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    सारंडा के जंगलों में सालों तलाश, आखिर घर के करीब पकड़ा गया एक करोड़ का इनामी माओवादी मिसिर बेसरा

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 08:31 AM (IST)

    Misir Besraः एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को धनबाद और गिरिडीह जिले की सीमा से गिरफ्तार किया गया है। ...और पढ़ें

    भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेस। (फाइल फोटो)

    भाकपा (माओवादी) का पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेस। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. एक करोड़ के इनामी माओवादी मिसिर बेसरा गिरफ्तार।

    2. धनबाद-गिरिडीह सीमा से हुई बड़ी गिरफ्तारी।

    3. झारखंड में माओवादियों के लिए बड़ा झटका।

    संवाद सहयोगी, टुंडी (धनबाद) झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक करोड़ रुपये के इनामी माओवादी कमांडर मिसिर बेसरा को धनबाद और गिरिडीह जिले की सीमा से गिरफ्तार किया है। मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के बाद एक तरह से झारखंड में माओवादियों के बड़े चेहरों का सफाया हो गया है। यह सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी राहत की बात है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी के लिए लंबे समय से झारखंड के सांरडा जंगल में सर्च अभियान चलाया जा रहा था और वह घर गिरिडीह के मदनाडीह के आस-पास की छुपकर बैठा था। उसकी गिरफ्तारी की बात धनबाद के मनियाडीह से की जा रही है। वह उसके घर मदनाडीह से करीब 50 किलोमीटर की है। 

    भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा झारखंड के गिरिडीह जिले के खुखरा थाना क्षेत्र के मदनाडीह गांव का रहने वाला है। उस पर झारखंड सरकार ने एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित कर रखा था।

    हालांकि, उसकी गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल धनबाद जिले के मनियाडीह इलाके की चर्चा है। यह इलाका कभी घोर माओवादी प्रभावित क्षेत्र रहा है। मिसिर 1985-86 में ही माओवाद से प्रभावित होकर घर से निकल गया था और तब से वापस नहीं लौटा। अंडरग्राउंड होकर काम करता था। 

    धनबाद के बरवाअड्डा का मोछू भी काबू 

    मिसिर बेसरा के साथ दो और माओवादियों को पकड़ा गया है। उनमें एक मोछू उर्फ मेहनत उर्फ विभीषण उर्फ कुंबा मुर्मू भी शामिल है। वह धनबाद जिले के बरवाअड्डा थाना क्षेत्र के घोड़ाबांधा गांव का निवासी है। वह माओवादी संगठन की रीजनल कमेटी का सदस्य था और झारखंड सरकार ने उस पर ₹15 लाख का इनाम घोषित कर रखा था।

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    वह लंबे समय से मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाता था और सारंडा-पोड़ाहाट क्षेत्र में संगठन के संचालन, लेवी वसूली, कैडर प्रबंधन और अभियान के समन्वय में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।