा डिजिटल मंच है, जो आपराधिक न्याय व्यवस्था से जुड़े पांच प्रमुख स्तंभों को आपस में जोड़ता है। इसमें पुलिस, न्यायालय, जेल, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और अभियोजन विभाग शामिल हैं। इस व्यवस्था के माध्यम से प्राथमिकी, केस डायरी, आरोप पत्र, अदालती आदेश और अन्य आवश्यक सूचनाओं के आदान-प्रदान की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया गया है। विभिन्न संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय से जांच और न्यायिक प्रक्रिया को बल मिल रही है।
दूसरे राज्यों के अपराधियों की जानकारी भी आसान
धनबाद पुलिस के सामने अक्सर ऐसे अपराधी आते हैं, जिनका आपराधिक इतिहास झारखंड के अलावा दूसरे राज्यों में भी दर्ज होता है। पहले ऐसे अपराधियों की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित राज्य और पुलिस इकाइयों से पत्राचार और संपर्क करना पड़ता था। इसमें काफी समय लग जाता था।
अब डिजिटल व्यवस्था के विस्तार से दूसरे राज्यों में उपलब्ध रिकार्ड और मामलों की जानकारी तेजी से प्राप्त करने में सहायता मिल रही है। इससे पुलिस को अपराधियों की पहचान करने, उनके पुराने मामलों को जोड़ने और संगठित आपराधिक नेटवर्क की पड़ताल करने में आसानी हो रही है।
हाइटेक पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम
पिछले कुछ वर्षों में झारखंड पुलिस ने तकनीक के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाया है। धनबाद पुलिस भी आधुनिक और डिजिटल पुलिसिंग के नए तरीके अपना रही है। अपराधियों का रिकार्ड तेजी से खंगालने की सुविधा मिलने से जांच में समय की बचत हो रही है और पुलिस को अपराधियों के पुराने नेटवर्क तथा गतिविधियों को समझने में मदद मिल रही है।
पुलिस के लिए यह व्यवस्था खासकर संगठित अपराध, अंतरराज्यीय अपराध और साइबर अपराध के मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो रही है। आनेवाले समय में डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से अपराधियों पर शिकंजा कसने और अपराध नियंत्रण की व्यवस्था और मजबूत होगा।
