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    प्रिंस खान कनेक्शन: नेताओं और मीडिया तक पहुंचे तार, धनबाद पुलिस चुप क्यों?

    By Niraj Duby Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Thu, 07 May 2026 02:30 PM (IST)

    Dhanbad Police Exposes Prince Khan धनबाद पुलिस ने प्रिंस खान के सहयोगी मेजर से पूछताछ के बाद गिरोह के बड़े खुलासे किए हैं, जिसमें मीडिया, सफेदपोश और र ...और पढ़ें

    धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार। (फोटो जागरण)

    धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार। (फोटो जागरण)

    HighLights

    1. प्रिंस खान पाकिस्तान भागा, जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा।

    2. गिरोह ने दहशत फैलाने को मीडिया, सफेदपोशों का किया इस्तेमाल।

    3. मेजर ने संभाला गिरोह का तकनीकी, वित्तीय और रंगदारी नेटवर्क।

    जागरण संवाददाता, धनबाद। Dhanbad Police Exposes Prince Khan: वासेपुर का भगोड़ा बदमाश प्रिंस खान और उसके गिरोह को लेकर धनबाद पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। प्रिंस के सहयोगी सैयद अब्बास नकवी उर्फ सैफी उर्फ मेजर से पूछताछ के बाद पुलिस ने दावा किया है कि गिरोह ने दहशत फैलाने के लिए मीडिया और कुछ प्रभावशाली लोगों का भी इस्तेमाल किया।

    मेजर ने पुलिस को बताया कि कुछ लोग प्रिंस खान से आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे थे और अप्रत्यक्ष रूप से गिरोह के लिए काम कर रहे थे। इसके अलावा उसने यह भी कहा कि गिरोह के तार कुछ सफेदपोश और राजनीतिक व्यक्तियों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

    धनबाद पुलिस ने प्रिंस खान के सहयोगी मेजर को रिमांड पर लेकर पूछताछ की। मेजर को पुलिस ने दुबई भागने से पहले कोलकाता से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद धनबाद के एसएसपी प्रभात कुमार ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मीडिया को प्रिंस खान गिरोह, उसकी करतूतों और उसके मददगारों के बारे में जानकारी दी।

    एसएसपी ने बताया कि प्रिंस खान के तार मीडिया और राजनीतिक दलों से भी जुड़े हैं। हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं बताया। वहीं, लोग जानना चाहते हैं कि किन दलों के किन नेताओं से प्रिंस के संबंध जुड़े हैं।

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    एसएसपी ने बताया कि रिमांड पर पूछताछ के दौरान मेजर ने अपने खिलाफ दर्ज करीब तीन दर्जन आपराधिक मामलों में प्रत्यक्ष संलिप्तता स्वीकार की। इसके साथ ही उसने कई अन्य मामलों में भी अपनी अप्रत्यक्ष भूमिका का खुलासा किया।

    उसने पुलिस को बताया कि धनबाद और आसपास के इलाकों में रंगदारी, गोलीबारी और बमबाजी की अधिकांश घटनाओं के पीछे प्रिंस खान गिरोह की सुनियोजित रणनीति काम कर रही थी, जिसमें उसकी भूमिका भी बेहद अहम थी।

    मेजर के बयान को लेकर एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा कि पूछताछ में प्रिंस खान की कई करतूतों का खुलासा हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रिंस खान का पूरा परिवार, रिश्तेदार और करीबी अपराध में 

    संगठित अपराध का माडल: टारगेट से वसूली तक पूरी चेन

    मेजर ने पूछताछ में बताया कि गिरोह बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। सबसे पहले जिले के बड़े व्यवसायियों, डाक्टरों, ठेकेदारों और अन्य सक्षम लोगों को चिन्हित किया जाता था। इसके बाद उनके बारे में पूरी जानकारी जुटाई जाती थी, खासकर कहां रहते हैं, क्या कारोबार है, आर्थिक स्थिति क्या है।

    तमाम जानकारी के बाद गिरोह के सदस्य उनसे संपर्क साधते थे और मोबाइल काल, वर्चुअल नंबर या अन्य माध्यमों से धमकी देकर रंगदारी की मांग की जाती थी। रकम वसूलने के बाद उसे अलग-अलग माध्यमों से सुरक्षित तरीके से प्रिंस खान तक पहुंचाया जाता था।

    इस पूरे नेटवर्क में मेजर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण थी। वह न सिर्फ टारगेट तय करने में शामिल था, बल्कि गिरोह के सदस्यों को हथियार उपलब्ध कराना, वसूली गई रकम का प्रबंधन करना, अपराधियों को सुरक्षित ठिकाना देना और पूरे आपरेशन को समन्वित करना भी उसके जिम्मे था।

    डिजिटल और फाइनेंशियल सिस्टम संभालता था मेजर

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह का तकनीकी और वित्तीय संचालन पूरी तरह मेजर के हाथ में था। वह वर्चुअल नंबर उपलब्ध करवाता था, जिनके जरिए रंगदारी के लिए काल की जाती थी ताकि पुलिस ट्रेस न कर सके। मोबाइल फोन और इंटरनेट के माध्यम से धमकी भरे संदेश भेजना भी उसी का काम था।

    सबसे अहम भूमिका उसकी पैसे के ट्रांजेक्शन में थी। उसने बताया कि रंगदारी की रकम को सीधे प्रिंस खान तक पहुंचाने के लिए बैंक खातों, हवाला, बिटकाइन और एटीएम में नकद जमा जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया जाता था।

    पूछताछ में उसने 100 से अधिक बैंक खातों की जानकारी दी है, जिनके जरिए करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ। पुलिस अब इन खातों की गहराई से जांच कर रही है। मेजर ने यह भी बताया कि प्रिंस खान और उसके परिवार के सदस्य ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए शुरुआत में उन्हें तकनीकी और वित्तीय मामलों में काफी परेशानी होती थी। इसी वजह से मेजर धीरे-धीरे उसका सबसे भरोसेमंद और करीबी सहयोगी बन गया।

    अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा

    मेजर ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि पुलिस का दबाव बढ़ने के बाद प्रिंस खान के लिए दुबई में रहना मुश्किल हो गया था। गिरफ्तारी के डर से वह अवैध रूप से पाकिस्तान भाग गया। उसने बताया कि प्रिंस खान को पाकिस्तान भागने में उसके घर में काम करनेवाली एक पाकिस्तानी नौकरानी ने मदद की।

    वर्तमान में वह पाकिस्तान में उसी के घर में रह रहा है और प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ चुका है। यह खुलासा धनबाद पुलिस के लिए बेहद गंभीर है, क्योंकि इससे इस पूरे गिरोह के अंतरराष्ट्रीय आतंकी कनेक्शन की आशंका मजबूत हुई है।

    मीडिया और सफेदपोशों का इस्तेमाल

    पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह ने दहशत फैलाने के लिए मीडिया और कुछ प्रभावशाली लोगों का भी इस्तेमाल किया। मेजर ने पुलिस को बताया है कि कुछ लोग प्रिंस खान से आर्थिक रूप से लाभान्वित हो रहे थे और अप्रत्यक्ष रूप से गिरोह के लिए काम कर रहे थे।

    इसके अलावा उसने यह भी कहा कि गिरोह के तार कुछ सफेदपोश और राजनीतिक व्यक्तियों से भी जुड़े हुए हैं। पुलिस अब इन सभी पहलुओं की गहराई से जांच कर रही है।

    मेजर और प्रिंस के बीच विवाद

    मेजर ने बताया कि पिछले कुछ समय से उसका और प्रिंस खान का संबंध खराब हो गया था। पाकिस्तान जाने के मुद्दे पर दोनों के बीच मतभेद हुआ। इसके बाद प्रिंस खान ने उसकी जगह अपने रिश्तेदार आदिल को गिरोह में अहम जिम्मेदारी दे दी।

    मेजर ने यह भी कहा कि प्रिंस खान उसे हमेशा नौकर की तरह समझता था, जिससे वह नाराज था और वर्ष 2025 में उसने अलग होकर खुद रंगदारी का काम शुरू कर दिया।

    वर्तमान में कौन चला रहा गैंग

    मेजर ने पुलिस को बताया है कि गैंग का संचालन प्रिंस खान का भाई गोपी खान और उसका साला ऋत्विक खान रिश्तेदार आदिल, दुबई में रह रहीं उसकी पत्नियां, कर रही हैं। इसके अलावा यहां मौजूद उसके अन्य भाई और रिश्तेदार भी गिरोह के संचालन में प्रिंस की मदद कर रहे हैं।

    चर्चित अपराधों में संलिप्तता का खुलासा

    मेजर ने कई बड़े और चर्चित मामलों में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है। इनमें शामिल इसराफिल लाला के घर बमबाजी माडर्न टायर दुकान पर गोलीबारी, शाही दरबार रेस्टोरेंट पर फायरिंग, क्लीनिक लैब पर हमला,अप्सरा ड्रेसेस दुकान पर गोलीबारी, संवेदक रामनरेश सिंह के घर पर फायरिंग के अलावा उसने कई हत्याकांडों का भी खुलासा किया है।

    2018 में कुसुंडा फाटक के पास रंजीत सिंह की गोलीमारकर हत्या,
    2021: जमीन विवाद में लाला खान पर गोलीबारी
    2023: उपेंद्र सिंह की हत्या जिसमें मृतक की पत्नी की संलिप्तता का भी दावा
    2024: मो. शहाबुद्दीन सिद्दीकी की हत्या, जेल से बना अपराध का नेटवर्क

    मेजर ने बताया कि जब वह और गिरोह के अन्य सदस्य झारखंड के विभिन्न जेल धनबाद, चाईबासा, पलामू और हजारीबाग में बंद था तब उन्होंने अलग-अलग इलाकों के अपराधियों से संपर्क बनाया।
    इन्हीं संपर्कों का इस्तेमाल बाद में शूटर और अन्य आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया था।

    करोड़ों की कमाई का निवेश

    मेजर ने बताया कि रंगदारी के जरिए कमाए गए करोड़ों रुपये को जमीन और अन्य व्यवसायों में निवेश किया गया है। इन निवेशों में परिवार और करीबी सहयोगियों का इस्तेमाल किया गया है ताकि पुलिस की नजर से बचा जा सके। पुलिस अब इन संपत्तियों की पहचान कर साक्ष्य जुटाने में लगी है।